जीवनशैली

सिर्फ एक घंटा क ‘डिजिटल डिटाक्स’ से सुधर सकत है रउअन क सेहत

फोन या स्क्रीन देखब अब हमरी जिन्दगी क एगो बहुत जरूरी हिस्सा बनि चुका है। बिना एकरे जिन्दगी चले के सोचेव भी नामुमकिन लागता है। स्क्रीन से निकले वाली ब्लू लाइट क रेडिएशन हमरी मानसीक सेहत प बहुत बुरा असर डारत है। कई गो रिसर्च और रिपोर्ट में ई बात सामने आई है कि हमका अपन स्क्रीन टाइम कम करे क जरूरत है। एकरे बर डिजिटल डिटाक्स क तरीका अपनावेब सबसे नीक है। एकरे में रउआ कुछ देर बर मोबाइल, लैपटाप या दूसर गैजेट्स से दूरी बनावे क रहत है। हम बस एक घंटा के डिजिटल डिटाक्स के बारे में बात कर त हईं। रउआ बस एक घंटा बर फोन से दूर रहे क रहत है। ई मानसीक तनाव, अवसाद और नींद क कमी क दूर करत है। एकरे साथ ही ई असली जिन्दगी, शौक और अपनों के साथ समय बितावे क एगो बढ़िया तरीका है। ई एकाग्रता बढ़त है और स्क्रीन क लत से आजादी देवत है। जब दिमाग खाली रहत है तब नए विचार और रचनात्मकता पनपत है, जे लगातार मनोरंजन क शोर में दब जात है।

डिजिटल डिटाक्स क फायदा

आजकाल हमरी ज्यादातर काम फोन से ही होत है और रील्स देखब सब क आदत बनि चुका है। धीरे-धीरे एकरी लत लाग जात है और हम बिना कवनो कारण के भी फोन देखत रहत हईं। अगर रउआ सोशल मीडिया क लत से आजादी चाहत हईं, त डिजिटल डिटाक्स जरूर अपनाईं। मोबाइल क लत लोगन के इ कदर बानी है कि वो रात भर बस रील्स देखत रहत हैं। शार्ट वीडियो के अलावा टीवी स्क्रीन के सामने घंटा बितावे भी इही में शामिल है। हालांकि फोन पूरी तरह छोड़ब त संभव नाहीं है, लेकिन एकरी लत प काबू पावे क नाम ही डिजिटल डिटाक्स है। अगर रउआ कुछ देर बर भी इ तरीका अपनाईं त दिमाग क काम करे क क्षमता बहुत नीक हो जइहै।

अगर रउआ सिर्फ एक घंटा बर फोन या दूसर स्क्रीन से दूरी बनावत हईं त नींद में बहुत सुधार आवत है। दिमाग थक जाए के बाद भी फोन प समय बितावे से मानसीक सेहत बिगड़त है। रात में देर तक फोन देखब स्लीपिंग पैटर्न खराब करत है, इहें बर दिन में एक बार डिजिटल डिटाक्स प ध्यान जरूर दीं। एकरे से दिमाग क सेहत सुधरत है काहे कि फोन क लत हमार फोकस बिगाड़त है। जब हम गैजेट्स से दूर रहत हईं त दिमाग का आराम मिलत है। एकरे अलावा दिमाग में नई कोशिकाएं (cells) भी बनत हैं जेसे एकाग्रता बढ़त है और दूसर फायदा भी मिलत है। ई रूटीन काम में गुणवत्ता बढ़त है। असल में, ध्यान न देवे क वजह से काम खराब होत है, इहें बर रोज कम से कम एक घंटा डिजिटल डिटाक्स जरूर करें।

कैसे शुरू करें?

ज्यादातर लोगन का ई पता नाहीं होत है कि डिजिटल डिटाक्स कैसे करे क है, इहें बर रउआ शुरुआत बस एक घंटा से करैं। रउआ इ शुरुआत इतवार या अपन वीक-ऑफ के दिन से कर सकत हईं। धीरे-धीरे जब आदत बनि जाए त हफ्ता में 3 दिन एक घंटा डिजिटल डिटाक्स अपनाईं। इ दौरान फोन के नोटिफिकेशन पूरी तरह से बंद कर दीं। हो सके त इंटरनेट सर्विस भी रोक दीं। सिर्फ बहुत जरूरी काल और मैसेज ही चालू राखें। फोन क स्क्रीन के रंगीन राखे क जगह ‘डार्क मोड’ में रखें। बहुत ज्यादा लाइट से आँख प बुरा असर पड़त है।

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