धर्म/अध्यात्म

अधिक पूर्णिमा कहलात है ‘सर्व सिद्धिदायिनी’

अधिक मास मा परइ वाली पूर्णिमा का ‘अधिक पूर्णिमा’ कहा जात है। हिंदू मान्‍यता के अनुसार, इ पूर्णिमा आम पूर्णिमा से कई गुना जादे शक्तिशाली अउर फलदायी मानी जात है। एकर मुख्य कारण इ है कि अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास खुद भगवान विष्णु का समर्पित होत है। हिंदू शास्त्र के अनुसार, इ दौरान कीन्ह गय व्रत, दान अउर पूजा का पुण्य कई गुना जादे मिलत है।

का है अधिक पूर्णिमा?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सौर वर्ष अउर चंद्र वर्ष के बीच 11 दिन का अंतर आवत है। इ संतुलन बनाय रखै खातिर हर तीसरे साल (लगभग ढाई से तीन साल के अंतराल पर) एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जात है। इही का ‘अधिक मास’, ‘मलमास’ या ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जात है। इ बहुत पावन महीना मा परइ वाली पूर्णिमा का ही ‘अधिक पूर्णिमा’ कहा जात है, जवन कई साल के इंतजार के बाद आवत है।

भगवान विष्णु से है सीधा संबंध

श्रीविष्णु सहस्रनाम के अनुसार, भगवान विष्णु के एक दिव्य नाम ‘पुरुषोत्तम’ भी है, जवनकर मतलब है—’पुरुषन मा उत्तम’। शास्त्रन के अनुसार, इ अतिरिक्त मास के स्वामी खुद भगवान विष्णु हैं, इहिकै नाते इसे पुरुषोत्तम मास कहा जात है। चूँकि इ पूर्णिमा खुद श्रीहरि के प्रिय महीना मा आवत है, इहिकै नाते इ दिन कीन्ह गय पूजा से भगवान विष्णु के साथ-साथ साधक का माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलत है। इहे कारण है कि इसे सामान्य पूर्णिमा से कहीं ज्यादा प्रभावशाली मानल गय है।

काहे कहलात है ‘सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा’?

स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण अउर भविष्यपुराण जइसन धर्म ग्रंथन मा अधिक मास की पूर्णिमा का ‘सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा’ के रूप मा देखा गय है। आम पूर्णिमा पर जहवां चंद्र देव अउर लक्ष्मी जी की पूजा होत है, ओहवां अधिक पूर्णिमा पर नारायण अउर लक्ष्मी जी की संयुक्त पूजा से असीम कृपा बरसत है। इ पूर्णिमा आपके जीवन के सब कष्टन का दूर कइके सिद्धियन के दुआर खोलत है।

मिलत हैं इ लाभ

इतने ही नाहीं, विभिन्न पुराणन के अनुसार, इ पावन तिथि पर दान, जप, व्रत अउर कथा सुनै से 100 यज्ञन के बराबर पुण्य फल मिलत है। इ दिन भगवान विष्णु की खास आराधना करै से जानत-अजानत मा भय सब पाप मिट जात हैं अउर जातक मोक्ष की ओर बढ़त है। इ दिन कीन्ह गय कामन का फल कबो नष्ट नाहीं होत, इहिकै नाते अधिक पूर्णिमा का अक्षय पुण्य देवै वाली तिथि कहा जात है।

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