
बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने पन्हाला मा मौजूद 15वीं सदी के दुई मुस्लिम दरगाहन के तोरे के आदेश प रोक लगाय दीन्ह है। कोर्ट अंतरिम रोक लगावत पन्हाला गिरिस्तान नगर परिषद का ई आदेश दीन्ह है। इन दुई दरगाहन में एक हजरत पीर शाहबुद्दीन खटावली दरगाह है अउर दूसर हजरत पीर साधु खटल दरगाह है।
जस्टिस माधव जमदार अउर जस्टिस प्रवीण एस पाटिल के बेंच मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई का तय करत भये कहे कि, तथ्य अउर परिस्थिति का देखत, ई जरूरी है कि सब प्रतिवादी जवाब में हलफनामा दाखिल करें। ओहिने, याचिकाकर्ता के वकील (युवराज) नरवणकर कोर्ट में तर्क दिहिन कि ई दुनौ दरगाह लगभग 15वीं सदी से मौजूद हैं अउर बॉम्बे गजट में भी दर्ज हैं।
15 जून तक दाखिल करें हलफनामा: हाई कोर्ट
कोर्ट आगे कहे कि जवाबी हलफनामा 15 जून 2026 का या ओकरे पहिले दाखिल कीन जाई। मालूम होय कि, पन्हाला हिल स्टेशन के नगर निकाय संस्था महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन (MRTP) अधिनियम की धारा 52 अउर 53 (जौन अनाधिकृत निर्माण अउर ओका गिरावे की शक्ति से संबंधित है) के तहत, इन दरगाहन के प्रबंधन करय वाले ट्रस्ट का एक नोटिस जारी कीन रहे। ई नोटिस 1 जुलाई 2024 का एक स्थानीय निवासी द्वारा तहसीलदार के समने की गई शिकायत के आधार प जारी कीन गई रही।
इ साल के शुरुआत में, दरगाह ट्रस्ट संपत्ति प अपने कब्जा अउर अधिकार की वैधता साबित करय खातिर भूमि अभिलेख अधीक्षक (SLR) के समने कार्यवाही शुरू कीन रहे। ट्रस्ट हाई कोर्ट में अपनी याचिका में तर्क दिहिस कि नगर परिषद नोटिस तब जारी कीन, जब SLR के समने ओकर याचिका निरीक्षण के प्रोसेस में रही।
बता दें कि, याचिकाकर्ता अउर ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अब्दुलसत्तार मुजावर 7 मई के नोटिस प रोक लगावे की मांग कीन रहे। ओकरे साथ ही ई निर्देश देवे का आग्रह कीन रहे कि प्रतिवादियों, उनके अधिकारियों, एजेंटन, कर्मचारियन अउर उनकी ओर से काम करय वाले सब मनइयन का याचिका की सुनवाई अउर अंतिम निपटारा तक दरगाह के निर्माण, संरचना अउर धार्मिक वस्तुन का गिरावे, उनमें छेड़छाड़ करय, ओका हटावे या उनमें हस्तक्षेप करय से रोका जाय।




