धर्म/अध्यात्म

के अहैं इष्ट देव? जेकर पूजा करतहीं बदल जाई आपन तकदीर

हिंदू धरम अउर जोतिष सास्तर मा इष्ट देव कय पूजा क बहुतै महत्व अहै। अइसन माना जात अहै कि पूरी दुनिया मा तमाम दैवीय शक्तियां अहैं, मुला हर मनई क जुड़ाव कवनों एक खास शक्ति से गहिर होत है। अगर हम अपने इष्ट देव क पहिचान कय उनकर पूजा करी, तउ जिनगी क कठिन से कठिन राह भी आसान होइ जात अहै। आवा इहाँ जानित अहै कि इष्ट देव आखिर के होत अहैं?

के होत अहैं इष्ट देव?
‘इष्ट’ सब्द क मतलब अहै पियारा या पूजनीय। इष्ट देव वै देवता होत अहैं, जेसे हमार पिछले जनम क करम जुड़ा होत अहैं अउर जेकर पूजा करै से हमका जल्दीय नीक फल मिलत अहैं। सिधवा बात मा कही तउ, करोड़ों देवी-देवतन मा से ऊ एक रूप जे आपके सबसे नगिचे अहै अउर जेकरे प्रति आपकी पक्की भगति अहै, उहै आपके इष्ट देव अहैं।

कैसन करी अपने इष्ट देव क पहिचान?
जोतिष सास्तर के हिसाब से इष्ट देव क पहिचान करै क दुइ तरीका अहैं – जनम कुंडली के अनुसार। कुंडली मा 12 भाव होत अहैं, जेमा से पांचवां भाव इष्ट देव क जगह माना जात अहै। इ भाव मा जौन रासि होति अहै अउर ओकर जौन स्वामी ग्रह होत अहैं, उहै आधार पर आपके इष्ट देव तय होत अहैं।

रासि के हिसाब से इष्ट देव:
मेष अउर बृश्चिक रासि: इन रासिन क स्वामी मंगल अहैं, इन्हकर इष्ट देव हनुमान जी अहैं।
बृषभ अउर तुला रासि: इनकर स्वामी सुक्कर (शुक्र) अहैं, इनकी इष्ट देवी माई दुरगा या लछमी जी अहैं।
मिथुन अउर कन्या रासि: इनकर स्वामी बुध अहैं, इनके इष्ट देव भगवान गनेस अहैं।
कर्क रासि: एकर स्वामी चंद्रमा अहैं, इनके इष्ट देव भगवान शिव अहैं।
सिंह रासि: एकर स्वामी सूरुज (सूर्य) अहैं, इनके इष्ट देव हनुमान जी या सूरुज देव अहैं।
धनु अउर मीन रासि: इनकर स्वामी बृहस्पति अहैं, इनके इष्ट देव भगवान विष्नु या उनके अवतार अहैं।
मकर अउर कुंभ रासि: इनकर स्वामी सनी देव अहैं, इनके इष्ट देव सनीदेव या हनुमान जी अहैं।

इष्ट देव क पूजा के फायदा:
इष्ट देव क पूजा-पाती करै से मनई क मन क सांति मिलति है अउर धियान (एकाग्रता) बढ़ति है। धरम करम क मानय वालों के मुताबिक, अगर कुंडली मा दूसर ग्रह खराब फल दइ रहे होंय, तउ भी इष्ट देव क किरपा से उन दोसन क असर कम होइ जात है। एसे जिनगी मा भारी तरक्की मिलति है अउर काम-काज मा आवय वाली बाधा दूर होइ जाति अहै।

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