चुनाव आयोग कय ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (SIR) पहल, जउन असल मा वोटर लिस्ट का साफ-सुथरा करै खातिर शुरू कीन गय रही, उ अब पश्चिम बंगाल अउर बिहार मा सरकारी कल्याणकारी योजनान खातिर एक्कौ बड़ा ‘फिल्टर’ बनिके निकर रही है। दूनों राज्यन कय सरकारन ई साफ कइ दीन है कि जिन लोगन कय नाँव वोटर लिस्ट से हटाय दीन गय हैं, उ अब राशन अउर पेंशन जइसन सामाजिक सुरक्षा योजनान कय हकदार नाहीं रहिहैं।
पश्चिम बंगाल मा CM सुवेंदु अधिकारी कय अगुवाई मा BJP कय पहली सरकार बनै कय कुछै दिन बाद, प्रशासन ई इशारा दीन कि जउन लोगन कय नाँव SIR प्रक्रिया कय दौरान हटाय दीन गय रहे, उ कई सरकारी वेलफेयर स्कीम खातिर पात्र नाहीं होइहैं। बिहार मा भी अइसने कदम उठावा जात है, जहाँ BJP कय अगुवाई वाली NDA सरकार ने SIR मा नाँव हटे कय बाद राशन लिस्ट से लाभार्थीन का हटावै कय काम शुरू कइ दीस है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ कय एक्कौ रिपोर्ट कय मुताबिक, बिहार कय CM सम्राट चौधरी कहेन कि जिन लोगन कय नाँव राज्य कय वोटर लिस्ट से हटाय दीन गय हैं, उनका सरकारी फायदा—जेमा राशन अउर वेलफेयर स्कीम सामिल हैं—नाहीं मिली। वेलफेयर स्कीम कय डेटाबेस का सुधरी भई वोटर लिस्ट से जोड़िके, SIR प्रक्रिया अब दूनों राज्य सरकारन खातिर डुप्लीकेट, मरे भए अउर गलत तरीका से फायदा लेय वाले लाभार्थीन कय पहचान करै कय आधार बनि गयी है, ताकि वेलफेयर बाँटै कय सिस्टम मा होय वाली धांधली रोकी जा सके।
चुनाव आयोग कय SIR बिहार मा 2025 कय विधानसभा चुनाव अउर पश्चिम बंगाल मा 2026 कय विधानसभा चुनाव से पहिले शुरू कीन गय रहा, ताकि वोटर लिस्ट का शुद्ध कीन जाय सके अउर गलत नाँवन का हटाया जाय सके। जहाँ SIR कय तहत बिहार मा करीब 65 लाख नाँव हटाये गय, वहीं पश्चिम बंगाल मा करीब 91 लाख नाँव हटाये गय।
पश्चिम बंगाल मा हटाये गय 91 लाख नाँवन मा से, 27 लाख से ज्यादा लोग “तार्किक विसंगतियों” (logical discrepancies) कय सूची मा बने रहेन, अउर उ 23 अउर 29 अप्रैल का भए विधानसभा चुनाव मा वोट नाहीं डारि पाएन।
हालाँकि ‘डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र’ (DBT) मॉडल बिचौलियन अउर फर्जी लाभार्थीन का हटाय के वेलफेयर बाँटै मा होय वाली गड़बड़ियन का कम कीस है, मुला इ सिस्टम मा अभी भी बड़ी कमियाँ मौजूद हैं। जइसन कि आधार-बैंक जुड़ाव कय अधूरा होब, फर्जी अउर डुप्लीकेट लाभार्थी, फंड कय गलत इस्तेमाल अउर लिस्ट मा नाँव जोड़ै या हटावै मा होय वाली गलतियाँ। अइसा लागत है कि अब इ राज्य SIR-जाँचे भए डेटाबेस कय जरिये इन गड़बड़ियन का दूर करै कय कोशिश करत हैं।
कांग्रेस नेता अउर राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम बंगाल अउर बिहार कय इ कदम का “बहुतै आपत्तिजनक” बतायें हैं। इ कहत हुए कि इन कदम से गंभीर सवाल खड़े होइ गय हैं, चिदंबरम कहेन, “का नागरिकता चुनावी लिस्ट मा सामिल होय कय आधार है, या चुनावी लिस्ट मा सामिल होब नागरिकता कय आधार है? सुप्रीम कोर्ट का इ सवाल पर विचार करै कय चाही।”
बंगाल मा SIR कय दौरान लिस्ट से हटाये गय नाँवन खातिर कौनों कल्याणकारी योजना नाहीं
10 मई का काम-धाम सम्भाले कय बाद, बंगाल कय BJP सरकार ई साफ कइ दीस कि SIR (नागरिकता जाँच प्रक्रिया) कय दौरान वोटर लिस्ट से हटाये गय लोगन का—जेमा उ लोग भी सामिल हैं जिनकय अपील अभी ट्रिब्यूनल मा अटकी है—”फिलहाल” सरकारी योजनान कय फायदा नाहीं मिली। एमा ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ भी सामिल है, जउन BJP कय घोषणापत्र मा सामिल एक्कौ योजना है अउर जेकर मकसद तृणमूल कांग्रेस कय ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ कय जगह लेब है। ई रिपोर्ट ‘द टेलीग्राफ’ अखबार दीन है।
कोलकाता कय इ अखबार पश्चिम बंगाल कय महिला एवं बाल कल्याण अउर समाज कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल कय हवाले से कहेस, “हम 1 जून से मेहरारून खातिर ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ शुरू करबे। मेहरारून का हर महीना 3,000 रुपया मिली। मुला जिन लोगन कय जाँच अभी भी ट्रिब्यूनल द्वारा कीन जात है, उनका फिलहाल लाभार्थीन कय लिस्ट मा नाहीं सामिल कीन जाई।”
पॉल पत्रकारन से कहेन, “हम 1 जून से पहिले एक्कौ विश्लेषण करबे। जिनकय नाँव लिस्ट से काटि दीन गय हैं, अगर उनका अभी भी फायदा मिलत है, तौ उनका ई नाहीं मिलै कय चाही। जउन मनई मरि गवा है, ओका इ फायदा नाहीं मिलै कय चाही। जउन मनई इ देस कय नागरिक नाहीं है, ओका भी ई फायदा नाहीं मिलै कय चाही। ई खातिर हम इ विश्लेषण करबे। जिनकय नाँव लिस्ट से काटि दीन गय हैं, ओमा से केतने लोग अभी भी ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ कय फायदा लेत हैं, उनकर नाँव लिस्ट से हटाय दीन जइहैं।”
एक्कौ बड़े अधिकारी ‘द टेलीग्राफ’ का बतायें, “अगर ओमा से कौनों बाद मा फिर से चुनावी लिस्ट मा सामिल होइ जात है, तौ ओका लाभार्थीन कय लिस्ट मा सामिल कइ लीन जाई।”
पश्चिम बंगाल कय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मँगल कय कहे रहेन कि कौनों भी चलत भई कल्याणकारी योजना बंद नाहीं कीन जाई। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ अधिकारी कय हवाले से लिखेस, “सरकार कय सब सामाजिक कार्यक्रम—चाहे उ 30 साल पहिले शुरू भए होय या 10 साल पहिले—जारी रहिहैं। हालाँकि, अब ई सब योजना एक्कौ पारदर्शी प्रक्रिया कय तहत काम करिहैं। कौनों भी मरे मनई, गैर-कानूनी घुसपैठिये या गैर-भारतीय नागरिक का राज्य कय नागरिकन खातिर तय फायदा लेय कय इजाजत नाहीं दीन जाई।”
बंगाल मा SIR कय काम अल्पसंख्यक-बहुमत अउर प्रवासी वाले इलाकन मा बिवाद मा फँसि गवा, जहाँ ममता बनर्जी कय अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस आरोप लगायस कि एकर मकसद वोटरन का वोट डारै से रोकब रहा।
चुनाव आयोग कय ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (SIR) पहल, जउन असल मा वोटर लिस्ट का साफ-सुथरा करै खातिर शुरू कीन गय रही, उ अब पश्चिम बंगाल अउर बिहार मा सरकारी कल्याणकारी योजनान खातिर एक्कौ बड़ा ‘फिल्टर’ बनिके निकर रही है। दूनों राज्यन कय सरकारन ई साफ कइ दीन है कि जिन लोगन कय नाँव वोटर लिस्ट से हटाय दीन गय हैं, उ अब राशन अउर पेंशन जइसन सामाजिक सुरक्षा योजनान कय हकदार नाहीं रहिहैं।
पश्चिम बंगाल मा CM सुवेंदु अधिकारी कय अगुवाई मा BJP कय पहली सरकार बनै कय कुछै दिन बाद, प्रशासन ई इशारा दीन कि जउन लोगन कय नाँव SIR प्रक्रिया कय दौरान हटाय दीन गय रहे, उ कई सरकारी वेलफेयर स्कीम खातिर पात्र नाहीं होइहैं। बिहार मा भी अइसने कदम उठावा जात है, जहाँ BJP कय अगुवाई वाली NDA सरकार ने SIR मा नाँव हटे कय बाद राशन लिस्ट से लाभार्थीन का हटावै कय काम शुरू कइ दीस है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ कय एक्कौ रिपोर्ट कय मुताबिक, बिहार कय CM सम्राट चौधरी कहेन कि जिन लोगन कय नाँव राज्य कय वोटर लिस्ट से हटाय दीन गय हैं, उनका सरकारी फायदा—जेमा राशन अउर वेलफेयर स्कीम सामिल हैं—नाहीं मिली। वेलफेयर स्कीम कय डेटाबेस का सुधरी भई वोटर लिस्ट से जोड़िके, SIR प्रक्रिया अब दूनों राज्य सरकारन खातिर डुप्लीकेट, मरे भए अउर गलत तरीका से फायदा लेय वाले लाभार्थीन कय पहचान करै कय आधार बनि गयी है, ताकि वेलफेयर बाँटै कय सिस्टम मा होय वाली धांधली रोकी जा सके।
चुनाव आयोग कय SIR बिहार मा 2025 कय विधानसभा चुनाव अउर पश्चिम बंगाल मा 2026 कय विधानसभा चुनाव से पहिले शुरू कीन गय रहा, ताकि वोटर लिस्ट का शुद्ध कीन जाय सके अउर गलत नाँवन का हटाया जाय सके। जहाँ SIR कय तहत बिहार मा करीब 65 लाख नाँव हटाये गय, वहीं पश्चिम बंगाल मा करीब 91 लाख नाँव हटाये गय।
पश्चिम बंगाल मा हटाये गय 91 लाख नाँवन मा से, 27 लाख से ज्यादा लोग “तार्किक विसंगतियों” (logical discrepancies) कय सूची मा बने रहेन, अउर उ 23 अउर 29 अप्रैल का भए विधानसभा चुनाव मा वोट नाहीं डारि पाएन।
हालाँकि ‘डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र’ (DBT) मॉडल बिचौलियन अउर फर्जी लाभार्थीन का हटाय के वेलफेयर बाँटै मा होय वाली गड़बड़ियन का कम कीस है, मुला इ सिस्टम मा अभी भी बड़ी कमियाँ मौजूद हैं। जइसन कि आधार-बैंक जुड़ाव कय अधूरा होब, फर्जी अउर डुप्लीकेट लाभार्थी, फंड कय गलत इस्तेमाल अउर लिस्ट मा नाँव जोड़ै या हटावै मा होय वाली गलतियाँ। अइसा लागत है कि अब इ राज्य SIR-जाँचे भए डेटाबेस कय जरिये इन गड़बड़ियन का दूर करै कय कोशिश करत हैं।
कांग्रेस नेता अउर राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम बंगाल अउर बिहार कय इ कदम का “बहुतै आपत्तिजनक” बतायें हैं। इ कहत हुए कि इन कदम से गंभीर सवाल खड़े होइ गय हैं, चिदंबरम कहेन, “का नागरिकता चुनावी लिस्ट मा सामिल होय कय आधार है, या चुनावी लिस्ट मा सामिल होब नागरिकता कय आधार है? सुप्रीम कोर्ट का इ सवाल पर विचार करै कय चाही।”
बंगाल मा SIR कय दौरान लिस्ट से हटाये गय नाँवन खातिर कौनों कल्याणकारी योजना नाहीं
10 मई का काम-धाम सम्भाले कय बाद, बंगाल कय BJP सरकार ई साफ कइ दीस कि SIR (नागरिकता जाँच प्रक्रिया) कय दौरान वोटर लिस्ट से हटाये गय लोगन का—जेमा उ लोग भी सामिल हैं जिनकय अपील अभी ट्रिब्यूनल मा अटकी है—”फिलहाल” सरकारी योजनान कय फायदा नाहीं मिली। एमा ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ भी सामिल है, जउन BJP कय घोषणापत्र मा सामिल एक्कौ योजना है अउर जेकर मकसद तृणमूल कांग्रेस कय ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ कय जगह लेब है। ई रिपोर्ट ‘द टेलीग्राफ’ अखबार दीन है।
कोलकाता कय इ अखबार पश्चिम बंगाल कय महिला एवं बाल कल्याण अउर समाज कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल कय हवाले से कहेस, “हम 1 जून से मेहरारून खातिर ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ शुरू करबे। मेहरारून का हर महीना 3,000 रुपया मिली। मुला जिन लोगन कय जाँच अभी भी ट्रिब्यूनल द्वारा कीन जात है, उनका फिलहाल लाभार्थीन कय लिस्ट मा नाहीं सामिल कीन जाई।”
पॉल पत्रकारन से कहेन, “हम 1 जून से पहिले एक्कौ विश्लेषण करबे। जिनकय नाँव लिस्ट से काटि दीन गय हैं, अगर उनका अभी भी फायदा मिलत है, तौ उनका ई नाहीं मिलै कय चाही। जउन मनई मरि गवा है, ओका इ फायदा नाहीं मिलै कय चाही। जउन मनई इ देस कय नागरिक नाहीं है, ओका भी ई फायदा नाहीं मिलै कय चाही। ई खातिर हम इ विश्लेषण करबे। जिनकय नाँव लिस्ट से काटि दीन गय हैं, ओमा से केतने लोग अभी भी ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ कय फायदा लेत हैं, उनकर नाँव लिस्ट से हटाय दीन जइहैं।”
एक्कौ बड़े अधिकारी ‘द टेलीग्राफ’ का बतायें, “अगर ओमा से कौनों बाद मा फिर से चुनावी लिस्ट मा सामिल होइ जात है, तौ ओका लाभार्थीन कय लिस्ट मा सामिल कइ लीन जाई।”
पश्चिम बंगाल कय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मँगल कय कहे रहेन कि कौनों भी चलत भई कल्याणकारी योजना बंद नाहीं कीन जाई। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ अधिकारी कय हवाले से लिखेस, “सरकार कय सब सामाजिक कार्यक्रम—चाहे उ 30 साल पहिले शुरू भए होय या 10 साल पहिले—जारी रहिहैं। हालाँकि, अब ई सब योजना एक्कौ पारदर्शी प्रक्रिया कय तहत काम करिहैं। कौनों भी मरे मनई, गैर-कानूनी घुसपैठिये या गैर-भारतीय नागरिक का राज्य कय नागरिकन खातिर तय फायदा लेय कय इजाजत नाहीं दीन जाई।”
बंगाल मा SIR कय काम अल्पसंख्यक-बहुमत अउर प्रवासी वाले इलाकन मा बिवाद मा फँसि गवा, जहाँ ममता बनर्जी कय अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस आरोप लगायस कि एकर मकसद वोटरन का वोट डारै से रोकब रहा।