जीवनशैली

का पपीता के पत्तन क रस सचहूं मा डेंगुवा नीक कइ सकत हय?

जबै मानसून के मौसम आवत हय तौ डेंगुवा के मामला बहुतै तेजी से बढ़े लागत हैं। अइसन मा, बहुत मनई जल्दी नीक होय के आस मा घरेलू नुस्खन क सहारा लेत हैं, जेहमा पपीता के पत्तन क रस सबसे जादा मशहूर हय। मनई मानत हैं कि ई रस प्लेटलेट्स का तेजी से बढ़ावत हय अउर डेंगुवा का पूर तरह से ‘नीक’ कइ सकत हय, मुला का विज्ञानौ अइसने कहत हय? आवव, मेदांता गुरुग्राम मा इंटरनल मेडिसिन के वाइस चेयरमैन डॉ. सुशीला कटारिया से इही दावे क सच्चाई जानित जाय।

डेंगुवा खाली प्लेटलेट्स घटे वाली बेमारी नाय आय

डेंगुवा मच्छुअन से फैले वाला एकठु वायरल इन्फेक्शन आय, जौन हल्का बुखार से लइके जानलेवा बेमारी तक क रूप धइ सकत हय। अक्सरै मरीज अउर ओकर घर वाले आपन पूरा धियान खाली प्लेटलेट काउंट पर लगाय देत हैं, मुला सच तौ ई हय कि डेंगुवा खाली प्लेटलेट्स के बारे मा नाय हय। केतनो बार प्लेटलेट्स थिर (स्थिर) रहय पर भी मरीज का गंभीर स्वास्थ्य समस्या होइ सकत हय। सच पूछौ तौ, बेमारी के समय प्लेटलेट्स क गिरब अउर फेर से बढ़ब, ई बेमारी क एकठु कुदरती प्रक्रिया क हिस्सा हय। जादातर मरीज मन मा, बिना कौनो खास इलाज के भी 8 से 10 दिन के अंदर प्लेटलेट्स अपने आप ठीक होय लागत हैं। इहै वजह हय कि बराबर निगरानी अउर सही समय पर डॉक्टरी देखभाल सबते जादा जरूरी हय।

इलाज मा सबसे जरूरी का हय?

ई समझब बहुतै जरूरी हय कि कौनो भी घरेलू नुस्खा सही डॉक्टरी इलाज क जगह नाय लइ सकत। डेंगुवा के मरीजिन खातिर घर पर कीन जाय वाली देखभाल मा सबसे खास भूमिका शरीर मा पानी क कमी ना होय देब क होत हय। डेंगुवा क मुख्य इलाज लच्छणन का काबू मा राखब हय, जेहमा ई सब शामिल हय: भरपूर मात्रा मा तरल चीज (जैसे पानी, जूस) लेब। खूब आराम करब। बुखार का काबू मा राखब।

खतरा के इन लच्छणन पर नजर राखब: बार-बार उलटी आयब, पेट मा पीरा (दर्द) होब, खून बहब, सांस लेय मा तकलीफ या बहुत जादा कमजोरी महसूस होब। जउं समै रहत डॉक्टरी मदद मिलि जाय, तौ गंभीर मुसकिलन से बचा जाइ सकत हय अउर मरीज जल्दी चंगा होइ सकत हय।

डेंगुवा मा पपीता के पत्तन क रस पियै के खतरा

पपीता के पत्तन क रस बिना सोचे-समझे या बहुतै जादा मात्रा मा पियब नुकसानदेह भी होइ सकत हय। घर पर बनाय जाय वाले एहि रस क कौनो तय मात्रा या पैमाना नाय होत हय।

पेट क दिक्कत: एका जादा पियै से कुछ मनई मा जी मिचलायब, पेट मा जलन या एलर्जी जइसन समस्या होइ सकत हय।

गैस्ट्राइटिस क डर: डेंगुवा के बहुतै मरीजिन का बेमारी के नाते पहिले से ही पेट मा जलन क सिकायत रहत हय, अउर पपीता क गाढ़ा रस इन लच्छणन का अउर बिगाड़ सकत हय।

खाली पपीता के रस के भरोसे बइठिके अपने आप इलाज करब अउर अस्पताल जाय मा देर करब बहुतै जोखिम भरा होइ सकत हय। पपीता के पत्तन के रस का जादा से जादा एक ‘सपोर्टिव सप्लीमेंट’ माना जाइ सकत हय, न कि डेंगुवा क ‘इलाज’। वैज्ञानिक इही बात पर अबहिन भी शोध (रिसर्च) कर रहे हैं। फिलहाल, सही समय पर बेमारी क पहचान, पर्याप्त मात्रा मा पानी या तरल चीज पीब, बराबर निगरानी अउर डॉक्टर की देखरेख क कौनो विकल्प नाय हय। बिना प्रमाणित नुस्खन पर पूरी तरह से निर्भर रहै के बजाय, हमेशा सही स्वास्थ्य देखभाल अउर गंभीर लच्छणन से बचाव पर ही धियान देय का चाही।

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