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पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 (राज्यपाल सूचना परिसर)

राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का अवलोकन किया

मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 में ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा की

परिणाम लाने के लिए परिश्रम आवश्यक होता है, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान पात्रों ने काफी परिश्रम किया। ऐसी फिल्में आगे भी बननी चाहिए, जो हमारी संस्कृति एवं परम्पराओं को प्रदर्शित करती हैं : राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल

‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ भारत के इतिहास, परम्परा और संस्कृति से जुड़ी फिल्म है। यह भारतीय इतिहास की उन घटनाओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है, जो आज से 5,000 वर्ष पहले इस धरा धाम पर घटित हुई थीं

आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन अपनी परम्परा को विस्मृत करके नहीं। अपनी परम्परा को साथ लेकर ही हमें आगे बढ़ना होगा

कला ईश्वरीय प्रेरणा है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण हैं। हमें कला को सम्मान देना चाहिए

सूचना विभाग हर जनपद में ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था करे, जिससे बच्चे अपनी परम्परा और सनातन संस्कृति के बारे में जान सकें : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ : 11 मई, 2026
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिनांक 10 मई 2026 को लोक भवन के सभागार में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य माहात्म्य पर आधारित फिल्म ‘कृष्णावतारम् (भाग-1, हृदयम)’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का अवलोकन किया।
फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और व्यक्तित्व को संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में द्वापर युग की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय सभ्यता तथा सनातन परम्पराओं के विविध पक्षों को अत्यंत भव्य और प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न संबंधों एवं भावनात्मक पक्षों को आकर्षक शैली में चित्रित किया गया है। फिल्म में श्री राधा, श्री रुक्मिणी एवं श्री सत्यभामा के साथ उनके संबंधों और प्रेम के विभिन्न स्वरूपों को भी प्रभावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक भावनाओं से जोड़ने का कार्य करता है।
राज्यपाल जी ने इस अवसर पर सभी को अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बेटियाँ हैं, तो घर में खुशहाली है। मुख्यमंत्री जी कृष्ण भक्ति एवं राम भक्ति से जुड़े हैं। उन्हें पूरा भरोसा था कि आज यह फिल्म टैक्स फ्री हो जाएगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यगण तथा बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों ने फिल्म का अवलोकन किया।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ से जुड़े कलाकारों एवं तकनीकी दल को सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों के अभिनय, परिश्रम एवं भारतीय संस्कृति के प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री किए जाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारत की समृद्ध पौराणिक परम्परा एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। कलाकारों ने अत्यंत मेहनत और समर्पण के साथ अपने पात्रों का निर्वहन किया है तथा ऐसी प्रेरणादायी फिल्मों का निर्माण होना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परम्पराओं से परिचित हो सके।
राज्यपाल जी ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, महापुरुषों तथा पौराणिक चरित्रों के बारे में जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालयों के पाठ्यक्रम में भारतीय पौराणिक संस्कृति और महान व्यक्तित्वों का समुचित उल्लेख होना चाहिए, जिससे बच्चों में संस्कार और  नैतिकता  की भावना विकसित हो सके।
उन्होंने फिल्म में आधुनिक तकनीक के उत्कृष्ट प्रयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र के विभिन्न आयामों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करेगा। उन्होंने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों एवं तकनीकी दल को बधाई देते हुए उनके कार्य की प्रशंसा की।
राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है। यहाँ अनेक विविधताएँ पायी जाती हैं। यहाँ के जल संसाधनों का समुचित उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किए गए छह नए मंत्रियों को भी शुभकामनाएँ दीं तथा उन्हें प्रदेशहित में पूर्ण समर्पण और ऊर्जा के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी संपूर्ण क्षमता प्रदेश के विकास और जनकल्याण के कार्यों में लगानी चाहिए।
अपने उद्बोधन में राज्यपाल जी ने श्रीमती अनारबेन पटेल के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हस्तशिल्प एवं क्राफ्ट के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं तथा बड़ी संख्या में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगदान दे रही हैं। राज्यपाल जी ने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे वे सम्मान और आत्मविश्वास के साथ समाज एवं राष्ट्र के विकास में सहभागिता कर सकें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ भारत के इतिहास, परम्परा और संस्कृति से जुड़ी फिल्म है। इस फिल्म ने भारतीय संस्कृति व सनातन परम्परा के गूढ़ रहस्यों को अपने बेहतरीन संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म के सभी कलाकारों तथा पूरी टीम का अभिनन्दन करते हुए मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े हर प्रसंग के बारे में सभी लोग जानते हैं। बरसाना-वृन्दावन में हम ‘राधे-राधे’ का सम्बोधन सुनते हैं। श्रीकृष्ण के जीवन की एक प्रमुख पात्र सत्यभामा थीं। ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म भारतीय इतिहास की उन घटनाओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है, जो आज से 5,000 वर्ष पहले इस धरा धाम पर घटित हुई थीं। इसने पूरे समाज को एक नई दिशा दी थी। श्रीकृष्ण साक्षात अवतार हैं। श्रीकृष्ण की पूरी कथा को जिस रूप में फिल्म में प्रस्तुत किया गया है, यह अत्यंत अभिनन्दनीय तथा सराहनीय है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर व्यक्ति के लिए भारत की शाश्वत परम्परा के बारे में जानने, सीखने तथा इससे प्रेरणा प्राप्त करने का एक अद्भुत अवसर इस ढाई घंटे की फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। सूचना विभाग हर जनपद में इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था करे, जिससे सभी बच्चे अपनी परम्परा और सनातन संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन अपनी परम्परा को विस्मृत करके नहीं। अपनी परम्परा को साथ लेकर ही हमें आगे बढ़ना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह फिल्म बहुत अच्छी है। इसमें कलाकारों का अभिनय अत्यंत सराहनीय है। आज के समय में जब लोग पाश्चात्य संस्कृति की ओर उन्मुख होते दिखाई देते हैं, तब अपनी पुरातन परम्परा को आज की पीढ़ी की मांग के अनुरूप आधुनिक डिजिटल स्वरूप तथा आधुनिक परिवेश में प्रस्तुत करना एक अभिनन्दनीय कार्य है। इसके लिए फिल्म के सभी कलाकार तथा पूरी टीम बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री जी ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए अपना बहुमूल्य समय देने हेतु राज्यपाल जी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्यपाल जी के पास शिक्षक, प्रधानाचार्य, मंत्री, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के रूप में सार्वजनिक जीवन का लंबा अनुभव है। यह एक सुखद संयोग है कि इस फिल्म में सत्यभामा का मुख्य किरदार निभाने वाली अभिनेत्री संस्कृति जयना हैं। संस्कृति जयना राज्यपाल जी की नातिन भी हैं। यह राज्यपाल जी के लिए भी एक अद्भुत क्षण है कि जिस बच्ची का उन्होंने पालन-पोषण कर उसे आगे बढ़ाया, उसने अपने अभिनय के माध्यम से प्रभावशाली प्रस्तुति दी है। कला ईश्वरीय प्रेरणा है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण हैं। हमें कला को सम्मान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आज हमने अपनी सरकार के द्वितीय कार्यकाल के मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम को सम्पन्न किया है। आज प्रदेश सरकार में आठ नए मंत्री श्री भूपेन्द्र चौधरी, श्री मनोज पाण्डेय, श्री सोमेन्द्र तोमर, श्री अजीत सिंह पाल, श्रीमती कृष्णा पासवान, श्री कैलाश सिंह राजपूत, श्री सुरेन्द्र दिलेर एवं श्री हंस राज विश्वकर्मा शामिल हुए हैं। श्री सोमेन्द्र तोमर और श्री अजीत सिंह पाल पहले राज्य मंत्री थे, आज उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। इन मंत्रिगण ने आज जन भवन में शपथ ली है। इस अवसर पर फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग भी एक अद्भुत क्षण है।
फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ की मुख्य पात्र संस्कृति जयना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इतने बड़े प्रदेश की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद उन्होंने कलाकारों और इस फिल्म के लिए अपना बहुमूल्य समय दिया, जिसके लिए वह हृदय से आभारी हैं। उन्होंने फिल्म को मिले समर्थन एवं प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति मिलती रही है। उन्होंने कहा कि परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के संस्कारों ने उनके अभिनय जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पत्र सूचना शाखा

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0

(राज्यपाल सूचना परिसर)

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राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अन्तर्गत ज्योतिर्लिंग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में सम्मिलत हुए

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राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मन्दिर, गुजरात में आयोजित सोमनाथ

अमृत महोत्सव के अन्तर्गत प्रधानमंत्री द्वारा किये गये दर्शन-पूजन, कुम्भाभिषेक, ध्वजारोहण तथा सम्बोधन के सजीव प्रसारण का अवलोकन किया

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वर्तमान युवा पीढ़ी को देश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक इतिहास की जानकारी होना आवश्यक

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सोमनाथ भारत की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का अमर प्रतीक

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“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का महायज्ञ

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सोमनाथ से काशी तक भारत की आध्यात्मिक एकात्मता का आलोक प्रसारित हो रहा है —–

भारत की संस्कृति को कोई शक्ति समाप्त नहीं कर सकती

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आस्था, विरासत और सांस्कृतिक चेतना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति

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-राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल

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जिस राष्ट्र की जड़ें अपनी संस्कृति में गहरी होती, उसकी उड़ान भी

उतनी ही ऊँची होती, आज भारत उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा

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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन हमंे भारत की जड़ों से जोड़ने का

अभिनव प्रयास, आज का यह कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक

परम्परा तथा राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनर्जागरण का शंखनाद

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भारत के देव स्थल, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक

केन्द्र भारत की अजर, अमर और शाश्वत आत्मा के प्रतीक

-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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लखनऊ: 11 मई, 2026
उत्तर प्रदेश की मा0 राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी तथा मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अन्तर्गत ज्योतिर्लिंग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में सम्मिलत हुए। आयोजन में विभिन्न कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई। इसके पूर्व, राज्यपाल जी एवं मुख्यमंत्री जी ने श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर में दर्शन-पूजन तथा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
    राज्यपाल जी एवं मुख्यमंत्री जी ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मन्दिर के 75 वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ मन्दिर, गुजरात में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के अन्तर्गत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किये गये दर्शन-पूजन, कुम्भाभिषेक, ध्वजारोहण तथा सम्बोधन के सजीव प्रसारण का अवलोकन किया।
राज्यपाल जी ने आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपने जीवनकाल में उन्होंने इस प्रकार का कार्यक्रम बहुत कम देखा है। उन्होंने कहा कि आज सोमनाथ में व्यापक विकास कार्य हुए हैं। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में विकास के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। वहां विद्यालयों की स्थापना हुई है तथा संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। आज विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं परंपरा का अध्ययन करने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि जब देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने भगवान श्री सोमनाथ मंदिर के समग्र विकास की कल्पना की थी। उसी संकल्प के अनुरूप धीरे-धीरे कार्य प्रारंभ हुआ और निरंतर वर्षों तक विकास कार्य चलता रहा। उन्होंने कहा कि विकास का यह क्रम आज भी जारी है और यह समाज की आस्था एवं जनसहयोग का परिणाम है।
राज्यपाल जी ने कहा कि सोमनाथ क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने सदैव मंदिर की रक्षा एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विकास कार्यों में भी जनता ने सहयोग और त्याग की भावना का परिचय दिया है।  उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी को देश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक इतिहास की जानकारी होना आवश्यक है। इसी क्रम में काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलकर काशी धाम के पुनरुद्धार एवं उसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। राज्यपाल जी ने कहा कि हम सभी को इन कार्यों से प्रेरणा लेते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन समर्पण, दूरदृष्टि एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की भावना के साथ करना चाहिए
राज्यपाल जी ने कहा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” हमें उस दिव्य सोमनाथ मंदिर की हजार वर्षों की अविचलित यात्रा का स्मरण कराता है, जिसने अनेक आक्रमणों, संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी आस्था, ऊर्जा और अस्तित्व को अक्षुण्ण बनाए रखा।
राज्यपाल जी ने कहा कि सोमनाथ राष्ट्र के स्वाभिमान का ज्योति-स्तंभ है तथा बाबा काशी विश्वनाथ धाम की पावन भूमि पर आयोजित यह कार्यक्रम सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक एकात्मता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पश्चिम के सागर तट पर स्थित सोमनाथ और पूर्व की आध्यात्मिक राजधानी काशी, दोनों मिलकर भारत की अनंत सांस्कृतिक चेतना का आलोक प्रसारित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि काशी और सोमनाथ भारतीय सभ्यता के दो अमर स्वर हैं। एक ने समुद्र की लहरों के मध्य आस्था का दीप जलाए रखा, जबकि दूसरे ने गंगा की अविरल धारा के साथ ज्ञान, मोक्ष और अध्यात्म का संदेश सम्पूर्ण विश्व को प्रदान किया। जब सोमनाथ की घंटियाँ और काशी की आरती एक साथ गूंजती हैं, तब सम्पूर्ण भारत अपनी सनातन आत्मा का उद्घोष करता हुआ प्रतीत होता है।
राज्यपाल जी ने कहा कि गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत की आत्मा का अमर स्वर है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रतिष्ठित यह पावन धाम युगों से भारतीय आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान का दिव्य प्रतीक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक बार इस मंदिर को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया, किंतु प्रत्येक बार सोमनाथ उसी तेज, दिव्यता और अदम्य आत्मविश्वास के साथ पुनः स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमें यह संदेश देता है कि विनाश क्षणभंगुर होता है, जबकि सृजन सनातन है। आक्रमणकारी समय के साथ विलीन हो जाते हैं, किंतु संस्कृति की चेतना शाश्वत बनी रहती है।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व-अटूट आस्था के हजार वर्ष” के अंतर्गत 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक वर्षभर देशभर में विविध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का महायज्ञ है।
उन्होंने कहा कि लगभग एक हजार वर्ष पूर्व सन 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया गया, किंतु वह करोड़ों भारतीयों की आस्था को पराजित नहीं कर सका। इसके पश्चात विभिन्न कालखंडों में राजा कुमारपाल, जूनागढ़ के राजाओं तथा महारानी अहिल्याबाई होल्कर सहित अनेक महान विभूतियों ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण एवं पुनर्स्थापना का कार्य किया।
राज्यपाल जी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि पुनर्जन्म, पुनर्निर्माण और अदम्य संकल्प का इतिहास है। यह भारत की उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, जिसे किसी भी परिस्थिति में समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक स्मृति और आत्मिक आधार में निहित होती है। जब समाज अपनी आस्था, परंपराओं और विरासत से जुड़ा रहता है, तभी उसकी सभ्यता दीर्घकाल तक जीवंत एवं सशक्त बनी रहती है।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत की सभ्यता इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। हजारों वर्षों के इतिहास में अनेक चुनौतियों और आक्रमणों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक धारा कभी अवरुद्ध नहीं हुई। हमारे मंदिर, पर्व, साहित्य, आश्रम और आध्यात्मिक परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली जीवंत शक्तियाँ हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। जो समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहता है, वही स्थायी विकास और नैतिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज भारत आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ से लेकर काशी, केदारनाथ से लेकर महाकाल तक देश अपनी आध्यात्मिक धरोहरों को आधुनिक विकास से जोड़ते हुए विश्व के समक्ष नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने शक्ति को कभी अहंकार का माध्यम नहीं बनाया। भारत ने सदैव करुणा, सह-अस्तित्व, संवाद और “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को अपनाया है। भारत ने विश्व को यह संदेश दिया है कि विजय का अर्थ विनाश नहीं, बल्कि विश्वास और मानवता का संवर्धन है।
राज्यपाल जी ने उपस्थित जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि इस पर्व से प्रेरणा लेकर सभी नागरिक एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जो विकास के साथ-साथ संवेदना, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों से भी समृद्ध हो। उन्होंने संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश, सभी आयोजकों, कलाकारों एवं सहयोगियों को इस भव्य एवं दिव्य आयोजन के सफल आयोजन हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव मन्दिर की पुनस्र्थापना के अमृत पर्व तथा स्वाभिमान पर्व पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन सम्पूर्ण देश को प्राप्त हो रहा है। हम सभी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार होते हुए देख रहे हैं। सौराष्ट्र में श्री सोमनाथ महादेव मन्दिर की पुनप्र्रतिष्ठा व सुन्दरीकरण के कार्यक्रम के साथ ही काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल में महालोक की स्थापना का कार्यक्रम, अयोध्याधाम में भगवान श्रीराम जन्मभूमि में राम मन्दिर निर्माण का कार्यक्रम सहित सनातन परम्परा से जुड़े हुए अनेक तीर्थस्थल अपने वैभव के साथ विकास की नई यात्रा के मार्ग पर बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ और श्री सोमनाथ भारत की सभ्यतागत चेतना के दो ज्योति स्तम्भ हैं। एक उत्तर में पवित्र माँ गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ धाम और दूसरा पश्चिमी भारत में सागर के तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव हैं। एक ओर गंगा तट पर स्थित काशी ने भारत की सनातन धारा को अक्षुण्ण रखा है, वहीं दूसरी सोमनाथ ने समुद्र तट पर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण की लौ को हजारों वर्षाें तक प्रज्ज्वलित रखा है। सोमनाथ मन्दिर भारत की सभ्यता के उस अमर आदर्श का प्रतीक है, जहां धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय अस्मिता एकात्म भाव से अभिव्यक्त होते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी के यशस्वी मार्गदर्शन व नेतृत्व के परिणामस्वरूप सोमनाथ महादेव के स्वाभिमान पर्व के साथ ही मन्दिर की पुनप्र्रतिष्ठा के अमृत पर्व के साथ जुड़े हैं। श्री काशी विश्वनाथ धाम में हम सब इस कार्यक्रम के साक्षात दर्शन कर रहे हैं।
इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री अनिल राजभर, आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, नवनियुक्त राज्यमंत्री श्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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सम्पर्क सूत्र
दिलशाद अहमद-सूचना अधिकारी/राजभवन
9696795957

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