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लेख पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश – बी0सी0 सखी कार्यक्रम और आजमगढ़ का पर्यटन विकास

पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश।

लेख: ग्राम्य विकास, बी0सी0 सखी कार्यक्रम से बदलत उत्तर प्रदेश क सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य।

दिनांक 11 मई, 2026

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास अउर मेहरारू लोगन क सशक्तिकरण क दिशा में ढेर नवाचार होइ रहें हैं, जवने में “बी0सी0 सखी कार्यक्रम” एक बहुत प्रभावशाली अउर दूरगामी पहल बनके निकरा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा चलावा जाइ वाला यह कार्यक्रम न सिर्फ मेहरारू लोगन क आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनावत है, बल्कि ग्रामीण इलाकन में बैंकिंग सेवा क पहुँच क भी बहुत मजबूती देत है। “एक ग्राम पंचायत-एक बी0सी0 सखी” क सिद्धांत पर आधारित यह योजना आज लाखन ग्रामीण परिवारन क जिन्दगी में बदलाव लावत है।

बी0सी0 सखी कार्यक्रम: अवधारणा अउर उद्देश्य:

बी0सी0 सखी (बैंकिंग करस्पोंडेंट सखी) कार्यक्रम क मूल उद्देश्य ग्रामीण मेहरारू लोगन क वित्तीय सेवा से जोड़ के उनका आत्मनिर्भर बनावे क है। एकरे तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ल मेहरारू लोगन क ट्रेनिंग दे के उनके गाँव में ही बैंकिंग प्रतिनिधि क तौर पर नियुक्त कीन जात है। ये सखिया ग्रामीण समुदाय क उनके घर क लगे ही बैंकिंग सेवा उपलब्ध करावती हैं, जवने से लोगन क बैंक शाखा तक जाए क जरूरत बहुत कम होइ जात है। इस योजना क सबसे खास बात ई है कि ई मेहरारू लोगन क सिर्फ रोजगार ही नइखे देत, बल्कि डिजिटल अउर वित्तीय साक्षरता से भी मजबूत करत है। एकरे से मेहरारू न सिर्फ अपने परिवार क आर्थिक स्थिति मजबूत करत हैं, बल्कि समाज में अपनी एक अलग पहचान भी बनावत हैं।

वित्तीय समावेशन क दिशा में क्रांतिकारी कदम:

बी0सी0 सखी कार्यक्रम उत्तर प्रदेश क ग्रामीण इलाकन में वित्तीय समावेशन क नई रफ़्तार दियले है। आज प्रदेश में लगभग 40,000 बी0सी0 सखियाँ काम कर रही हैं, जउन गाँव-गाँव जाके बैंकिंग सेवा देत हैं। इनके जरिये अब तक 44,000 करोड़ रुपया से जादे क लेन-देन होइ चुका है, जउन इस योजना क सफलता क सबूत है। ये सखियाँ नकद जमा-निकासी, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS), बैलेंस जाँच, बीमा, पेंशन, अउर लोन चुकता करे जइसन सुविधा देत हैं। एकरे अलावा, वे सरकारी योजनान में नामांकन भी सुनिश्चित करत हैं, जवने से ग्रामीणन क सरकारी लाभ समय से मिल सके। इस पहल से खास तौर पर उन जगहन पर बड़ा बदलाव आवा है जहाँ बैंकिंग सुविधा बहुत कम रही। अब ग्रामीणन क छोट-छोट जरूरत खातिर लम्बी दूरी तय नइखे करे क पड़त, जवने से समय अउर पैसा दूनों बच रहा है।

मेहरारू सशक्तिकरण क मजबूत माध्यम:

बी0सी0 सखी कार्यक्रम ग्रामीण मेहरारू लोगन क जिन्दगी में एक नई ऊर्जा भर दिहे है। इस योजना के तहत काम करइ वाली मेहरारू न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि सामाजिक रूप से भी उनका सम्मान बढ़ा है। उदाहरण खातिर, सुल्तानपुर क प्रियंका मौर्य अउर लखनऊ क अनीता पाल जइसन बी0सी0 सखियाँ हर महिना औसतन 45,000 रुपया से जादे क कमीशन कमा रही हैं। ई कमाई उनके परिवार क जिन्दगी सुधारे में बहुत मदद करत है। साथ ही, ये मेहरारू अपने गाँव क दूसरी मेहरारू लोगन खातिर प्रेरणा भी बन रही हैं। इस कार्यक्रम से अब तक बी0सी0 सखियाँ 121 करोड़ रुपया से जादे क कमीशन कमाई हैं, जउन दिखावत है कि ई योजना मेहरारू लोगन खातिर एक टिकाऊ अउर सम्मानजनक आजीविका क जरिया बन गई है।

बैंकिंग सेवा क विस्तार अउर तकनीकी मजबूती:

बी0सी0 सखी कार्यक्रम के तहत कई सरकारी बैंक (PSU Banks) साझेदार क रूप में जुड़ल हैं। इन बैंकन क सहयोग से ग्रामीण इलाकन में बैंकिंग सेवा क दायरा लगातार बढ़ रहा है। भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा जइसन बैंक इस पहल में एक्टिव भूमिका निभा रहे हैं। एकरे साथ ही, बी0सी0 सखियन क डिजिटल टूल जइसे माइक्रो एटीएम, लैपटॉप अउर स्मार्टफोन से लैस करे पर भी विचार हो रहा है। बैंकन क सी.एस.आर. फंड से इन उपकरन क उपलब्धता सुनिश्चित करे क योजना है, ताकि वे अपना काम अउर कुशलता से कर सकें। डिजिटल माध्यमन क इस्तेमाल से न सिर्फ सेवा क रफ़्तार बढ़ी है, बल्कि पारदर्शिता भी आई है। एकरे से ग्रामीणन क बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा भी बढ़ल है।

सेवा क विस्तार अउर नई संभावना:

बी0सी0 सखी कार्यक्रम क अउर असरदार बनावे खातिर एकर दायरा बढ़ाया जा रहा है। अब बी0सी0 सखियन क जन सुविधा केंद्र चलावे, बीमा सेवा, आर.डी. खाता खुलवावे, लोन बांटे, लोन वसूली, अउर पोस्ट ऑफिस क योजनान से जोड़े जइसन कामन में लेवे क खाका तैयार हो रहा है। एकरे अलावा, भविष्य में बी0सी0 सखियन क आधार अपडेट जइसन जरूरी कामन में भी शामिल करे पर विभाग विचार करत है। एकरे से उनका रोल अउर बड़ा होइ अउर उनका अतिरिक्त कमाई क मौका मिली। बड़ी ग्राम पंचायतन में एक से जादे बी0सी0 सखियन क नियुक्ति पर भी सोचा जा रहा है, ताकि सेवा क क्वालिटी अउर पहुँच अउर बेहतर हो सके।

जनपद क उपलब्धि अउर प्रतिस्पर्धा:

बी0सी0 सखी कार्यक्रम क असरदार क्रियान्वयन में अलग-अलग जनपद के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी देखल जा सकत है। अभी प्रयागराज इस कार्यक्रम में पहिला स्थान पर है, जबकि बरेली अउर शाहजहांपुर दूसरे अउर तीसरे स्थान पर हैं। ई प्रतिस्पर्धा न सिर्फ बेहतर काम खातिर प्रेरित करत है, बल्कि दूसरे जनपदन क भी बढ़िया प्रदर्शन खातिर बढ़ावा देत है।

समावेशी विकास क दिशा में अहम पहल:

बी0सी0 सखी कार्यक्रम सिर्फ एक रोजगार योजना नइखे, बल्कि ई ग्रामीण भारत में समावेशी विकास क एक मजबूत जरिया बन चुका है। ई पहल मेहरारू लोगन क आर्थिक रूप से मजबूत बनावे क साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था क भी मजबूत करत है। इस कार्यक्रम के माध्यम से जहाँ एक ओर मेहरारू लोगन क सम्मानजनक आजीविका मिल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणन क उनके दरवाजा पर ही जरूरी बैंकिंग सुविधा मिल रही है। एकरे से सामाजिक अउर आर्थिक असमानता कम करे में भी मदद मिल रही है। उत्तर प्रदेश में बी0सी0 सखियाँ सही दिशा अउर बढ़िया रणनीति क साथ काम करत हुए ग्रामीण इलाकन में बड़ा बदलाव ला रही हैं। ई योजना मेहरारू लोगन क सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन अउर ग्रामीण विकास क एक बहुत बढ़िया उदाहरण है। उ0प्र0 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन क लक्ष्य है कि सब ग्राम पंचायतन में एक्टिव बी0सी0 सखी क नियुक्ति हो जाय, जवने से “आत्मनिर्भर ग्रामीण मेहरारू-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” क संकल्प पूरा हो सके।

– बी0एल0 यादव, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक, पत्र सूचना शाखा, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0

लेख: पर्यटन विभाग- आस्था, अध्यात्म अउर ईको टूरिज्म क साथ पर्यटन क नक्शा पर उभरत आजमगढ़।

दिनांक 11 मई, 2026

उत्तर प्रदेश क पूर्वांचल में स्थित आजमगढ़ जिला आज अपनी सांस्कृतिक अउर आध्यात्मिक धरोहरन क संरक्षण अउर आधुनिक पर्यटन विकास क दौर की ओर आगे बढ़त है। प्रदेश सरकार क दूरदर्शी नीति अउर जिला प्रशासन क बढ़िया मैनेजमेंट क फलस्वरुप, यह इलाका अब दुनिया क पर्यटन नक्शा पर अपनी खास पहचान बनावत है। प्रदेश सरकार जिला क पौराणिक, ऐतिहासिक अउर धार्मिक स्थल क फेर से जीवित करत है, साथ ही उनका आधुनिक सुविधा से लैस कर के एक व्यवस्थित पर्यटन सर्किट क रूप में विकसित करे क पक्का कोशिश भी शुरू हो चुकी है। यह पहल न सिर्फ प्रदेश क सांस्कृतिक विरासत क बचावे क एक जरिया है, बल्कि यह ग्रामीण अउर स्थानीय अर्थव्यवस्था क नई रफ़्तार देवे वाली एक अहम कड़ी भी साबित होइ।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत राज्य योजना के माध्यम से आजमगढ़ क पर्यटन ढांचा क मजबूत करे खातिर कुल 11 जरूरी परियोजना क मंजूरी दी गई है, जवने खातिर 13 करोड़ 19 लाख रुपया क भारी रकम दी गई है। एकरे में से लगभग 5 करोड़ 95 लाख रुपया क पहली किस्त जारी कर दी गई है, जवने से विकास कार्य जमीन पर रफ़्तार पकड़ लिहिन है। प्रदेश सरकार क मुख्य ध्यान इस बात पर है कि आस्था क केंद्रन क पर्यटन क आधुनिक मानक क हिसाब से ढालल जाय ताकि दूर-दराज से आवे वाले पर्यटक अउर श्रद्धालु लोगन क कउनो परेशानी न होय। एकरे तहत जिला क अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र में स्थित प्राचीन अउर पौराणिक स्थल क कायाकल्प कीन जा रहा है। सगड़ी क्षेत्र क साल्हेपुर स्थित कैवल्य धाम शिव मंदिर क विकास खातिर मंजूर रकम क एक बड़ा हिस्सा जारी हो चुका है, जवने से यहाँ आवे वाले भक्तन खातिर बुनियादी सुविधा बढ़ी। इसी तरह, मुबारकपुर क ग्राम सभा डिलिया में प्राचीन हनुमान मंदिर अउर लालगंज क ग्राम ढेकवा स्थित ब्रह्मबाबा स्थल क विकास कार्य जिला प्रशासन क देखरेख में प्राथमिकता क आधार पर चल रहा है। इन परियोजना क मकसद सिर्फ सौंदर्यीकरण तक ही नइखे, बल्कि इनके जरिये उस स्थानीय संस्कृति अउर लोक विश्वास क बचावे क है, जउन सदियन से इस माटी क पहचान रहा है। नगर पंचायत अजमतगढ़ क प्राचीन हनुमान मंदिर हो या फूलपुर-पवई क्षेत्र क पौराणिक दुर्वासा ऋषि आश्रम, हर स्थल खातिर योजना बनाके पैसा लगावा जा रहा है ताकि यहाँ क ऐतिहासिक महत्ता क दुनिया स्तर पर देखावा जा सके।

आजमगढ़ क इस समग्र विकास अभियान में ईको-टूरिज्म क एक नई अउर अभिनव दिशा दी गई है। सदर क्षेत्र के अंतर्गत सिलनी स्थित चन्द्रमा ऋषि आश्रम क समग्र विकास खातिर 5 करोड़ रुपया क विशेष वित्तीय अउर प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। ई परियोजना आजमगढ़ क एक शांत, प्राकृतिक अउर आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र क रूप में स्थापित करे क दिशा में एक मील क पत्थर साबित होई। ईको-टूरिज्म क इस मॉडल क माध्यम से पर्यावरण संरक्षण अउर आधुनिक पर्यटन के बीच एक अनूठा संतुलन बनावे क कोशिश कीन जा रहा है। जिला प्रशासन क मानना है कि प्रकृति क गोद में स्थित इन ऋषि आश्रम क विकास न सिर्फ धार्मिक पर्यटन क बढ़ावा देइ, बल्कि लोगन क पर्यावरण क प्रति जागरूक भी करी। इसी क्रम में सदर क्षेत्र क एकलव्य स्थल अउर भगवान शंकर जी क स्थान अउर निजामाबाद क प्रसिद्ध दत्तात्रेय आश्रम खातिर भी पैसा देके निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। इन स्थल क विकास से आजमगढ़ क ऐतिहासिक गौरव बढ़ी अउर ई प्रदेश क चुनिंदा पर्यटन स्थल क श्रेणी में खड़ा हो सकी।

जिला क फूलपुर-पवई क्षेत्र क गड़वा हनुमान मंदिर जइसन बड़ी परियोजना पर खास ध्यान दिया जा रहा है, जहाँ 135.63 लाख रुपया क लागत से बुनियादी ढांचा क सुधारा जा रहा है। एकरे साथ ही दीदारगंज क बंधवा महादेव पातालपुरी मंदिर अउर गोपालपुर क तेजबर बाबा मंदिर क विकास भी इसी विस्तृत कार्ययोजना क हिस्सा है। इन सब काम क जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम क सौंपी गई है, जवने से ई पक्का हो सके कि निर्माण कार्य में हाई क्वालिटी बनी रहे। जिला प्रशासन इन परियोजना क समय अउर क्वालिटी क लगातार समीक्षा करत है ताकि तय समय सीमा के भीतर इन स्थल क जनता क समर्पित कीन जा सके। सरकार क मानना है कि ‘आस्था क साथ विकास‘ क इस सोच से न सिर्फ सांस्कृतिक गौरव वापस अइब, बल्कि रोजगार क नया मौका भी पैदा होई। पर्यटन क इस विस्तार क सीधा अउर पॉजिटिव असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़े क पक्का है। जइसे-जइसे इन स्थल पर पर्यटक क संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे होटल, गाड़ी, हस्तशिल्प अउर स्थानीय व्यापार क बढ़ावा मिली। आजमगढ़ क पारंपरिक कला अउर यहाँ क स्थानीय उत्पाद क पर्यटन केंद्रन क माध्यम से एक बड़ा बाजार मिली, जवने से सीधा अउर इनडायरेक्ट रूप से हजारन लोगन क रोजगार मिली। प्रदेश सरकार क यह नीति पर्यटन क सिर्फ मनोरंजन क साधन न मान के उसे आर्थिक सशक्तिकरण क एक मजबूत जरिया बनावे क है। बुनियादी ढांचा जइसे सड़क, बत्ती अउर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार होवे से पर्यटकन क अपने प्रवास क दौरान सुविधा क अहसास होई। क्षेत्र में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट क संभावना भी बढ़ी। आजमगढ़ क यह बदलत रूप आने वाले समय में नया आकर्षण क साथ नया पर्यटन क्षेत्र क केंद्र बनी। धार्मिक अउर प्राकृतिक पर्यटन क यह ढांचा आजमगढ़ क अपनी नई पहचान देवे खातिर तैयार है। सरकार क योजना क बढ़िया क्रियान्वयन अउर जिला प्रशासन क सक्रियता उन प्राचीन धरोहरन क मुख्यधारा में ला खड़ा कीन है, जउन लम्बे समय से उपेक्षित रहीं। अब आजमगढ़ सिर्फ अपनी प्राचीन कहानी खातिर नइखे, बल्कि अपने आधुनिक पर्यटन, बुनियादी ढांचा अउर व्यवस्थित तीर्थ स्थल खातिर भी जानल जाई। आने वाले सालन में जब ये सब ग्यारह परियोजना अउर ईको-टूरिज्म क विशेष प्रोजेक्ट पूरा होई, तब आजमगढ़ क पर्यटन नक्शा पूरी तरह से बदल चुकल होई। आस्था, अध्यात्म अउर प्रकृति क अद्भुत संगम क रूप में यह जिला अब एक नया अउर समृद्ध भविष्य क ओर बढ़त है, जहाँ विकास क रोशनी प्राचीनतम मंदिर क दीवाल अउर आधुनिक पर्यटक सुविधा, दूनों पर बराबर चमक रही है। यह पूरी प्रक्रिया आजमगढ़ क उत्तर प्रदेश क प्रमुख पर्यटन केंद्र क रूप में स्थापित करे क संकल्प क सिद्धि है।

जनपद आजमगढ़

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