प्रेस नोट

पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश: राष्ट्रीय लोक अदालत अउर गंगा एक्सप्रेस-वे के नवा उपलब्धिकन पर आधारित खबरें

पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगन में 426 मामिलन का निस्तारण

लखनऊ: 09 मई, 2026

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश अउर प्रदेश के सब जिला उपभोक्ता आयोगन में दिनांक 09 मई 2026 के राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गा। राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिये उपभोक्ता से जुड़ल मामिलन के जल्दी अउर मिल-जुल के निपटावे में बड़का कामयाबी मिलि। आयोग से मिलल जानकारी के मुताबिक, राज्य उपभोक्ता आयोग में कुल 27 मामला सूचीबद्ध भये रहे, जेमें से 16 मामिलन का सफलतापूर्वक निपटारा करा दिहा गा। ई मामिलन में कुल 1,43,04,702 रुपया के धनराशि के समाधान करावा गा। अइसने, प्रदेश के सब जिला उपभोक्ता आयोगन में कुल 803 मामला सूचीबद्ध भये रहे, जेके सापेक्ष 410 मामिलन का निपटारा करा गा। ई मामिलन में कुल 12,64,09,209.3 रुपया के धनराशि के समाधान करावा गा। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग बस्ती सबसे ज्यादा 39 मामिलन का निपटारा करेस, जबकि जिला उपभोक्ता आयोग गौतम बुद्ध नगर सबसे ज्यादा 2,92,96,712 रुपया के धनराशि के समाधान कराएस।

सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार, राम यतन/06:35 पी.एम. फोन नम्बर: 0522-2239023, ई.पी.बी.एक्स.: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन: 223, 224, 225 फैक्स नं.: 0522-2237230, 0522-2239586, ई-मेल: upinformation@up.nic.in, वेबसाइट: www.upinformation.up.nic.in

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पारदर्शी अउर नकलविहीन माहौल में पूरी भई प्रवक्ता संवर्ग के लिखित परीक्षा: डॉ. प्रशांत कुमार

17 मंडल मुख्यालयन में भई प्रवक्ता संवर्ग के लिखित परीक्षा, ए.आई. इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से सब परीक्षा केन्द्रन के तगड़ी निगरानी

लखनऊ: 09 मई, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार बताइन कि आयोग द्वारा आयोजित विज्ञापन सं. 02/2022 प्रवक्ता संवर्ग के तहत कुल 18 विषयन के लिखित परीक्षा के क्रम में शनिवार के पहिली अउर दूसरी पाली में कुल 09 विषयन के परीक्षा प्रदेश के 17 जिला (मंडल मुख्यालयन) में तय परीक्षा केन्द्रन पर सफलतापूर्वक पूरी कराई गा। उ बताइन कि पहिली पाली में बिहान 09:30 बजे से 11:30 बजे तक 278 परीक्षा केन्द्रन पर भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास अउर शिक्षाशास्त्र विषयन के परीक्षा भई, जबकि दूसरी पाली में दुपहरिया 02:30 बजे से 04:30 बजे तक 269 परीक्षा केन्द्रन पर अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य अउर समाजशास्त्र विषयन के परीक्षा भई।

आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार बताइन कि परीक्षा के पारदर्शिता अउर सुचिता बनाये रखे खातिर आयोग मुख्यालय में बनल ए.आई. इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से सब परीक्षा केन्द्रन के तगड़ी निगरानी कीन गा। ई दौरान आयोग के सदस्यन, सचिव, परीक्षा नियंत्रक अउर उपसचिव के मौजूदगी में परीक्षा केन्द्रन पर लागल ए.आई. कैमरा के जरिये परीक्षियन के गतिविधि पर लगातार नजर राखि गा। उ कहिन कि प्रदेश के सब तय परीक्षा केन्द्रन पर परीक्षा पूरा पारदर्शी, नकलविहीन, सुचितापूर्ण, बिना कवनो बाधा के अउर समय से पूरी भई। डॉ. प्रशांत कुमार परीक्षा के सफल संचालन में जिला प्रशासन अउर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारीन द्वारा दिहल गइल सहयोग खातिर आभार जतवाइन। उ बताइन कि 09 मई 2026 के लिखित परीक्षा में कुल 89,766 परीक्षार्थी शामिल भये, जेमें महिला परीक्षियन के उपस्थिति 34.89 प्रतिशत अउर पुरुष परीक्षियन के उपस्थिति 42.26 प्रतिशत रही।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे, राम यतन/06:35 पी.एम. फोन नम्बर: 0522-2239023, ई.पी.बी.एक्स.: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन: 223, 224, 225 फैक्स नं.: 0522-2237230, 0522-2239586, ई-मेल: upinformation@up.nic.in, वेबसाइट: www.upinformation.up.nic.in

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राष्ट्रीय लोक अदालत में 53 वाद निपटावा गा, तीन करोड़ से ज्यादा के मुआवजा दिहा गा

लखनऊ: 09 मई, 2026

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ में शनिवार के राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गा। ई आयोजन माननीय वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन रॉय, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति, लखनऊ के अध्यक्षता में पूरा भई। उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति के सचिव अउर निबंधक (जे.) (स्टेशनरी) श्री भगीरथ वर्मा बताइन कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 53 वाद के सफलतापूर्वक निपटारा करा गा। ई मामिलन में पक्षकारन के बीच सहमति बने पर कुल 3 करोड़ 49 लाख 3 हजार 251 रुपया 60 पैसा के धनराशि मुआवजा के तौर पर दिहा गा।

सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार, राम यतन/06:45 पी.एम. फोन नम्बर: 0522-2239023, ई.पी.बी.एक्स.: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन: 223, 224, 225 फैक्स नं.: 0522-2237230, 0522-2239586, ई-मेल: upinformation@up.nic.in, वेबसाइट: www.upinformation.up.nic.in

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लेख: यूपीडा गंगा एक्सप्रेस-वे: विकास, समृद्धि अउर विरासत के भव्य संगम

लखनऊ: 09 मई, 2026

उत्तर प्रदेश, जवन कभी अपनी भारी जनसंख्या, सीमित संसाधन अउर विकास के चुनौती के कारन चर्चा में रहत रहा, आज तेजी से बदलत भारत के विकासगाथा के एक मजबूत हिस्सा बन चुका है। पिछला कुछ बरसन में राज्य ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जवन गति अउर दृष्टि के साथ काम कीन है, ओसे न खाली प्रदेश के तस्वीर बदल गई है, बल्कि देश के कुल विकास में भी बड़का योगदान दिहा है। ई परिवर्तनकारी यात्रा के एक ऐतिहासिक पड़ाव है गंगा एक्सप्रेस-वे, जवन विकास, समृद्धि अउर विरासत के अद्भुत संगम बनके निकलल है। 29 अप्रैल 2026 के दिन उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक सुनहला दिन के तौर पर दर्ज हो चुका है, जब हरदोई जिला के धरती से देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 36,230 करोड़ रुपया के लागत से बनल 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से प्रयागराज) के लोकार्पण कीन। ई खाली एक सड़क परियोजना के उद्घाटन नाहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य के नई दिशा अउर दशा के ऐलान है। ई परियोजना प्रदेश के विकास यात्रा में एक मील के पत्थर साबित होवे वाली है।

गंगा एक्सप्रेस-वे का खाली एक परिवहन परियोजना के तौर पर देखब ओकर महत्व का सीमित करब होई। ई एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य अउर पूर्वी हिस्सा का एक मजबूत आर्थिक अउर सामाजिक धागा में पिरोवे के काम करी। मेरठ से शुरू होके ई एक्सप्रेस-वे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली अउर प्रतापगढ़ होते हुये प्रयागराज तक पहुँचल है। अइसने, ई एक्सप्रेस-वे 12 प्रमुख जिला का जोड़त हुये एक मजबूत विकास कॉरिडोर बनावत है। ई एक्सप्रेस-वे के सबसे बड़की खूबी ई है कि ई खाली दूरी नाहीं घटावत, बल्कि समय अउर अवसर के अंतर का भी कम करत है। पहले जहाँ मेरठ से प्रयागराज जाय में लंबा समय लागत रहा, उहे 11 घंटा के यात्रा अब खाली 6 घंटा में पूरी होइ सकत है, ओसे लगभग 30 फीसदी तक ईंधन भी बचि। ई एक्सप्रेस-वे के बने से व्यापार, उद्योग अउर आम जनता के जिंदगी में गजब के बदलाव आइ। तेज अउर सुरक्षित आवागमन से आर्थिक गतिविधि का नई गति मिलि। एक्सप्रेसवे के साथ 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करा जात है, जवन इन जिला में रोजगार के नवा अवसर पैदा करि।

गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे बनत औद्योगिक क्लस्टर अउर लॉजिस्टिक हब उत्तर प्रदेश का औद्योगिक क्रांति के ओर बढ़ावत है। फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, एमएसएमई, हैंडलूम अउर लेदर उद्योग जइसन क्षेत्रन में निवेश बढ़ावा मिलि। ओसे न खाली प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास होई, बल्कि लाखन नौजवानन खातिर रोजगार के अवसर भी पैदा होइ। ई परियोजना “लोकल से ग्लोबल” के सोच का पूरा करे में भी अहम भूमिका निभाइ। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र में बनल समान, जवन अब तक खाली सीमित बाजारन तक पहुँच पावत रहे, अब नेशनल अउर इंटरनेशनल बाजारन तक आसानी से पहुँच सकि। मेरठ के खेल के समान, उन्नाव के लेदर उद्योग, प्रतापगढ़ के आँवला अउर हरदोई के हैंडलूम ई एक्सप्रेस-वे के जरिये नई ऊँचाई तक पहुँच सकि। ओसे न खाली स्थानीय कारीगरन अउर उद्यमी का फायदा होई, बल्कि प्रदेश के अर्थव्यवस्था भी मजबूत होइ।

खेती के क्षेत्र में भी गंगा एक्सप्रेस-वे एक क्रांतिकारी बदलाव लावे वाला है। गंगा के मैदानी इलाकन के उपजाऊ माटी से जुड़ल किसान ई परियोजना के सबसे बड़े लाभार्थी होइहैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारन किसान अपनी फसल का कम समय में बड़े बाजारन तक पहुँचा सकिहैं, जेसे उनका बढ़िया दाम मिलि। एक समय रहा जब उत्तर प्रदेश के पहचान पिछड़ापन अउर पलायन से जुड़ल रही, लेकिन आज उहे प्रदेश देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क वाला राज्य बनके निकलल है। सड़केन के जाल, मेट्रो रेल, रैपिड रेल अउर आधुनिक हवाई अड्डा के विकास सब मिलके प्रदेश का कनेक्टिविटी के एक नई पहचान देत हैं। ई परिवर्तन खाली भौतिक ढाँचा तक सीमित नाहीं है, बल्कि ई सामाजिक अउर आर्थिक बदलाव के भी प्रतीक है।

गंगा एक्सप्रेस-वे, उत्तर प्रदेश के “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” बने के लक्ष्य के ओर एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अउर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जइसन योजनान ने राज्य के नौजवानन अउर उद्यमीन का आत्मनिर्भर बने खातिर प्रेरित कीन है। बढ़त निवेश, औद्योगिक विस्तार अउर बेहतर कनेक्टिविटी के कारन प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास के नई ऊँचाई के ओर बढ़त है। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने गंगा एक्सप्रेस-वे का प्रदेश के अर्थव्यवस्था के “रीढ़” बतवाइन। उनकर नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास के जवन रफ्तार पकड़ल है, उ ई परियोजना में साफ-साफ देखल जा सकत है। ई एक्सप्रेस-वे “साफ नीति अउर साफ नियत” के साथ समय से पूरा कीन गा है, जवन सुशासन अउर पारदर्शिता के प्रतीक है। गंगा एक्सप्रेस-वे खाली कंक्रीट अउर डामर से बनल एक सड़क नाहीं है, बल्कि ई उम्मीद, संभावना अउर समृद्धि के रास्ता है। गंगा नदी, जवन सदियन से ई प्रदेश के जीवनरेखा रही है, उहे के नाम पर बनल ई एक्सप्रेस-वे विकास के एक नई धारा के प्रतीक बन गइल है।

आवे वाला सालन में गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक अउर सांस्कृतिक विकास में एक अहम भूमिका निभाइ। ई परियोजना न खाली प्रदेश का देश के अग्रणी राज्यन में स्थापित करि, बल्कि पूरा भारत के विकास मॉडल खातिर एक प्रेरणा के स्रोत भी बनी। ई “नए भारत के नए उत्तर प्रदेश” के उ तस्वीर दिखावत है, जेमें विकास के रफ्तार ही पहचान बन चुकी है। गंगा एक्सप्रेस-वे खाली एक परियोजना नाहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी पहल है, जवन उत्तर प्रदेश का तरक्की, समृद्धि अउर आत्मनिर्भरता के ओर बढ़ावत है। ई विकास अउर विश्वास के अइसन संगम है, जवन आवे वाली पीढ़ियन खातिर एक मजबूत अउर समृद्ध भविष्य के नींव रखी। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास के नई पहचान बनके निकलल है।

– सरिता वर्मा, सूचना अधिकारी, पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

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लेख: उद्यान विभाग: ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से लहलाने बस्ती के किसानन के खेत, आधुनिक खेती से आइ नया सबेरा

लखनऊ: 09 मई, 2026

भारतीय खेती के दिल कहल जाय वाले उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी आज अपनी सबसे सुनहरी अउर बदलाव वाली दौर से गुजरत है। बरसन से जवन खेती का मौसम के दया अउर अंधाधुंध सिंचाई के भरोसे छोड़ दिहा गइल रहा, ओका अब आधुनिक तकनीक अउर वैज्ञानिक तरीका के मजबूत साथ मिलत है। राज्य के उद्यान विभाग ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के तहत सूक्ष्म सिंचाई का घर-घर पहुँचा के पानी बचावे अउर बढ़िया पैदावार के एक अनूठा कीर्तिमान बनावत है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ई अहम हिस्सा ई मूल मंत्र पर काम करत है कि पानी के हर एक बूँद के ठीक अउर ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो। ई तकनीक ने खेती के उ पुरान अउर भ्रम वाला बात का जड़ से खत्म कर दिहा है, जेमें मानल जात रहा कि खेतन का भरपेट पानी देवे से ही बढ़िया फसल मिलत है। आज उत्तर प्रदेश में ड्रिप अउर स्प्रिंकलर जइसन सूक्ष्म सिंचाई तकनीकन के कारन गन्ना अउर बागवानी जइसन नगदी फसलन में 25 से 50 प्रतिशत तक पानी के भारी बचत होत है।

योजना के सफलता के सबसे बड़का सबूत ई है कि प्रदेश के 82 हजार से ज्यादा किसान ड्रिप तकनीक का अपना लिहिन हैं। सरकार ई दिशा में छोटे किसानन (2 हेक्टेयर तक के जमीन वाले) का ड्रिप सिस्टम लगावे पर 90 प्रतिशत तक के बड़की सब्सिडी देत है, जेसे ई महँग तकनीक आम किसान के पहुँच में आ गई है। ई योजना के एक अउर क्रांतिकारी पहलू ‘फर्टीगेशन’ है, जेमें पानी के साथ ही खाद सीधे पौधा के जड़ तक पहुँचत है। ओसे खाद के बर्बादी रुकत है अउर पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक के शानदार बढ़त होत है। गन्ना विभाग इसी तकनीक से 73,000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में सिंचाई करत है अउर ऊबड़-खाबड़, रेतीली या खारी जमीनन पर भी आम अउर अमरूद के बाग लहलहात हैं। सरकारी योजनान के ई संजीवनी ने जमीनी स्तर पर कैसा चमत्कार कीन है, ओकर सबसे जीवंत मिसाल उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला के विकासखण्ड हरैया के गाँव कसैला में देखल जा सकत है।

यहाँ के निवासी श्री विजय प्रकाश शुक्ला आज खाली एक किसान नाहीं, बल्कि पूरा इलाका खातिर आधुनिक खेती के एक मजबूत हस्ताक्षर बन चुके हैं। श्री राम फेर के बेटा विजय प्रकाश एक बहुत साधारण अउर सीमित संसाधन वाले किसान परिवार से हैं। उनकर जीवन उ लाखन भारतीय किसानन के आईना रहा, जवन पुरखौनी खेती के चक्रव्यूह में फँसल रहे। विजय प्रकाश जी दिन-रात अपने खेतन में हाड़-तोड़ मेहनत करत रहे, लेकिन पुरान तरीका से खेत में पानी भरवे में न खाली भारी मात्रा में भूजल बर्बाद होत रहा, बल्कि ट्यूबवेल चलावे खातिर डीजल अउर बिजली के खरचा उनकर कमर तोड़ देत रहा। इहें न, खुले पानी के साथ डालल गइल महँग खाद या तो बही जात रही या जमीन के बहुत नीचे चली जात रही, जेसे पौधा का पूरा पोषण नाहीं मिलत रहा।

इसी घोर निराशा के बीच उद्यान विभाग के एक पहल उनकर जीवन में आशा के नई किरन बनके आइ। विभाग के अधिकारीन अउर उद्यान निरीक्षकन ने गाँव स्तर पर मिलके विजय प्रकाश शुक्ला का प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) के बारे में विस्तार से जागरूक कीन। शुरुआत में कवनो आम किसान के जइसन उनकर मन में भी ई नई तकनीक का लेके कई तरह के शक रहे। उ सोचत रहे कि पाइप से बूँद-बूँद पानी गिरवे से भला खेत कैसे सींचि जइहैं। लेकिन विभागीय अधिकारीन ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उनका ड्रिप सिंचाई के वैज्ञानिक पहलू समझाइन। उनका बतावा गइल कि कैसे ई तकनीक खाली पौधा के जड़ का नमी देत है, फालतू घास-फूस का बढ़वे से रोकत है अउर सबसे बड़की बात, ई पूरा सिस्टम उनके खेत में लगावे खातिर सरकार 90 प्रतिशत के सब्सिडी देई।

सरकारी सहायता के ई भरोसा ने विजय प्रकाश जी के सब हिचकिचाहट खत्म कर दिहा। तकनीक अउर सरकारी प्रोत्साहन पाके श्री शुक्ला ने अपने 0.80 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले खेत में एक बड़का रिस्क लेत हुये पारंपरिक फसलन के जगह शिमला मिर्च के खेती करे के साहसिक फैसला लिहिन। उनके खेत में जब ड्रिप सिंचाई सिस्टम लाग गइल, तो बदलाव के बीज उसी दिन बोवा गइल। 90 प्रतिशत के भारी सब्सिडी मिले के कारन ई आधुनिक सिस्टम के आर्थिक बोझ उनकर कंधन पर बिल्कुल नाहीं पड़ल। ड्रिप सिस्टम चालू होते ही उ महसूस करिन कि उनके खेत में पानी के खपत में 40 प्रतिशत तक के भारी कमी आ गइल है। फर्टीगेशन के जरिये खाद सीधे जड़ तक पहुँचे लागी, जेसे मेहनत के भारी बचत भई अउर फसल पूरी तरह से निरोगी अउर पुष्ट होके बढ़े लागी।

ई आधुनिक प्रयोग ने श्री शुक्ला के आर्थिक स्थिति का पूरी तरह से बदल के रख दिहा। पारंपरिक खेती में जहाँ प्रति एकड़ लागत लगभग 30,000 रुपया तक पहुँच जात रही अउर मुनाफा पक्का नाहीं रहत रहा, उहीं ड्रिप सिंचाई ने लागत का काफी कम कर दिहा। शिमला मिर्च के फसल जब तैयार भई, तो पैदावार अउर क्वालिटी देखके सब दंग रहि गइन। पैदावार में सीधे तौर पर 20 से 25 प्रतिशत के बढ़त दर्ज कीन गइल। उ अपने इसी छोट से खेत से लगभग 32 कुंतल उच्च क्वालिटी के शिमला मिर्च के पैदावार करिन। बाजार में ई शानदार फसल का तुरंत खरीद लिहिन अउर उनका 35 से 40 रुपया प्रति किलो के बढ़िया दाम मिलल। ई पूरा प्रक्रिया में उनका प्रति एकड़ लगभग 60,000 रुपया तक के शुद्ध कमाई भई। ई कमाई ने उनके परिवार का एक नया आर्थिक सहारा दिहा, पुरान कर्ज से मुक्त कीन अउर उनके जीवन स्तर का पूरी तरह से ऊँचा उठा दिहा। आज विजय प्रकाश शुक्ला के खेत आस-पास के दर्जनों गाँव के किसानन खातिर एक ‘ओपन एयर लेबोरेटरी’ (खुली प्रयोगशाला) बन गइल है। ई विकासगाथा भारतीय कृषि व्यवस्था के उ सुखद भविष्य के दस्तावेज है, जहाँ किसान अभाव में नाहीं जियत, बल्कि अपनी मेहनत, सरकारी योजनान के साथ अउर आधुनिक तकनीक के दम पर विकास के नई शिखर तय करत है।

– जनपद बस्ती

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