
ई-वे बिल में बड़ा बदलाव: 15 जून से कारोबरियन क परेशानी बढ़ सकत है।
आगामी 15 जून से वस्तु अउर सेवा कर (जी.एस.टी.) के अंतर्गत माल के आवागमन से जुड़ल नियमन में बड़ा बदलाव होवे जा रहा है। इन नवा नियमन के कारण व्यापारी वर्ग में डर अउर चिंता के माहौल बनै लाग है। ई चिंता के मुख्य कारण ई-वे बिल में व्यापारी से संबंधित मांगल जई वाली विस्तृत जानकारी है, जवने से आने वाले दिनन में कारोबरियन के परेशानी बढ़ सकत है।
ई संबंध में पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल यूनिट सुनाम के प्रधान पवन गुज्जरां अउर सचिव चंद्र प्रकाश सिंगला संयुक्त रूप से अपना विचार साझा करेन। व्यापारिक नेता लोग स्पष्ट करेन कि ई-वे बिल जी.एस.टी. के तहत एक प्रकार के डिजिटल परमिट होथ है। ई परमिट 50 हजार रुपैया से ज्यादा मूल्य के माल के एक जगह से दूसरा जगह भेजे खातिर अनिवार्य है। अगर कउनो माल बिना ई-वे बिल के ले जाइत है, त संबंधित अधिकारी ओका रास्ता में रोक सकत हैं। अधिकारी लोगन के पास न केवल माल के जब्त करे के अधिकार होइ, बल्किन ओ मन भारी जुर्माना लगावे के कानूनी कार्यवाही भी कर सकत हैं।
नवा नियमन के अनुसार, अब ई-वे बिल में माल खरीदे वाले व्यक्ति के विवरण के साथ-साथ ओ गोदाम या व्यावसायिक स्थान के भी पूरा अउर स्पष्ट ब्यौरा देवे के होइ, जहवा माल पहुँचावा जाइत है। अगर संबंधित व्यापारी जी.एस.टी. के तहत पंजीकृत नहीं है, त बिल में ‘अनरजिस्टर्ड पर्सन’ लिखे के अनिवार्य होइ। ई कड़ा कानून के लागू करे के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य ई-वे बिल में होवे वाली गड़बड़ी अउर ओकर दुरुपयोग के रोके के है।



