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PN 12-05-2026

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सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश

संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में 06 जनपदों में स्थित रामलीला मैदानों का विकास, विस्तार, सौन्दर्यीकरण तथा जीर्णोद्धार किया जायेगा-जयवीर सिंह

 लखनऊ: 12 मई, 2026

संस्कृति विभाग उ0प्र0 द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 06 जनपदों में वृहद परियोजनाएं प्रस्तावित की गयी है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक रामलीला मैदानों स्थलों का विकास और विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण कार्य आदि कराया जायेगा।
यह जानकारी आज यहां प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि जनपद शाहजहांपुर के अंतर्गत टाउन एरिया कोट में रामलीला मैदान का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण के कार्य कराये जायेगे। इसी प्रकार जनपद गोरखपुर के नगर क्षेत्र बड़हलगंज में रामलीला मैदान का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण आदि कार्य कराया जायेगा।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि जनपद फिरोजाबाद की विधानसभा जसराना के कस्बा खैरगढ़ स्थित रामलीला स्थल का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जायेगा। इसी प्रकार जनपद फर्रूखाबाद की नगर पंचायत कमालगंज में रामलीला मैदान का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण आदि कार्य कराये जायेगे। इसी तरह जनपद लखीमपुर खीरी में ग्राम कुकुरा विकास खण्ड बाकेगंज विधानसभा पलिया लखीमपुर खीरी के रामलीला मैदान की बाउण्ड्रीवाल एवं सुविधाओं का विकास किया जायेगा।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में रामलीला मैदान की स्थिति ठीक नहीं है। इसको दृष्टिगत रखते हुए इन्हें वित्तीय वर्ष 2026-27 में बड़ी परियोजनाओं में शामिल करके सुरक्षा, विकास आदि के कार्य कराये जायेगे। रामलीला मैदानों की दीवारों पर रामायण के प्रसंग से संबंधित चित्रलेखन आदि भी किया जायेगा। रामलीला का मंचन भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को रामलीला के माध्यम से देखते हैं। युवा पीढ़ी के लिए यह एक सांस्कृतिक चेतना है। इसी दृष्टिकोण से रामलीला मैदानों को संरक्षित एवं पुनरोद्धार का कार्य किया जायेगा।

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कृषि मंत्री ने रबी फसलों के खरीद केंद्रों की सुस्त कार्यप्रणाली पर जताई कड़ी नाराजगी

प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ बीज वितरण स्थिति की गहन समीक्षा की

पी.एम. कुसुम और खेत तालाब योजना के माध्यम से सिंचाई क्षमता बढ़ाने के निर्देश

 लखनऊ: 12 मई, 2026

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने आज कृषि भवन के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत रबी फसलों की खरीद, उर्वरक उपलब्धता, खरीफ बीज वितरण और सिंचाई योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मंत्री जी ने रबी सीजन में क्रय एजेंसियों द्वारा खरीद की धीमी और लचर प्रगति पर खरीद एजेंसियो को कड़ी फटकार लगाई और खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मूल्य समर्थन योजना (2026-27) की समीक्षा करते हुए कृषि मंत्री जी ने बताया कि वर्तमान में 280 क्रय केंद्र संचालित हैं, जिनसे अब तक 2,759 किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने नैफेड, एनसीसीएफ सहित राज्य की खरीद एजेंसियों (यूपीपीसीएफ, यूपीपीसीयू आदि) को निर्देशित किया कि वे निर्धारित लक्ष्यों (मसूर 6.77 लाख मी.टन, सरसों 5.30 लाख मी.टन, चना 2.24 लाख मी.टन और अरहर 1.13 लाख मी.टन) की प्राप्ति के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करें।
सिंचाई योजनाओं की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सोलर पम्प योजना (पीएम कुसुम) के तहत वर्ष 2013 से 2026 तक कुल 1,01,255 सोलर पम्पों की स्थापना की गई है, जिसमें से रिकॉर्ड 91,104 पम्पों की स्थापना वर्तमान सरकार (2017-2026) के कार्यकाल में हुई है। वर्ष 2024-25 में सर्वाधिक 28,804 पम्पों का लक्ष्य पूर्ण किया गया। किसानों को 2 एचपी से 10 एचपी तक के पम्पों पर 60 प्रतिशत अनुदान (30 प्रतिशत केंद्र तथा 30 प्रतिशत राज्य) प्रदान किया जा रहा है, जिससे कृषि लागत में कमी आ रही है।
इसके अतिरिक्त, वर्षा जल संचयन हेतु खेत तालाब योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए 2,905 तालाबों और 270 पम्पसेटों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण पर रू0 52,500 का अनुदान डी.बी.टी. के माध्यम से दो किस्तों में दिया जा रहा है। इसके साथ ही पम्पसेट पर 50 प्रतिशत या अधिकतम रू0 15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने हेतु निगरानी बढ़ाने और खरीफ सीजन के लिए उन्नत बीजों का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे खरीद सीजन के लिए बीजों की मांग का आवेदन ंहतपबनसजनतमण्नचण्हवअण्पद पोर्टल पर करें। इसके लिए वे अपने मोबाइल से, नजदीकी जनसेवा केन्द्र (सीएससी) अथवा कृषि विभाग के नजदीकी कार्यालय से आवेदन कर सकते हैं।
समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख सचिव कृषि श्री रवीन्द्र, सचिव कृषि श्री इन्द्र विक्रम सिंह, सचिव नेडा श्री पंकज सिंह, निदेशक कृषि श्री पंकज त्रिपाठी, निदेशक कृषि सांख्यिकी श्रीमती सुमिता सिंह तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सम्पर्क सूत्र- डा0 मनोज चन्द्रा

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ओडीओपी सीएफसी को जनभागीदारी से जोड़ने पर योगी सरकार का जोर

90 प्रतिशत सरकारी सहायता से संचालित परियोजनाओं को
अधिक प्रभावी बनाने पर जोर

प्रदेश में संचालित 16 सीएफसी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा में व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश

सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और
10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान

छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं सुलभ कराना उद्देश्य

सभी सीएफसी में “सिटीजन चार्टर” प्रदर्शित करने के निर्देश, लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी मिलना होगा आसान

 लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, बुनकरी और सूक्ष्म उद्यमों को नई मजबूती देने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। सरकार की मंशा है कि ओडीओपी योजना के तहत स्थापित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) केवल सीमित लोगों तक न रहकर अधिक से अधिक कारीगरों, बुनकरों और सूक्ष्म उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाओं से जोड़ें। इसी उद्देश्य से मंगलवार को प्रदेश में संचालित 16 सीएफसी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई सीएफसी में सीमित लाभार्थियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि योजनाओं का लाभ केवल कुछ सदस्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और 10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान रखा गया है, ताकि छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं सुलभ हो सकें।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएफसी को जनहित से जोड़ते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इसके लिए मोबाइल संदेश, पम्पलेट, उद्योग बंधु बैठकों और मीडिया माध्यमों का उपयोग करने को कहा गया। साथ ही सभी सीएफसी में “सिटीजन चार्टर” प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, जिससे लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
बैठक में अंबेडकर नगर, मुरादाबाद, संभल, वाराणसी, खुर्जा, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या और गाजियाबाद सहित विभिन्न जिलों की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अंबेडकर नगर बुनकर सीएफसी में लगभग 4 करोड़ रुपये की सहायता से स्थापित परियोजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि अधिक बुनकर आधुनिक सुविधाओं से जुड़ सकें। वहीं बनारस के सिल्क उत्पाद सीएफसी में लगभग 9 करोड़ रुपये की सहायता से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को व्यापक स्तर पर कारीगरों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
बैठक में बुनकरों और कारीगरों ने बिजली, धागे की लागत, बाजार प्रतिस्पर्धा और तकनीकी उन्नयन से जुड़े मुद्दे भी रखे। समीक्षा के दौरान बताया गया कि योगी सरकार ने बुनकरों को राहत देने के लिए वर्षों तक फ्लैट रेट विद्युत योजना लागू रखी, जिसके तहत 2006 से 31 मार्च 2023 तक लगभग 44 करोड़ रुपये का विद्युत व्यय सरकार द्वारा वहन किया गया। सरकार की प्राथमिकता है कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोग आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें।
गाजियाबाद के इंजीनियरिंग एवं टूल रूम आधारित सीएफसी की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वहां सीएनसी मशीन, 3डी प्रिंटिंग, मटेरियल टेस्टिंग और स्किल ट्रेनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और रक्षा क्षेत्र के लिए कंपोनेंट निर्माण की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुरादाबाद के फिजिकल वेपर डिपोजिशन (पीवीडी) प्लांट को पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उदाहरण बताते हुए उसकी कार्यक्षमता को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। वहीं संभल के बटन उद्योग सीएफसी में 70 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग को सकारात्मक संकेत बताते हुए कच्चे माल और बिजली उपलब्धता को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
खुर्जा ब्लैक पॉटरी सीएफसी को बैठक में सफलता की मिसाल बताया गया। इस परियोजना से 1253 से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं और कारोबार 15-20 लाख रुपये से बढ़कर 90-95 लाख रुपये तक पहुंचा है। इसे पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। कारीगरों द्वारा मिट्टी भंडारण के लिए अतिरिक्त भूमि की मांग भी बैठक में रखी गई।
सहारनपुर वुड क्राफ्ट, आगरा लेदर क्लस्टर, बरेली और मेरठ के गुड़ प्रसंस्करण सीएफसी की भी समीक्षा की गई। मेरठ परियोजना में 1800 किसानों को जोड़कर मूल्य संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उद्योग बंधु बैठकों का आयोजन सीएफसी परिसरों में किया जाए और बड़ी उद्योग इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर छोटे उद्यमों को बड़े बाजार और सप्लाई चेन से जोड़ा जाए।
सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार
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स्किलिंग से रोजगार तक, आधुनिक तकनीकों के सहारे यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा स्किल हब

युवाओं को हुनर, तकनीक और रोजगार से जोड़ने की बड़ी पहल,
गोरखपुर में ‘संवाद’

न्च्ैक्ड की ओर से गोरखपुर में ‘संवाद’, कौशल विकास को लेकर सरकार, उद्योग और संस्थानों का मंथन

कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता, आधुनिक तकनीक और रोजगार आधारित प्रशिक्षण पर दिया जोर

कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को किया गया सम्मानित

 लखनऊ: 12 मई, 2026

उत्तर प्रदेश को देश की “स्किल कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार कौशल विकास को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और डिजिटल नवाचार से जोड़ते हुए लगातार नए कदम उठा रही है. इसी क्रम में गोरखपुर के होटल रमाडा में मंगलवार को ‘संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उत्तर प्रदेश कौशल विकास की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सरकार, उद्योग जगत, निजी आईटीआई संचालकों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं भविष्य आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को लेकर व्यापक मंथन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल जी ने की। इस दौरान  विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे एवं संयुक्त निदेशक  मयंक गंगवार सहित गोरखपुर, बस्ती एवं अयोध्या मंडल के निजी आईटीआई संचालक, प्रशिक्षण प्रदाता और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए  मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला कौशल विकास संस्थान हैं और आज के समय में युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला हुनर उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ एमओयू कर 150 सरकारी आईटीआई को आधुनिक तकनीकों से अपग्रेड किया है, जहाँ एआई, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, एडवांस डिजाइनिंग और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे हैं. इन संस्थानों में आधुनिक लैब और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की गई हैं, ताकि युवाओं को उद्योगों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। उन्होंने कहा कि जल्द ही 62 और आईटीआई को भी इस परियोजना से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रदेश का तकनीकी शिक्षा ढांचा और अधिक मजबूत होगा।
मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रमाण पत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को ऐसा कौशल देना चाहिए जिससे वे उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बन सकें और आसानी से रोजगार प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अब “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर है, जहाँ प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक सरकारी एवं 3000 से अधिक निजी आईटीआई संचालित हो रहे हैं, जो लाखों युवाओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। साथ ही पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश की “स्किल कैपिटल” के रूप में उभर रहा है।
प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास को केवल एक पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह युवाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं को देखते हुए अब पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल आधारित शिक्षा को जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा हुनर प्रदान करना है जिससे वे अपने जीवन में स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें, इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि प्रशिक्षण पूरी तरह बाजार की मांग और आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप हो।
डॉ. हरिओम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि युवाओं को अपने ही जनपद और आसपास के क्षेत्रों में सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, जिससे उन्हें रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यदि प्रशिक्षण, तकनीक और उद्योगों का सही तालमेल स्थापित हो जाए तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा स्किल हब बन सकता है और यहां का युवा देश ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप अब स्कूली स्तर पर भी व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत माध्यमिक एवं एडेड स्कूलों के विद्यार्थियों को स्कूल के बाद एक घंटे का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें बच्चे अपनी रुचि के अनुसार क्षेत्र का चयन स्वयं करते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के ढाई हजार से अधिक स्कूल इस परियोजना से जुड़ चुके हैं और लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों का आकलन एवं प्रमाणन भी कराया जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अधिक से अधिक स्कूलों को इस पहल से जोड़ा जाएगा।
पुलकित खरे ने बताया कि प्रदेश में 900 से अधिक जॉब रोल्स में प्रशिक्षण उपलब्ध है, जिससे युवाओं को उनकी रुचि और उद्योगों की मांग के अनुरूप अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1000 से अधिक प्रशिक्षण साझेदार प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि न्च्ैक्ड की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से “कौशल दोस्त” ।प् चैटबॉट युवाओं और प्रशिक्षण संस्थानों की जिज्ञासाओं का समाधान कर रहा है। वहीं “कौशल दर्पण” प्लेटफॉर्म के जरिए प्दअमेज न्च् के आंकड़ों के आधार पर भविष्य के रोजगार अवसरों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि जिलों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
इसके साथ ही “कौशल दिशा” ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवा घर बैठे प्रशिक्षण लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण साझेदारों को चरणबद्ध भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है, ताकि रोजगार आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (क्क्न्-ळज्ञल्) के अंतर्गत युवाओं को पूर्णतः निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें रहने, खाने और प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था सरकार द्वारा की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीकों और रोजगारपरक शिक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अंत में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षार्थियों एवं प्रशिक्षकों को मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे

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तकनीकी शिक्षा को उद्योगों से जोड़कर युवाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर-मंत्री आशीष पटेल

हर छात्र के लिए दो इंडस्ट्रियल विजिट अनिवार्य करने की तैयारी, प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश

एआई इंटीग्रेशन और प्लेसमेंट पर फोकस, तकनीकी संस्थानों की रैंकिंग सुधारने की कवायद तेज

वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में तकनीकी संस्थानों की होगी बड़ी भूमिका-आशीष पटेल

 लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करते हुए छात्रों को व्यवहारिक एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि युवा सीधे उद्योगों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
मंत्री पटेल मंगलवार को विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष संख्या-87 में डिलाइट के प्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक  कर रहे थे। बैठक में तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्लेसमेंट पोर्टल, एआई इंटीग्रेशन, नैक एवं एनआईआरएफ रैंकिंग, इंडस्ट्रियल विजिट, इंडस्ट्री पार्टनरशिप तथा विभिन्न एमओयू की प्रगति की समीक्षा की गई।
मंत्री पटेल ने तकनीकी संस्थानों में इंडस्ट्रियल विजिट और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाए जाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग के छात्रों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को एक्सप्रेसवे, टनल एवं डैम निर्माण स्थलों का भ्रमण कराया जाए, जबकि मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को ईवी निर्माण इकाइयों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों का व्यावहारिक अनुभव दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक छात्र के लिए कम से कम दो इंडस्ट्रियल विजिट अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।
बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा विकसित प्लेसमेंट पोर्टल पर 8 हजार से अधिक छात्र ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। साथ ही दंनातपण्बवउ के सहयोग से उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए विशेष लैंडिंग पेज तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर मिल सकेंगे। नैक, एनआईआरएफ एवं एसआईआरएफ रैंकिंग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी संस्थानों में फैकल्टी भर्ती एवं छात्रों के प्लेसमेंट पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सभी आरएससी एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को रैंकिंग एवं गुणवत्ता सुधार के लिए तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एआई आधारित पाठ्यक्रमों के समावेशन पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इंफोसिस सहित विभिन्न संस्थानों के सहयोग से नई तकनीकों एवं एआई इंटीग्रेशन आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं, ताकि छात्रों को न्यू एज टेक्नोलॉजी के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके।
बैठक में प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा, विभागीय अधिकारी एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार

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मोबाइल छुपाकर परीक्षा में नकल का प्रयास करने वाला परीक्षार्थी गिरफ्तार, प्रवक्ता परीक्षा से किया गया डिबार

एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम की सतर्क निगरानी से पकड़ी गई संदिग्ध गतिविधि

 लखनऊ: 12 मई, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया  कि आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-02/2022 प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा दिनांक 10 मई 2026 को प्रदेशभर में सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई। परीक्षा के दौरान आयोग द्वारा स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से एक परीक्षार्थी की संदिग्ध गतिविधि चिन्हित की गई, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए नकल के प्रयास का खुलासा हुआ।
 10 मई 2026 की द्वितीय पाली में मेरठ स्थित इस्माईल नेशनल महिला पीजी कॉलेज में रसायन विज्ञान विषय की परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी कृष्ण पाल पुत्र श्री हुकुम सिंह, जो दिव्यांग श्रेणी का अभ्यर्थी है, बैसाखी के सहारे परीक्षा कक्ष में उपस्थित हुआ था। एआई आधारित निगरानी के दौरान उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर आयोग द्वारा तत्काल केन्द्राध्यक्ष को सूचना दी गई। तलाशी लेने पर परीक्षार्थी की बैसाखी के ऊपरी कवर में छुपाया गया मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसका स्विच ऑन था तथा उसका उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा था।
केन्द्राध्यक्ष द्वारा तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद थाना कोतवाली, मेरठ पुलिस ने परीक्षार्थी कृष्ण पाल को हिरासत में लेकर उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग के निवारण अधिनियम-2024 की धारा 3, 4 एवं 13 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की। प्रकरण की जांच मेरठ पुलिस तथा एसटीएफ द्वारा की जा रही है।
आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने हेतु आयोग द्वारा तत्काल प्रभाव से परीक्षार्थी कृष्ण पाल, निवासी 34 भकरपुर कवट्टा, मेरठ, अनुक्रमांक-0302016680, प्रवक्ता रसायन विज्ञान को वर्तमान प्रवक्ता संवर्ग परीक्षा-2022 से डिबार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आगामी परीक्षाओं में भी उन्नत तकनीक एवं एआई आधारित कंट्रोल रूम के माध्यम से सघन निगरानी जारी रखी जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों के प्रयोग को पूर्ण रूप से रोका जा सके और पारदर्शी एवं निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे

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प्रवक्ता परीक्षा 2026 की प्रोविजनल उत्तरकुंजी जारी, 18 मई तक ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे आपत्तियां

आयोग की वेबसाइट पर सभी विषयों की मास्टर सेट उत्तरकुंजी अपलोड

 लखनऊ: 12 मई, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया  है कि आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-02/2022 के अंतर्गत आयोजित प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा, जो  09 एवं 10 मई 2026 को सम्पन्न हुई थी, उसके सभी विषयों की मास्टर सेट की प्रोविजनल उत्तरकुंजी अभ्यर्थियों के अवलोकनार्थ 12 मई 2026 को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ीजजचेरूध्ध्नचमेेबण्नचण्हवअण्पद पर प्रकाशित कर दी गई है।
भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, शिक्षा, अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र, गृह विज्ञान, अर्थशास्त्र, संस्कृत, मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला सहित सभी विषयों की प्रोविजनल उत्तरकुंजी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है।
अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अभ्यर्थी आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन लिंक प्रोविजनल उत्तरकुंजी आपत्ति पोर्टल के माध्यम से अपने अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि अंकित कर लॉगिन करने के उपरान्त मास्टर सेट की प्रोविजनल उत्तरकुंजी का मिलान कर सकते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को उत्तरकुंजी के संबंध में कोई आपत्ति हो तो वह  12 मई 2026 से 18 मई 2026 की रात्रि 12 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। उन्होंने बताया कि आपत्तियां केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार की जाएंगी। अन्य किसी माध्यम से प्राप्त आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। आयोग द्वारा आपत्ति दर्ज करने संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश भी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे

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पीएम मोदी की अपील पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने मेट्रो और नमो भारत ट्रेन से किया सफर

पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अपनाया पब्लिक ट्रांसपोर्ट

मेट्रो और रैपिड रेल से मेरठ पहुंचे मंत्री कपिल देव अग्रवाल, जनता से की सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील

 लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिकाधिक उपयोग करने, अनावश्यक यात्राओं से बचने तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता निभाने की अपील का प्रभाव अब जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में भी दिखाई देने लगा है।
 इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली से मेरठ तक की यात्रा मेट्रो एवं नमो भारत ट्रेन (रैपिड रेल) से कर आमजन को ऊर्जा संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन अपनाने का संदेश दिया।
जारी भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार मंत्री अग्रवाल सायं में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, टर्मिनल-3, नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट से बाहर निकलने के बाद उन्होंने निजी वाहन का उपयोग न करते हुए सीधे टर्मिनल-3 मेट्रो स्टेशन का रुख किया और मेट्रो के माध्यम से सराय काले खां रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां से उन्होंने नमो भारत ट्रेन द्वारा मेरठ के लिए प्रस्थान किया तथा रात्रि में मोदीपुरम स्टेशन, मेरठ पहुंचे।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक बचत और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखने का व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और लोग भी इसके लिए प्रेरित होंगे।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को अपनाने से न केवल पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी, बल्कि सड़कों पर वाहनों का दबाव घटने से प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने युवाओं, कर्मचारियों, छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे छोटी एवं नियमित यात्राओं में मेट्रो, बस और रैपिड रेल जैसी सुविधाओं का अधिक उपयोग करें।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे
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सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश

भारतीय भाषाओं के संरक्षण और रचनात्मक शिक्षा को बढ़ावा देगा ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’-मंत्री संदीप सिंह

13 से 19 मई तक परिषदीय एवं केजीबीवी विद्यालयों में आयोजित होंगे
सांस्कृतिक एवं भाषाई कार्यक्रम

 लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रदेश के परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बुधवार से ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’ का आयोजन प्रारंभ हो रहा है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में आयोजित यह विशेष शिविर 13 मई से 19 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। शिविर का शुभारंभ केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा किया जाएगा।
प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संदीप सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बच्चों को भारतीय भाषाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 बच्चों में भाषाई दक्षता, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। इस शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत को समझने और अपनाने का अवसर मिलेगा।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने समस्त डायट प्राचार्यों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को शिविर का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिविर के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं, लोक संस्कृति, कहानी, कविता, संवाद, गीत, नाटक एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा।
विभाग द्वारा शिविर में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों की सुझावात्मक सूची भी सभी जनपदों को उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही स्थानीय स्तर पर कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी एवं आकर्षक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर के आयोजन पर होने वाला व्यय विद्यालयों की कंपोजिट ग्रांट से वहन किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा से जोड़ते हुए उनके भाषाई कौशल का विकास करना तथा रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाना है। विभाग द्वारा सभी जनपदों को शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस अभियान से जुड़ सकें।

सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे

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सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश

आयुष मंत्री ने 09 मण्डलों की समीक्षा बैठक की

आयुष अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति प्रत्येक दशा में सुनिश्चित की जाय

अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बनी रहे
-डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’

लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रदेश के आयुष राज्यमुत्री (स्वतंत्र प्रभार), खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एमओएस) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ आज राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी एवं औषधि निर्माणशाला राजाजीपुरम लखनऊ के सभागार में प्रदेश के 09 मण्डल लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, अयोध्या, आजमगढ़, मिर्जापुर, बस्ती, गोरखपुर एवं प्रयागराज के अंतर्गत जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी एवं जिला होम्योपैथिक अधिकारी के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आयुष अस्पतालों में चिकित्सकों की कार्यस्थल पर उपस्थिति प्रत्येक दशा में सुनिश्चित की जाय।
डॉ. दयालु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बनी रहे जहां पर दवाओं की कमी हो उनकी सूचना प्राथमिकता के आधार पर दें। ताकि दवाओं को तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आवश्यकता के अनुसार दवाइयां खरीदें, जिन दवाइयों, कामन हैं एवं उनकी मांग है उनकों प्राथमिकता के आधार पर खरीदें ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न होने पाए।
आयुष मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी चिकित्सक ओपीडी में आए मरीजों को बाहर की दवा न लिखें। उन्होंने प्रदेश के सभी आयुष चिकित्सालय (आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्योपैथ) में निरीक्षण करें, ताकि चिकित्सक बाहर की दवा न लिखने पाएं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ओपीडी संख्या बढ़ाने का हरसम्भव प्रयास करें। जिससे कि गरीबों एवं जरूरतमंद लोगों का उपचार सुचारू ढंग से किया जा सके। आयुष चिकित्सालयों में कैम्प लगाकर आमजनमानस को जागरूक कर मरीजों का उपचार करें।
डॉ. दयालु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिलों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अस्पतालों के निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध करायें। जिससे कि अस्पतालों को निर्माण कराया जा सके, ताकि आमजनमानस को इसका लाभ मिल सके।
प्रमुख सचिव आयुष श्री रंजन कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों को पेंट कराकर ब्राण्डिग करायें। अस्पतालों में पंचकर्मा भी कराएं। उन्होंने अस्पतालों में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल तथा शौचालय आदि की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
महानिदेशक आयुष श्रीमती चैत्रा वी. ने मा. मंत्री जी को विभाग के विषय में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने मा. मंत्री जी आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कराया जायेगा।
बैठक में निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथ डॉ. पी.के. सिंह, यूनानी निदेशक प्रो. जमाल अख्तर सहित 09 मण्डलों के आयुष चिकित्साधिकारी उपस्थित रहे।
सम्पर्क सूत्र- अजय कुमार द्विवेदी

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सर्वाेच्च न्यायालय में लम्बित वादों के निस्तारण हेतु 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत का आयोजन

लखनऊ: 12 मई, 2026

मुख्य न्यायाधीश, सर्वाेच्च न्यायालय, नई दिल्ली के निर्देशन में सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित वादों के सुलह एवं आपसी सहमति से निस्तारण के उद्देश्य से “समाधान समारोह 2026” के अंतर्गत 21 अगस्त, 2026, 22 अगस्त, 2026 एवं 23 अगस्त, 2026 को विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन न्याय को सरल एवं सुलभ तरीके से आमजन तक पहुंचाने तथा आपसी सहभागिता के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की भावना को साकार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
“समाधान समारोह 2026” का शुभारम्भ 21 अप्रैल, 2026 से किया जा चुका है। इस अभियान के अंतर्गत माननीय सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों को चिन्हित कर उनका सुलह के माध्यम से निस्तारण कराया जाएगा। विशेष लोक अदालत का आयोजन माननीय सर्वाेच्च न्यायालय परिसर, नई दिल्ली में किया जाएगा।
विशेष लोक अदालत से पूर्व सुलह बैठकों का आयोजन राज्य, जिला, तालुका एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा मध्यस्थता केन्द्रों में लगातार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से समाधान कराया जा सके।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि जिन व्यक्तियों के मामले  सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित हैं, वे अपने मामलों को “समाधान समारोह” में शामिल कराने हेतु निर्धारित गूगल फॉर्म 31 मई, 2026 तक भर सकते हैं। यह फॉर्म सर्वाेच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस अभियान से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु हेल्पलाइन नंबर 011-23115652 एवं 011-23116464 अथवा ईमेल ेचमबपंससवांकंसंज2026/ेबपण्दपबण्पद पर संपर्क किया जा सकता है।
सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे

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सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश

स्टेट हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर की नवगठित संचालन समिति की प्रथम बैठक का आयोजन

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा

लखनऊ: 12 मई, 2026

स्टेट ट्रांसफॉरमेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी,     श्री मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में बीते सोमवार को स्टेट हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर, उ0प्र0 (एसएचएसआरसी-यूपी) की नवगठित संचालन समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर एवं नवजात मृत्यु दर में सुधार हेतु कार्ययोजना तैयार करना शामिल रहा। इसके साथ ही अस्पतालों की निगरानी हेतु डिजिटल डैशबोर्ड की स्थापना, न्यूनतम लागत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा अस्पताल अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में अगले पांच वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तृत रोडमैप तैयार करने पर भी चर्चा हुई, जिसमें स्वास्थ्य जनशक्ति, सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों तथा राज्य स्तरीय केंद्रीकृत डैशबोर्ड को विशेष प्राथमिकता दिए जाने पर बल दिया गया। इसके अतिरिक्त एसएचएसआरसी-यूपी के बोर्ड ऑफ गर्वेनेंस, संचालन समिति, वेबसाइट निर्माण, स्टाफ संरचना एवं भर्ती प्रक्रिया से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत चर्चा के उपरांत आवश्यक निर्णय लिए गए। बैठक में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि एसएचएसआरसी-यूपी के माध्यम से उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक मजबूत एवं जन-केंद्रित बनाने में सहायता मिलेगी।
बैठक में एसएचएसआरसी-यूपी की ओर से डॉ. राजेश हर्षवर्धन, चिकित्सा अधीक्षक, एसजीपीजीआईएमएस उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त एसजीपीजीआईएमएस के डॉ. नारायण प्रसाद, डॉ. आर.के. सिंह, डॉ. कीर्ति एवं वित्त अधिकारी सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में सहभागिता की। चिकित्सा शिक्षा विभाग से विशेष सचिव श्रीमती    कृतिका शर्मा, स्वास्थ्य विभाग से विशेष सचिव श्री रवि, आईआईएम लखनऊ से प्रो. वेंकट, लखनऊ विश्वविद्यालय से डीन प्रो. अरविंद मोहन तथा आईएमए एवं एफओजीएसआई के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि एसएचएसआरसी-यूपी का गठन एसजीपीजीआईएमएस (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान), लखनऊ के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के अंतर्गत किया गया है। यह केंद्र राज्य में स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं प्रभावी बनाने हेतु तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
सम्पर्क सूत्र-आशिया खातून
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सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश

नलकूप निर्माण खंड वाराणसी के उपखण्ड प्रथम में भण्डारण एवं सुरक्षा हेतु शेड बाउंड्रीवॉल एवं आन्तरिक रोड निर्माण की कार्य परियोजना के लिए 42 लाख 90 हजार रुपए की अवशेष धनराशि की गयी अवमुक्त’

लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रदेश सरकार ने नलकूप निर्माण खंड वाराणसी के उपखण्ड प्रथम में भण्डारण एवं सुरक्षा हेतु शेड बाउंड्रीवॉल एवं आन्तरिक रोड निर्माण की परियोजना कार्य के लिए  42 लाख 90 हजार रुपए की अवशेष धनराशि अवमुक्त की गयी हैं। इस सम्बन्ध में आवश्यक शासनादेश सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।
जारी शासनादेश में निर्देश दिया गया है कि उक्त परियोजना में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता एवं समय से पूर्ण कराया जाना संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।
सम्पर्क सूत्र-इंजेश सिंह

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जनपद फतेहपुर के अन्तर्गत कोड़ा निरीक्षण भवन के निर्माण कार्य परियोजना के लिए 77 लाख रुपए की अवशेष धनराशि की गयी अवमुक्त’

लखनऊ: 12 मई, 2026

प्रदेश सरकार ने जनपद फतेहपुर के अन्तर्गत कोड़ा निरीक्षण भवन के निर्माण कार्य परियोजना के लिए 77 लाख रुपए की अवशेष धनराशि अवमुक्त की गयी हैं। इस सम्बन्ध में आवश्यक शासनादेश सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।
जारी शासनादेश में निर्देश दिया गया है कि उक्त परियोजना में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता एवं समय से पूर्ण कराया जाना संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।
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सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश
लेख
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग

दिव्यांगजन के लिए वरदान साबित हो रहे हैं, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण

लखनऊ: 12 मई, 2026
समाज के सर्वांगीण विकास की अवधारणा तभी साकार होती है जब समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सुविधाएँ प्राप्त हों। विशेष रूप से दिव्यांगजन (च्मतेवदे ूपजी क्पेंइपसपजपमे) के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि उन्हें ऐसी योजनाओं से जोड़ा जाए, जो उनके जीवन को सरल, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना सकें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वासन की महत्वपूर्ण और प्रभावशाली योजनाएं संचालित की हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग (।तजपपिबपंस स्पउइे) और सहायक उपकरण (।ेेपेजपअम क्मअपबमे) उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने दैनिक जीवन के कार्यों को सहजता से कर सकें और समाज की मुख्यधारा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें। यह योजना न केवल शारीरिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी बढ़ाती है। दिव्यांगजन के जीवन को सुगम बनाने के लिए सहायक उपकरण केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि उनके स्वावलंबन का आधार होते हैं। राज्य सरकार ने इस संवेदनशीलता को समझते हुए कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना में क्रांतिकारी सुधार किए हैं।
इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए जाते हैं, जैसे कृत्रिम हाथ और पैर, ट्राइसाइकिल (हैंड/बैटरी संचालित), व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र (भ्मंतपदह ।पक), बैसाखी (ब्तनजबीमे), दृष्टिबाधितों के लिए विशेष उपकरण आदि। इन उपकरणों के माध्यम से दिव्यांगजन अपनी शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए एक सामान्य जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए न केवल बजट में वृद्धि की है, बल्कि योजनाओं के स्वरूप को भी आधुनिक बनाया है। विशेष रूप से ‘कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना’ के माध्यम से दिव्यांग व्यक्ति न केवल आत्मनिर्भर बनें बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान दे सकें।
सरकार ने दिव्यांगजनों की बढ़ती जरूरतों और उपकरणों की लागत को ध्यान में रखते हुए अनुदान की सीमा में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। 28 अगस्त, 2024 से, दिव्यांगजनों को मिलने वाली अधिकतम अनुदान राशि को ₹10,000/- से बढ़ाकर ₹15,000/- कर दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा  बढ़ोत्तरी की गई इस धनराशि से लाभार्थी बेहतर गुणवत्ता वाले आधुनिक उपकरण प्राप्त कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 से लेकर 2026 तक इस योजना के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्ष 2017-18 में 63,049 लाभार्थियों को, 2018-19 में 63,744 को, 2019-20 में 27,905 लाभार्थी, 2020-21 में 59,283 दिव्यांगजनों को, 2021-22 में 42,184 लाभार्थियों को, 2022-23 में 49,111 लाभार्थियों को,  2023-24 में 33,043 लोगों को, 2024-25 में 35,136 लाभार्थियों को, 2025-26 (आंशिक) में 17,454 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण दे कर सहायता प्रदान की है।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार इस योजना को सुदृढ़ करने और अधिक से अधिक दिव्यांगजनों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। इस योजना का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करती है। उदाहरण के तौर पर, जिन लोगों को पहले चलने-फिरने में कठिनाई होती थी, वे अब कृत्रिम अंग या ट्राइसाइकिल के माध्यम से स्वतंत्र रूप से अपने कार्य कर पा रहे हैं। किसी भी सरकारी नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक उसकी पहुँच से मापी जाती है। वर्ष 2017 से 2026 तक के आंकड़े राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 से अब तक प्रदेश में कुल 3,90,909 विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों का वितरण किया जा चुका है। सरकार ने मिशन मोड में काम करते हुए लगभग 4 लाख दिव्यांगजनों के जीवन को सुगम बनाया है। छात्र अब विद्यालय और कॉलेज जाने में सक्षम हो रहे हैं। नौकरी करने वाले लोग अपने कार्यस्थल तक आसानी से पहुंच रहे हैं। छोटे व्यवसाय करने वाले लोग अपनी जीविका स्वयं चला रहे हैं।
इस प्रकार यह योजना केवल सहायता प्रदान नहीं करती, बल्कि जीवन को नया आयाम देती है। दिव्यांगजनों के प्रति समाज में संवेदनशीलता और समावेशिता बढ़ाना भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। जब दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनते हैं, तो वे समाज में सक्रिय भागीदारी करते हैं और एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न अंग हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सरकार द्वारा वितरित किए जाने वाले उपकरणों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जैसे बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल, डिजिटल श्रवण यंत्र, हल्के और टिकाऊ कृत्रिम अंग आदि। दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, और दिव्यांगजन इस दौड़ में पीछे न रहें, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी नीतियों में दूरदर्शिता दिखाई है।
14 अक्टूबर, 2024 से भारत सरकार की ‘एडिप’ (।क्प्च्) योजना की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी अपनी योजना के अंतर्गत आधुनिक उपकरणों को शामिल करने की व्यवस्था की है। अब दिव्यांगजनों को केवल बैसाखी या व्हीलचेयर ही नहीं, बल्कि स्मार्ट फोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरण भी प्रदान किए जा रहे हैं।  यह पहल विशेष रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए क्रांतिकारी है, जिससे वे ऑनलाइन शिक्षा और सूचना के वैश्विक भंडार से जुड़ सकेंगे। इन नवाचारों के कारण उपकरण अधिक उपयोगी और टिकाऊ बन गए हैं, जिससे लाभार्थियों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। इस योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन प्रणाली और वितरण की निगरानी की व्यवस्था की गई है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे। उत्तर प्रदेश सरकार की इन योजनाओं ने केवल शारीरिक सहायता ही प्रदान नहीं की है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिणाम भी सामने आए हैं। कृत्रिम अंगों की गुणवत्ता में सुधार और अनुदान राशि में वृद्धि ने दिव्यांगों की गतिशीलता (डवइपसपजल) को बढ़ाया है। अब वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं सक्षम बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, राज्य सरकार ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, विशेषकर दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को चरितार्थ किया है। पिछले 09 वर्षों में चिकित्सा और भौतिक पुनर्वास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने जो मानक स्थापित किए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। “कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना” उत्तर प्रदेश सरकार की एक दूरदर्शी और संवेदनशील पहल है, जिसने हजारों दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। यह योजना न केवल शारीरिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को भी मजबूत करती है। उत्तर प्रदेश सरकार की सही नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से दिव्यंागजनों  को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
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– मो0 इकबाल खान, सूचना अधिकारी

पत्र सूचना शाखा
सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश
लेख
जनपद मैनपुरी

मैनपुरी में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से संवरता मातृत्व

दिनांकः 12 मई, 2026
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना केवल एक सरकारी पहल मात्र नहीं, बल्कि उन हजारों माताओं के लिए एक सुरक्षित कवच बनकर उभरी है, जो आर्थिक तंगी के कारण गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य और पोषण से समझौता करके असुरक्षित प्रसव की स्थितियों का सामना करती थीं। प्रदेश सरकार ने इस दूरदर्शी योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के बीच स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना जागृत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के दौरान महिलाओं को पर्याप्त विश्राम और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
मैनपुरी के विभिन्न गांवों जैसे बेरियाहार, जगतपुर, आलीपुर पट्टी और डगऊ नगरिया की सफल कहानियाँ इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि कैसे सही समय पर मिली सहायता मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। योजना की संरचना इस प्रकार की गई है कि यह न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण के प्रति भी प्रोत्साहित करती है। पहली संतान के जन्म पर प्रदान की जाने वाली 5,000 रुपये की राशि दो किश्तों में सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जिससे बिचौलियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है और सहायता सीधे पात्र के हाथ में पहुँचती है। पहली किश्त के 3,000 रुपये गर्भावस्था के प्रारंभिक पंजीकरण पर मिलते हैं, जो गर्भवती महिला को शुरुआती दौर में जरूरी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। दूसरी किश्त के 2,000 रुपये प्रसव के बाद शिशु के टीकाकरण चक्र के आधार पर दिए जाते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि शिशु को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीके लगें। इसके अतिरिक्त, बालिका जन्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा दूसरी संतान बालिका होने की स्थिति में 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता का विशेष प्रावधान किया गया है, जो समाज में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जिला प्रशासन द्वारा मैनपुरी में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर विशेष सक्रियता दिखाई गई है, जिसका परिणाम पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से झलकता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहाँ 1,132 लाभार्थियों को 30 लाख 11 हजार रुपये की सहायता दी गई, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1,666 लाभार्थियों तक पहुँच गई, जिन्हें 43 लाख 76 हजार रुपये वितरित किए गए। विकास की यह गति वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी जारी है, जहाँ अब तक 1,383 लाभार्थियों को 38 लाख 53 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। पिछले तीन वर्षों के सामूहिक प्रयास से कुल 4,181 माताओं के खातों में 1 करोड़ 12 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि पहुँचाई गई है।
यह आंकड़ा केवल धन का वितरण नहीं है, बल्कि उन 4,181 परिवारों की खुशहाली और सुरक्षित भविष्य का निवेश है। जिला प्रशासन की प्रभावी निगरानी और निचले स्तर पर कार्य कर रही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व आशा कार्यकर्ताओं के समर्पण ने इस योजना को घर-घर तक पहुँचाया है। सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं को छोड़कर, समाज के अन्य सभी वर्गों की पात्र महिलाएं अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर पंजीकरण करा सकती हैं। इसके लिए माता-पिता के पहचान पत्र, बैंक पासबुक और एमसीपी (मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन) कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेजों के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।
यह योजना धरातल पर कितनी प्रभावशाली है, ये बताने के लिए मैनपुरी की उन तमाम महिलाओं के अनुभव हमारे सामने है, जिन्होंने इसका लाभ उठाते हुए सुरक्षित प्रसव और अपने मातृत्व को भी संबल दिया है। बेरियाहार की 30 वर्षीय प्रियंका यादव की कहानी एक ऐसी महिला की है, जो गर्भावस्था के दौरान अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पर्याप्त पोषण नहीं ले पा रही थीं। ऐसे समय में जब उन्हें चिकित्सा परामर्श और फल-दूध जैसे आहार की सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब इस योजना की किश्तों ने उन्हें वह संबल प्रदान किया जिससे वह सुरक्षित प्रसव तक पहुँच सकीं। प्रियंका का कहना है कि यह सहायता उनके और उनके बच्चे के लिए किसी बड़े सहारे से कम नहीं थी। इसी प्रकार जगतपुर की अनुपम चौहान ने अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद इस योजना के माध्यम से समय पर स्वास्थ्य जांच और पौष्टिक आहार सुनिश्चित किया, जिससे आज वे और उनका शिशु पूरी तरह स्वस्थ हैं। अनुपम के अनुसार, सरकार की इस पहल ने उनके जीवन में तब बदलाव लाया जब उनके परिवार की आय सीमित थी और नियमित जांच का खर्च उठाना कठिन हो रहा था। आलीपुर पट्टी की गौरी बाथम का अनुभव भी यही बताता है कि कैसे इस योजना ने उन्हें अपनी सेहत के प्रति सजग बनाया और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करने में सहायता की। वहीं डगऊ नगरिया की कुमारी सोनी, जिन्हें पहले सरकारी योजनाओं की अधिक जानकारी नहीं थी, आज इस योजना को अपने जैसे गरीब परिवारों के लिए वरदान मानती हैं। उनका मानना है कि यदि यह आर्थिक मदद न मिलती, तो शायद वे अपनी और अपने बच्चे की सेहत का इतना ध्यान नहीं रख पातीं।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने मैनपुरी में न केवल स्वास्थ्य मानकों में सुधार किया है, बल्कि महिलाओं को सशक्त और जागरूक भी बनाया है। यह योजना अब केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम न रहकर एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जहाँ ग्रामीण महिलाएं स्वयं आगे आकर अपने अधिकारों और स्वास्थ्य के प्रति चर्चा करती हैं। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित इस योजना ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के कंधों से आर्थिक बोझ को कम किया है, जिससे परिवार के अन्य सदस्य भी गर्भवती महिला की देखभाल में अधिक रुचि लेने लगे हैं।
जिला प्रशासन की निरंतर समीक्षा और पारदर्शी प्रक्रिया ने लाभार्थियों का विश्वास सरकारी तंत्र पर और सुदृढ़ किया है। इस योजना का व्यापक प्रभाव भविष्य में स्वस्थ नई पीढ़ी के रूप में सामने आएगा, जो एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखेगा। मैनपुरी के गांव-गांव में गूंजती स्वस्थ शिशुओं की किलकारियां और माताओं के चेहरे की मुस्कान इस योजना की वास्तविक सफलता को परिभाषित करती है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिला को जब इस प्रकार का सरकारी संरक्षण मिलता है, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के उत्थान में योगदान देती है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की यह मुहिम निरंतर जारी है, जो मैनपुरी को एक स्वस्थ और सुरक्षित मातृत्व वाले जनपद के रूप में नई पहचान दिला रही है। सरकार और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों से संवर्धित यह योजना आज जनपदों में सुखद मातृत्व का बड़ा आधार बन चुकी है। माह फरवरी 2026 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में लगभग 60 लाख माताएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। आने वाले समय में ये योजना जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में और भी क्रांतिकारी बदलाव लाने के आधार बनेगी।
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जनपद मैनपुरी

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