
हम मा से बहुतै लोगन के दिन क शुरुआत एक गरमा-गरम एस्प्रेसो या कैपेचीनो से होत है, लेकिन का आप जानत हन कि आपकी ई रोज़ाना क आदत आप का एक बहुत बड़की बीमारी से बचाय सकत है? जी हाँ, हालै मा सामने आवा एक शोध से ई पता चला है कि रोज़ाना दुइ से तीन कप कॉफी पिए से उमर बढ़ै के साथै डिमेंशिया क खतरा काफी हद तक कम होइ जात है।
कॉफी कइसे काम करत है?
शोध करै वालेन के हिसाब से, कॉफी मा मौजूद कैफीन हमार दिमाग क कोशिकावन का सक्रिय रखे मा बहुतै मददगार है। एतई नाहीं, ई अल्जाइमर से जुड़ी सूजन अउर दिमाग मा जमा होवै वाले हानिकारक प्लाक का भी कम करै मा मदद करत है। एकर मतलब ई है कि रोज़ाना कॉफी पिए क आदत आप का खाली ताजगी अउर ऊर्जा ही नाहीं देत, बल्कि आपके दिमाग क रक्षा भी करत है।
का कहत है 43 साल लम्बा शोध?
ई बात का साबित करै खातिर अमेरिका मा एक बहुत बड़ शोध कीन गा। ई शोध मा 1,31,821 नर्सन अउर सेहत कर्मिन का शामिल कीन गा। इन सब लोगन पर पूरे 43 सालन तक नजर रक्खी गयी। जब ई अध्ययन शुरू भवा, तब हिस्सा लेवे वालेन क उमर 40 साल के आस-पास रही। अध्ययन के दौरान लगभग 11,033 लोगन मा (यानी कुल लोगन क 8 प्रतिशत) डिमेंशिया क समस्या देखी गयी। हालांकि, शोध करै वालेन एक बहुतै दिलचस्प बात नोटिस कीन। जे लोग नियम से कैफीन वाली कॉफी या चाय क सेवन करत रहे, उनमा डिमेंशिया विकसित होवै क सम्भावना काफी कम रही। ई आदत क सबसे जादा फायदा 75 साल अउर उससे कम उमर के लोगन मा देखा गा।
हर चीज क जादापन बुरा होत है
वैज्ञानकिन इसके फायदन के साथ-साथ एक जरूरी सलाह भी दीन है। उनका कहब है कि ठीक-ठाक मात्रा मा कॉफी या चाय पीब ही फायदेमंद है। अगर आप ई सोच के बहुत जादा कॉफी पिए लागब कि एकरे से जादा फायदा होई, तौ ई गलत है। हद से जादा कॉफी पिए से एकर ई सुरक्षा वाला असर कम होवै लागत है।
हम मा से बहुतै लोगन के दिन क शुरुआत एक गरमा-गरम एस्प्रेसो या कैपेचीनो से होत है, लेकिन का आप जानत हन कि आपकी ई रोज़ाना क आदत आप का एक बहुत बड़की बीमारी से बचाय सकत है? जी हाँ, हालै मा सामने आवा एक शोध से ई पता चला है कि रोज़ाना दुइ से तीन कप कॉफी पिए से उमर बढ़ै के साथै डिमेंशिया क खतरा काफी हद तक कम होइ जात है।
कॉफी कइसे काम करत है?
शोध करै वालेन के हिसाब से, कॉफी मा मौजूद कैफीन हमार दिमाग क कोशिकावन का सक्रिय रखे मा बहुतै मददगार है। एतई नाहीं, ई अल्जाइमर से जुड़ी सूजन अउर दिमाग मा जमा होवै वाले हानिकारक प्लाक का भी कम करै मा मदद करत है। एकर मतलब ई है कि रोज़ाना कॉफी पिए क आदत आप का खाली ताजगी अउर ऊर्जा ही नाहीं देत, बल्कि आपके दिमाग क रक्षा भी करत है।
का कहत है 43 साल लम्बा शोध?
ई बात का साबित करै खातिर अमेरिका मा एक बहुत बड़ शोध कीन गा। ई शोध मा 1,31,821 नर्सन अउर सेहत कर्मिन का शामिल कीन गा। इन सब लोगन पर पूरे 43 सालन तक नजर रक्खी गयी। जब ई अध्ययन शुरू भवा, तब हिस्सा लेवे वालेन क उमर 40 साल के आस-पास रही। अध्ययन के दौरान लगभग 11,033 लोगन मा (यानी कुल लोगन क 8 प्रतिशत) डिमेंशिया क समस्या देखी गयी। हालांकि, शोध करै वालेन एक बहुतै दिलचस्प बात नोटिस कीन। जे लोग नियम से कैफीन वाली कॉफी या चाय क सेवन करत रहे, उनमा डिमेंशिया विकसित होवै क सम्भावना काफी कम रही। ई आदत क सबसे जादा फायदा 75 साल अउर उससे कम उमर के लोगन मा देखा गा।
हर चीज क जादापन बुरा होत है
वैज्ञानकिन इसके फायदन के साथ-साथ एक जरूरी सलाह भी दीन है। उनका कहब है कि ठीक-ठाक मात्रा मा कॉफी या चाय पीब ही फायदेमंद है। अगर आप ई सोच के बहुत जादा कॉफी पिए लागब कि एकरे से जादा फायदा होई, तौ ई गलत है। हद से जादा कॉफी पिए से एकर ई सुरक्षा वाला असर कम होवै लागत है।




