प्रेस नोट

पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश: राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रवक्ता संवर्ग परीक्षा अउर विकासगाथाएं

पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों में 426 मामलों का निपटारा

लखनऊ: 09 मई, 2026

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश अउर प्रदेश के सब जिला उपभोक्ता आयोगन में 09 मई, 2026 क राष्ट्रीय लोक अदालत लगावा गा। राष्ट्रीय लोक अदालत क माध्यम से उपभोक्ता लोगन के मामला के जल्दी अउर मिल-जुल के निपटारा करे में बड़की कामयाबी मिली। आयोग से मिलल जानकारी के मुताबिक, राज्य उपभोक्ता आयोग में कुल 27 मामला दर्ज भये रहे, जेमें से 16 मामला सफलता से निपटाए गए। इन मामला में कुल 1,43,04,702 रुपया क भुगतान करावा गा। अइसने, प्रदेश के सब जिला उपभोक्ता आयोगन में कुल 803 मामला सूचीबद्ध रहे, जेमें से 410 मामला निपटाए गए। इन मामला में कुल 12,64,09,209.3 रुपया क निपटारा करावा गा। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग बस्ती सबसे जियादा 39 मामला निपटाए, जबकि जिला उपभोक्ता आयोग गौतम बुद्ध नगर सबसे जियादा 2,92,96,712 रुपया क निपटारा करावा।

सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार, राम यतन/06:35 पी.एम. फोन नम्बर: 0522-2239023, ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132, 33, 34, 35, एक्सटेंशन: 223, 224, 225, फैक्स नं0: 0522-2237230, 0522-2239586, ई-मेल: upinfobanda/humpus.com, वेबसाइट: www.upinfovad.up.nic.in

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पारदर्शी अउर नकलविहीन माहौल में पूरी भई प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा: डॉ. प्रशांत कुमार

17 मंडल मुख्यालयन में भई प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा

एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से सब परीक्षा केंद्रन की कड़ी निगरानी भई

लखनऊ: 09 मई, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार बताइन कि आयोग के विज्ञापन सं0 02/2022 प्रवक्ता संवर्ग के तहत कुल 18 विषय के लिखित परीक्षा के क्रम में शनिवार क पहिली अउर दूसरी पाली में कुल 09 विषय की परीक्षा प्रदेश के 17 जिला (मंडल मुख्यालय) में तय परीक्षा केंद्रन पर सफलता से पूरी कराई गई। उ बताइन कि पहिली पाली में बिहान 09:30 बजे से 11:30 बजे तक 278 परीक्षा केंद्रन पर भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास अउर शिक्षाशास्त्र विषय की परीक्षा भई, जबकि दूसरी पाली में दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक 269 परीक्षा केंद्रन पर अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य अउर समाजशास्त्र विषय की परीक्षा भई।

आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार बताइन कि परीक्षा में पारदर्शिता अउर सुचिता बनाए रखे खातिर आयोग मुख्यालय में बनल एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से सब परीक्षा केंद्रन पर कड़ा नजर रखा गा। एह दौरान आयोग के सदस्य, सचिव, परीक्षा नियंत्रक अउर उपसचिव के मौजूदगी में परीक्षा केंद्रन पर लागल ए.आई. कैमरा से परीक्षार्थियों की हर हरकत पर लगातार ध्यान रखा गा। उ कहिन कि प्रदेश के सब परीक्षा केंद्रन पर परीक्षा एकदम पारदर्शी, नकलविहीन, सुचितापूर्ण, बिना कौनों बाधा अउर समय से पूरी भई। डॉ. प्रशांत कुमार परीक्षा के सफल संचालन में जिला प्रशासन अउर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी लोगन के सहयोग खातिर आभार जताइन। उ बताइन कि 09 मई 2026 की लिखित परीक्षा में कुल 89,766 परीक्षार्थी शामिल भये, जेमें महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 34.89 प्रतिशत अउर पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 42.26 प्रतिशत रही।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे, राम यतन/06:35 पी.एम. फोन नम्बर: 0522-2239023, ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132, 33, 34, 35, एक्सटेंशन: 223, 224, 225, फैक्स नं0: 0522-2237230, 0522-2239586, ई-मेल: upinfobanda/humpus.com, वेबसाइट: www.upinfovad.up.nic.in

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राष्ट्रीय लोक अदालत में 53 वाद निपटाए गए, तीन करोड़ से जियादा क मुआवजा मिला

लखनऊ: 09 मई, 2026

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ बेंच में शनिवार क राष्ट्रीय लोक अदालत लगावा गा। ई आयोजन माननीय वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन रॉय, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति, लखनऊ की अध्यक्षता में पूरा भई। उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति के सचिव अउर निबंधक (जे.) (स्टेशनरी) श्री भगीरथ वर्मा बताइन कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 53 वाद सफलता से निपटाए गए। इन मामला में पक्षकार लोगन के बीच सहमति बनै पर कुल 3 करोड़ 49 लाख 3 हजार 251 रुपया 60 पैसा क धनराशि मुआवजा के तौर पर मिली।

सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार, राम यतन/06:45 पी.एम. फोन नम्बर: 0522-2239023, ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132, 33, 34, 35, एक्सटेंशन: 223, 224, 225, फैक्स नं0: 0522-2237230, 0522-2239586, ई-मेल: upinfobanda/humpus.com, वेबसाइट: www.upinfovad.up.nic.in

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लेख: यूपीडा गंगा एक्सप्रेस-वे: विकास, समृद्धि अउर विरासत क भव्य संगम

लखनऊ: 09 मई, 2026

उत्तर प्रदेश, जवन कभी अपनी बड़ी आबादी, सीमित साधन अउर विकास की चुनौती के चलते चर्चा में रहत रहा, आज तेजी से बदलत भारत की विकासगाथा क एक मजबूत पन्ना बन चुका है। बीतल कछुआ बरिसन में राज्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जवन रफ्तार अउर दूरदृष्टि के साथ काम कीहस, ओसे न खाली प्रदेश की तसवीर बदली, बल्कि देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिहस। एह बदलाव वाली यात्रा क एक ऐतिहासिक पड़ाव है गंगा एक्सप्रेस-वे, जवन विकास, समृद्धि अउर विरासत क अद्भुत संगम बनके उभरा है। 29 अप्रैल 2026 क दिन उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक सुनहला अध्याय बनके दर्ज हो चुका है, जब हरदोई जिला की धरती से देश के मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी 36,230 करोड़ रुपया की लागत से बनल 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से प्रयागराज) क लोकार्पण कइलन। ई खाली एक सड़क परियोजना क उद्घाटन नाहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य की नई दिशा अउर दशा क ऐलान है।

गंगा एक्सप्रेस-वे क खाली एक परिवहन परियोजना के रूप में देखल ओकर महत्ता क कम करे वाला होई। ई एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य अउर पूर्वी हिस्सा क एक मजबूत आर्थिक अउर सामाजिक सूत्र में पिरोए क काम करी। मेरठ से शुरू होके ई एक्सप्रेस-वे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली अउर प्रतापगढ़ होते हुये प्रयागराज तक पहुँचत है। अइसने ई एक्सप्रेस-वे 12 मुख्य जिला क जोड़त हुये एक मजबूत विकास कॉरिडोर बनावत है। ई एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खूबी ई है कि ई खाली दूरी क कम नाहीं करत, बल्कि समय अउर मौका के अंतर क भी घटावत है। पहले जहिया मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा में लंबा समय लागत रहा, उहई 11 घंटा की यात्रा अब खाली 6 घंटा में पूरी होइ, एसे करीब 30 प्रतिशत तक ईंधन भी बची।

एह एक्सप्रेस-वे के बनला से व्यापार, उद्योग अउर आम नागरिकन के जीवन में बड़ा बदलाव आइ। तेज अउर सुरक्षित आवागमन से आर्थिक गतिविधि क नई रफ्तार मिली। एक्सप्रेसवे के साथ 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित कीन जात हैं, जवन इन जिला में रोजगार क नया अवसर पैदा करिहन। गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित होत औद्योगिक क्लस्टर अउर लॉजिस्टिक हब उत्तर प्रदेश क औद्योगिक क्रांति की ओर ले जात हैं। फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, एमएसएमई, हैंडलूम अउर लेदर उद्योग जइसन क्षेत्र में निवेश क बढ़ावा मिली। एसे न खाली प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास होई, बल्कि लाखन नौजवानन खातिर रोजगार क अवसर भी मिलिहन। ई परियोजना “लोकल से ग्लोबल” की सोच क सच करे में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभइह।

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र में बनल सामान, जवन अब तक सीमित बाजार तक ही पहुँच पावत रहा, अब राष्ट्रीय अउर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुँच सकिह। मेरठ क खेल क सामान, उन्नाव क लेदर उद्योग, प्रतापगढ़ क आंवला अउर हरदोई क हैंडलूम ई एक्सप्रेस-वे के जरिया नई ऊँचाई क छुई सकिहन। एसे न खाली स्थानीय कारीगर अउर व्यापारी क फायदा होई, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होई। खेती के क्षेत्र में भी गंगा एक्सप्रेस-वे एक क्रांतिकारी बदलाव लावे वाला है। गंगा के मैदानी इलाका की उपजाऊ जमीन से जुड़ल किसान ई परियोजना के सबसे बड़ा फायदा उठावे वाला लोगन में से होइहन। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते किसान अपनी फसल क कम समय में बड़े बाजार तक पहुँचाइ सकिहन, जेसे उनकर फसल क बेहतर दाम मिली। एही के साथ, कृषि आधारित उद्योग के विकास से ग्रामीण इलाका में रोजगार क नया अवसर पैदा होइ अउर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होई।

एक समय रहा जब उत्तर प्रदेश की पहचान पिछड़ेपन अउर पलायन से जुड़ल रही, लेकिन आज वही प्रदेश देश में सबसे जियादा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क वाला राज्य बनके उभरा है। सड़कन क जाल, मेट्रो रेल, रैपिड रेल अउर आधुनिक हवाई अड्डा क विकास सब मिलके प्रदेश क कनेक्टिविटी की नई पहचान देत हैं। ई बदलाव खाली भौतिक ढांचा तक सीमित नाहीं, बल्कि ई सामाजिक अउर आर्थिक बदलाव क भी प्रतीक है। गंगा एक्सप्रेस-वे, उत्तर प्रदेश के “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” बनै के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अउर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जइसन योजना राज्य के नौजवानन अउर व्यापारी लोगन क आत्मनिर्भर बनै खातिर प्रेरित कीहस। बढ़़त निवेश, औद्योगिक विस्तार अउर बेहतर कनेक्टिविटी के चलते प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास की नई ऊँचाई की ओर बढ़़त है।

एह परियोजना क एक महत्वपूर्ण पहलू ओकर सामरिक उपयोगिता भी है। उत्तर प्रदेश में विकसित होत डिफेंस कॉरिडोर देश की सुरक्षा व्यवस्था क मजबूत बनावत है। गंगा एक्सप्रेस-वे ई कॉरिडोर क बेहतर कनेक्टिविटी देई, जेसे रक्षा उत्पादन अउर सैन्य सप्लाई में तेजी आई। एइसने ई परियोजना न खाली आर्थिक, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की नजर से भी बहुत महत्वपूर्ण है। प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी गंगा एक्सप्रेस-वे क प्रदेश की अर्थव्यवस्था की “रीढ़” कहिन। उनकर नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की जवन रफ्तार पकड़ी है, उ एह परियोजना में साफ-साफ देखाई देत है। ई एक्सप्रेस-वे “साफ नीति अउर साफ नीयत” के साथ समय से पूरा कीन गा, जवन सुशासन अउर पारदर्शिता क प्रतीक है।

गंगा एक्सप्रेस-वे खाली कंक्रीट अउर डामर से बनल एक सड़क नाहीं, बल्कि ई उम्मीद, संभावना अउर समृद्धि क रास्ता है। ई परियोजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत अउर आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनावत है। गंगा नदी, जवन सदियन से ई प्रदेश की जीवनरेखा रही है, उहई के नाम पर बनल ई एक्सप्रेस-वे विकास की एक नई धारा क प्रतीक बन गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश क अनाज, आलू, गन्ना अउर मध्य उत्तर प्रदेश क धान व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अब सीधा बड़े बाजार अउर प्रसंस्करण केंद्र से जुड़ सकिह अउर किसानन क उनकर फसल क बेहतर दाम मिली। गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेला देवी से लेके प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुँचे में आसानी होई। एसे स्थानीय अर्थव्यवस्था क ताकत मिली। आने वाला बरिसन में गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक अउर सांस्कृतिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ई परियोजना न खाली प्रदेश क देश के आगे वाला राज्यन में जगह देई, बल्कि पूरा भारत के विकास मॉडल खातिर एक प्रेरणा भी बनई। ई “नए भारत के नए उत्तर प्रदेश” की उ तसवीर दिखावत है, जेमें विकास की रफ्तार ही पहचान बन चुकी है। गंगा एक्सप्रेस-वे खाली एक परियोजना नाहीं, बल्कि एक बदलाव वाला पहल है, जवन उत्तर प्रदेश क प्रगति, समृद्धि अउर आत्मनिर्भरता की ओर ले जात है। ई विकास अउर विश्वास क अइसन संगम है, जवन आवे वाली पीढ़ी खातिर एक मजबूत अउर समृद्ध भविष्य की नींव राखिह। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई पहचान बनके उभरा है। ई न खाली एक सड़क परियोजना है, बल्कि ई राज्य के समग्र विकास, आर्थिक समृद्धि अउर सामाजिक बदलाव क माध्यम भी है। आवे वाला बरिसन में ई एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश क देश के अग्रणी राज्यन में स्थापित करे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

-सरिता वर्मा, सूचना अधिकारी, पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

लेख: उद्यान विभाग

‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से लहलहाये बस्ती के किसानन के खेत, आधुनिक खेती से आइ नया सवेरा

लखनऊ: 09 मई, 2026

भारतीय खेती क दिल कहल जाए वाला उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी आज अपनी सबसे सुनहरी अउर बदलाव वाली दौर से गुजरत है। दशकन से जवन खेती क मौसम की दया अउर अंधाधुंध सिंचाई के भरोसे छोड़ दिहा गा रहा, ओका अब आधुनिक तकनीक अउर वैज्ञानिक तरीका क मजबूत सहारा मिलत है। राज्य क उद्यान विभाग ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (प्रति बूंद जियादा फसल) के तहत सूक्ष्म सिंचाई क घर-घर पहुँचाके जल संरक्षण अउर बेहतर उत्पादन क एक अनोखा रिकॉर्ड बनावत है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना क ई अहम हिस्सा ई मूल मंत्र पर काम करत है कि पानी की हर एक बूंद क सटीक अउर जियादा से जियादा इस्तेमाल होय। ई तकनीक खेती के उ पुराना अउर गलत भ्रम क जड़ से खत्म कर दिहस है जेमें मानल जात रहा कि खेतन क पूरा पानी से भरे पर ही अच्छी फसल मिलत है। आज उत्तर प्रदेश में ड्रिप अउर स्प्रिंकलर जइसन सूक्ष्म सिंचाई तकनीक की बदौलत गन्ना अउर बागवानी जइसन नकदी फसल में 25 से 50 प्रतिशत तक पानी की बहुत बचत होत है।

योजना की व्यापकता अउर कामयाबी क सबसे बड़ा सबूत ई है कि प्रदेश के 82 हजार से जियादा किसान ड्रिप तकनीक क पूरी लगन के साथ अपना चुके हैं। सरकार ई दिशा में छोटा अउर सीमांत किसानन (2 हेक्टेयर तक की जमीन वाले) क ड्रिप सिस्टम लगावे पर 90 प्रतिशत तक क भारी छूट (अनुदान) दे रही है, जेसे ई महंगी तकनीक आम किसान की पहुँच में आ गई है। ई योजना क एक अउर क्रांतिकारी पहलू ‘फर्टीगेशन’ है, जेमें पानी के साथ ही खाद सीधा पौधा की जड़ तक पहुँचत है। एसे खाद क बर्बादी रुकत है अउर पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक की शानदार बढ़त होत है। गन्ना विभाग एही तकनीक से 73,000 हेक्टेयर से जियादा क्षेत्रफल में सिंचाई करत है अउर ऊबड़-खाबड़, रेतीली या खारी जमीनन पर भी आम अउर अमरूद के बाग लहलहा रहे हैं। सरकारी योजनान की एही संजीवनी जमीन पर कैसा चमत्कार कीहस है, एकर सबसे जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला के विकासखण्ड हरैया के गांव कसैला में देखै क मिलत है। हिया के रहनिहार श्री विजय प्रकाश शुक्ला आज खाली एक किसान नाहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र खातिर आधुनिक खेती के एक मजबूत हस्ताक्षर बन चुके हैं।

श्री राम फेर के बेटा विजय प्रकाश एक बहुत साधारण अउर सीमित साधन वाले किसान परिवार से हैं। उनकर जीवन उ लाखन भारतीय किसानन क तसवीर रहा जवन पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही पारंपरिक खेती के चक्कर में फँसे रहे। विजय प्रकाश जी दिन-रात अपने खेतन में कड़ी मेहनत करत रहे, लेकिन पारंपरिक तरीका से खेत में पानी भरै में न खाली भारी मात्रा में जमीन क पानी बर्बाद होत रहा, बल्कि ट्यूबवेल चलावे खातिर डीजल अउर बिजली क खर्चा उनकर कमर तोड़ देत रहा। एही के अलावा, खुला पानी के साथ डालल गई महंगी खाद या तो बह जात रही या जमीन के बहुत नीचे चली जात रही, जेसे पौधा क पूरा पोषण नाहीं मिलत रहा। मौसम की अनिश्चितता, खरपतवार की भरमार अउर हर साल बढ़़त खेती क लागत के कारण उनकर कमाई ना के बराबर रहत रही। अक्सर उनकर मन में ई निराशा घर कर जात रही कि का कभी किसानी के काम से परिवार की आर्थिक हालत सुधर सकी? एही गहरी निराशा के बीच उद्यान विभाग की एक पहल उनकर जीवन में आशा की नई किरण बनके आई। विभाग के अधिकारी अउर उद्यान निरीक्षक गांव स्तर पर संपर्क करत हुये विजय प्रकाश शुक्ला क प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) प्रणाली के बारे में विस्तार से जागरूक कीहिन।

शुरुआत में कौनों भी आम किसान की तरह उनकर मन में भी ई नई तकनीक क लेके कई शंका रही। उनका लागत रहा कि पाइप से बूंद-बूंद पानी गिरै से भला खेत कैसे सींचा जाई। लेकिन विभागीय अधिकारी लोग उनकर शंका क पूरी संवेदनशीलता के साथ दूर कीहिन अउर ड्रिप सिंचाई क वैज्ञानिक पहलू समझाईन। उनका बतावा गा कि कैसे ई तकनीक खाली पौधा की जड़ क नमी देत है, फालतू घास-फूस क जमै से रोकत है अउर सबसे बड़ी बात, ई पूरी प्रणाली क उनकर खेत में लगावे खातिर सरकार 90 प्रतिशत क अनुदान देई। सरकारी सहायता के भरोसा विजय प्रकाश जी की सारी झिझक खत्म कर दिहस। तकनीक अउर सरकारी प्रोत्साहन पाके श्री शुक्ला अपने 0.80 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले खेत में एक बड़ा जोखिम उठैत पारंपरिक फसल की जगह शिमला मिर्च की खेती करे क साहसी फैसला लेहिन। उनकर खेत में जब ड्रिप सिंचाई प्रणाली लाग गई, तो बदलाव क बीज उहई दिन बोवा गा। 90 प्रतिशत की भारी सब्सिडी मिलै के कारण ई आधुनिक मशीन क आर्थिक बोझ उनकर कंधन पर बिल्कुल नाहीं पड़ा।

ड्रिप प्रणाली चालू होत ही उ महसूस कीहिन कि उनकर खेत में पानी क खपत में 40 प्रतिशत तक की भारी कमी आ गई है। जहाँ पहले सिंचाई करे में कई दिन अउर रात ट्यूबवेल के पानी क क्यारी में मोड़ै में गुजर जात रही, उहई अब वाल्व खोलत ही पूरा खेत के हर एक पौधा क बराबर पानी मिलै लाग। फर्टीगेशन के जरिया खाद सीधा जड़ तक पहुँचै लाग, जेसे मेहनत की भारी बचत भई अउर फसल एकदम निरोगी अउर पुष्ट होके बढ़ै लाग। ई आधुनिक प्रयोग ने श्री शुक्ला की आर्थिक हालत क एकदम बदल के रख दिहस। पारंपरिक खेती में जहाँ प्रति एकड़ लागत करीब 30,000 रुपया तक पहुँच जात रही अउर मुनाफा पक्का नाहीं रहत रहा, उहई ड्रिप सिंचाई ने लागत क काफी कम कर दिहस। शिमला मिर्च की फसल जब तैयार भई, तो पैदावार अउर गुणवत्ता देखके हर कोई दंग रह गा। पैदावार में सीधे तौर पर 20 से 25 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कीन गई। उ अपने एही छोट से खेत से करीब 32 कुंतल उच्च गुणवत्ता वाली शिमला मिर्च पैदा कीहिन। बाजार में ई शानदार फसल क खूब मांग रही अउर उनका 35 से 40 रुपया प्रति किलो क बेहतरीन दाम मिला।

फसल क चक्कर आगे भी फायदा देत रहा अउर बाद में भी उ करीब 10 कुंतल शिमला मिर्च 20 रुपया प्रति किलो की दर से बेचिन। ई पूरी प्रक्रिया में उनका प्रति एकड़ करीब 60,000 रुपया तक की शुद्ध कमाई भई। ई कमाई उनकर परिवार क एक नया आर्थिक सहारा दिहस, पुरानी देनदारी से मुक्त कीहस अउर उनकर जीवन स्तर क एकदम ऊँचा उठा दिहस। आज विजय प्रकाश शुक्ला क खेत आसपास के दर्जनों गांव के किसानन खातिर एक ‘ओपन एयर लेबोरेटरी’ (खुली प्रयोगशाला) बन गया है। जवन किसान कल तक खेती क घाटे क सौदा मानके पलायन करै क सोचत रहे, उ आज श्री शुक्ला के लहलहाते खेत अउर उनकर आर्थिक तरक्की क देखके प्रेरित हो रहे हैं। श्री शुक्ला भी अपने अनुभव सीमित नाहीं राखत, बल्कि उद्यान विभाग के एक अनौपचारिक ब्रांड एंबेसडर की तरह हर किसान क ड्रिप सिंचाई अउर सरकारी योजनान क फायदा उठै के रास्ता दिखावत हैं।

उद्यान विभाग के लगातार मार्गदर्शन अउर तकनीकी मदद उनकर ई भरोसा पक्का कर दिहस कि यदि सरकार अउर किसान कदम से कदम मिलाके चलें, तो माटी से सोना उगावा जा सकत है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अउर ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ क विजन खेतन की प्यास बुझावै के साथ-साथ किसान समाज की आर्थिक समृद्धि क एक बहुत सफल अउर दूर तक देखै वाला मॉडल बन चुका है। बूंद-बूंद पानी के सही इस्तेमाल से लिखाई जात ई विकास गाथा भारतीय कृषि व्यवस्था के उ सुखद भविष्य क दस्तावेज है, जहाँ किसान अभाव में नाहीं जीयत, बल्कि अपनी मेहनत, सरकारी योजनान के साथ अउर आधुनिक तकनीक के दम पर विकास की नई ऊँचाई तय करत है। खेत की माटी में नवाचार (नयापन) क जवन बीज आज बोवा जात हैं, उ ग्रामीण अर्थव्यवस्था क एक मजबूत, स्वावलंबी अउर उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जावे क सबसे पक्का रास्ता बनावत हैं।

जनपद बस्ती

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