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परधानमंत्री फसल बीमा योजना, भारतीय खेती-किसानी क सुरक्षा क मजबूत आधार

लखनऊ: 01 जून, 2026

परधानमंत्री फसल बीमा योजना मानसून क जुआ कहाय वाली भारतीय खेती-किसानी का सुरक्षा देय मा एक क्रांतिकारी भूमिका निभावत अहै। भारतीय खेती-किसानी क सुभाव सदा से मानसून अउर प्राकृतिक आपदा क बरे संबेदनसील रहा अहै। मौसम बदलाव के एहि दौर मा बिना समइ क बरखा, भारी ओला गिरब अउर सूखा जइसन परिस्थिति किसनवन बरे गहीर आर्थिक संकट पैदा कइ देति हैं। एक किसान अपने थोरिक साधनन अउर कठिन मेहनत से फसल तइयार करत है, मुला कउनो एक प्राकृतिक आफत क कारन ओकर पूरी मेहनत माटी मा मिल जात है। एही जोखिम क प्रबंध करे बरे एक मजबूत ढांचा क जरूरत सदा से महसूस कीन गयी, जाहें से किसनवन का करजा क जाल से बचायके ओन्है आर्थिक सुरक्षा दीन जाय सकै अउर खेती का एक फायदा वाला ब्यवसाय क रूप मा अस्थापित कीन जाय सकै।

एही संकट क पक्का समाधान बरे परधानमंत्री फसल बीमा योजना क बात सोची गयी, जउन भारत सरकार क दिसा-निरदेस के मुताबिक उत्तर प्रदेश के सबइ जिलन मा ग्राम पंचायत स्तर पर नीक ढंग से चलावा जात अहै। एहि योजना क मुख्य उदेस प्राकृतिक आपदा, बेमारी अउर कीड़ा-मकोड़ा से होय वाली फसल क नोकसान क दसा मा बीमा कराये किसनवन का बीमा क जरिया से आर्थिक मदद देवब अहै। अपनी बिकास जुग क बीच मा एहि योजना पहिले क फसल बीमा माडलन क कमियन का दूर करत भवा एक ढेर साफ-सुथरा अउर किसान-भलाई वाला ढांचा तइयार कीस अहै। एहि क जरिया से ई पक्का कीन गवा अहै कि खराब दसा मा भी किसान क कमाई क स्तर बना रहै अउर ऊ खेती करत रहै बरे उत्साहित होय सकै.

परधानमंत्री फसल बीमा योजना क बनावट अउर काम करइ क तरीका का किसनवन क सुभीता का धियान मा रखिके तइयार कीन गवा अहै। एहि के तहत खरीफ क 10 फसलन अउर रबी क 09 फसलन का सामिल कीन गवा अहै। खरीफ फसलन बरे किसानन क तरफ से दइ जाय वाली प्रीमियम क दर का बीमित रकम क सिरिफ 2 परतिसत अउर रबी फसलन बरे 1.5 परतिसत तक सीमित रखा गवा अहै, जबिक सालाना नगदी फसलन बरे ई दर जादे से जादे 5 परतिसत तय अहै। बाकी बची प्रीमियम क रकम का केंद्र अउर राज्य सरकार आधा-आधा बाटिके भरत अहैं। पइसा क इंतजाम बरे राज्य सरकार एस्क्रो खाता अउर केंद्र सरकार एआईसी, नई दिल्ली के जरिया धन देत अहै। प्रदेस मा लागू माडल 80-110 के मुताबिक, कुल प्रीमियम क तुलना मा 110 परतिसत तक क नोकसान क भरपाई बीमा कंपनी द्वारा दइ जात अहै अउर ओसे जादे क रकम क भुगतान राज्य सरकार खुदै करत अहै।

प्रदेस क मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के सुघर अगुआइ मा एहि योजना क सफलता अउर जमीनी असर एकरे बढ़त आंकड़न से साफ-साफ देखाय पड़त अहै। उत्तर प्रदेश मा एहि योजना से जुड़े वाले किसनवन क गिनती मा लगातार बढ़ोत्तरी देखी गयी अहै। वित्तीय वर्ष 2023-24 मा जहाँ 30.40 लाख किसान योजना क हिस्सा बने रहेन, उहइ वर्ष 2024-25 मा ई गिनती 31.18 लाख अउर वर्ष 2025-26 के नये आंकड़न के मुताबिक 39.52 लाख तक पहुँच गयी अहै। आर्थिक तरक्की क मामला मा भी साल 2025-26 बरे 45,000 लाख रुपिया क लक्ष्य रखा गवा अहै। नोकसान क भरपाई बांटै के जमीनी स्तर पर भी एकर नतीजा बहुतै सुघर रहा अहै, जहाँ साल 2023-24 मा 8.20 लाख किसनवन का 492.86 करोड़ रुपिया क नोकसान-भरपाई क रकम दीन गयी रही, उहइ साल 2025-26 मा अब तक 5.73 लाख किसनवन का 672.52 करोड़ रुपिया क भुगतान सोझे ओन्हारे खातन मा भेजा जा चुका अहै।

नीक से चलावा जाय के बादौ एहि योजना क सोझवा कुछ ब्यवहारिक चुनौतियां भी खड़ी अहैं। फसल क नोकसान नापे बरे करे जाय वाले उपाइन मा कबहूँ-कबहूँ तकनीकी ढील (देरी) होय जात है, जेसे दावन के निपटारा मा बखत लागत है। एकरे अलावा, दूर-दराज के इलाकन मा कुछ किसनवन के बीच नांव लिखवावै क तरीका अउर आखिरी तारीख का लेके जानकारी क कमी का दूर कीन गवा अहै। बटइदार किसनवन का मुख्यधारा मा सामिल करब अउर बीमा कंपनियन के स्तर पर दावन क साफ-सुथरा निपटारा करावे मा सरकार पूरा मदद करत अहै। एहि सबइ काम करइ मा आवै वाली बाधान का दूर करत भवा योजना क पूरी सफलता बरे ई बहुत जरूरी अहै, जेसे हरेक हकदार किसान का ओकर हक बखत पर दीन जाइ रहा अहै।

एहि योजना का खेती क सुरक्षा क एक मजबूत माडल बनाया गवा अहै। तकनीक क इस्तमाल, जइसन सैटेलाइट फोटो अउर ड्रोन तकनीक, नोकसान नापै क तरीका का ढेर सही अउर तेज बनावत अहै। ’’क्लेम सेटलमेंट’’ क तरीका का पूरी तरह से डिजिटल अउर साफ-सुथरा बनायके किसनवन क बिस्वास का अउर मजबूत कीन जाय सकत अहै। ई योजना सिरिफ एक बीमा क कार्यक्रम ना रहिके भारतीय खेती-किसानी बरे एक सुरक्षा कबच क रूप मा काम करति अहै। सरकार क तेजी अउर तकनीक क नीक मेलजोल से परधानमंत्री फसल बीमा योजना न सिरिफ किसनवन क जोखिम का कम करति अहै, बल्कि गांव क अरथब्यवस्था क खुशहाली क डगर भी साफ करति अहै।

-डॉ. मनोज चंद्रा, प्रभारी अंग्रेजी
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सूचना अउर जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

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वन विभाग

योजना के मुताबिक पेड़ लगावब अउर सरकारी नीतियन से अंबेडकर नगर मा जंगल क दायरा बढ़ा

लखनऊ: 01 जून, 2026

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा जारी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के आंकड़े उत्तर प्रदेश के जनपद अंबेडकर नगर बरे एक बहुतै बढ़िया पर्यावरण क संदेस लेके आये अहैं। नये अंदाज़ा के मुताबिक एहि जिला मा जंगल के दायरा मा लगभग 3.39 वर्ग किलोमीटर क बढ़िया बढ़ोत्तरी दर्ज कीन गयी अहै। ई फैलाव न सिरिफ कुदरती संतुलन क नजरि से एक बड़ी सफलता अहै, बल्कि ई प्रदेस सरकार अउर जिला प्रसासन क तरफ से पर्यावरण बचाव बरे अपनायी गयी लम्बी अउर योजनाबद्ध नीतियन क जमीनी असर का भी साफ देखावत अहै।

आंकड़न क जांच-परख से ई जरूरी बात साम्हने आवत है कि जंगल के दायरा मा भयी ई बढ़ोत्तरी खास कइके ‘ओपन फारेस्ट‘ यानी खुले जंगल क श्रेणी मा दर्ज कीन गयी अहै। एहि श्रेणी क फैलाव ई साबित करत है कि ई बढ़ोत्तरी जंगलन क अपने आप कुदरती रुप से बढ़ै के बजाय मनइन अउर प्रसासन के स्तर पर नीक योजना बनायके पेड़ लगावब, बैज्ञानिक तरीका से जमीन क देखरेख अउर लगातार बचाव क कामन क सीधा नतीजा अहै। ओपन फारेस्ट श्रेणी उन इलाकन का देखावत है जहाँ पेड़न क दूरी थोरिक कम होत है, मुला जब लगातार कोसिसन से उहाँ नीक जइसे हरियाली क बिकास होइ जात है, तउ वे इलाका सैटेलाइट क गिनती मा जंगल क दायरा मा दर्ज होइ जात हैं। अंबेडकर नगर मा इहइ बढ़िया काम जमीनी स्तर पर होत देखाय पड़त है, जउन आवै वाले बखत बरे एक सुभ संदेस अहै।

एहि सफलता के पीछे प्रदेस सरकार क तरफ से चलाये गये बड़े स्तर के पेड़ लगावब अभियान क एक बहुतै जरूरी भूमिका रही अहै। मिलै वाले सरकारी कागजात के

अनुसार वित्तीय बरिस 2017-18 से लयके साल 2025-26 के समय के बीच मा जिला प्रसासन के देख-रेख मा वन विभाग अउर दूसर विकास से जुरे विभागन के आपसी तालमेल से जिला मा बड़े पैमाना पर पेड़-पौधा लगावैक लक्ष्यन का धरती पर उतारा गा।

एन्हन सालन मा प्रसासनिक सक्रियता के हाल इ रहा कि खाली हर साल तय कीन गा पेड़-पौधा लगावैक लक्ष्यन का सफलता के साथ पूरा नाहीं कीन गा, बल्कि केउ मौका पर लक्ष्य सेउ ढेर काम करके देखाय दीन गा।

जउं कुल मिलाइके देखा जाय तउ इ पूरा समय के बीच मा जिला के भित्तर लगभग 1.07 करोड़ पेड़-पौधा लगावैक लक्ष्य के सोझा 1.08 करोड़ से ढेर पौधवन का लगावब अउर ओन्हन के बढ़ती पक्का कीन गा।

इ आंकड़ा गवाह हैं कि सरकारी योजना अउर पेड़ लगावैक कार्यक्रम खाली कागजी रस्म या फाइलन तक सीमित नाहीं रहा, बल्कि सच मा धरती पर देखात रहा।

इ पूरा अभियान का सफल बनावै खातिर सरकारी तंत्र के साथे-साथे ग्राम पंचायतन, स्थानीय निकाइन, पढ़ाई-लिखाई वाले संस्थानन अउर आम मनइन का भी मन लगाइके जोरा गा, जेहसे इ कार्यक्रम एक बड़हन जनांदोलन के रूप लय लिहिस।

इ बड़हन अभियान के तहत जमीन के मिलब अउर ओकर नीक उपयोग का लयके एक बहुतै व्यावहारिक उपाय अपनावा गा। पेड़ लगावैक खातिर कउनो एक खास इलाका पर भरोसा करै के बजाय तरह-तरह के जमीनन का इ अभियान के हिस्सा बनावा गा।

एकरे भित्तर ग्राम पंचायतन के साझी जमीन, राजस्व विभाग के खाली जमीन अउर खास सड़कन तथा नहरिन के पटरी के किनारे के खाली जमीन के उपयोग कीन गा।

एके साथे स्कूलन अउर सरकारी दफ्तरन के अहाता, अउर समाज के परती अउर बेकार परे जमीन के टुकड़न का चुनके घने पेड़ लगावा गा। एकरे अलावा प्रदेश सरकार के एक अउर बहुतै बड़हन नीति ‘एग्रो फॉरेस्ट्री’ यानी खेती-किसानी के साथे पेड़ लगावैक बढ़ावा दै के कोसिसन ने इ अभियान का गांव के आर्थिक हालत अउर किसान परिवारन से सीधे जोड़ दिहिस।

किसनवन का पुरनिया खेती-बारी के साथे-साथे आपन खुद के जमीन अउर खेतन के मेड़ पर रुपिया-पैसा देय वाले पेड़न का लगावै खातिर बड़े पैमाना पर उकसावा अउर बढ़ावा दीन गा।

इ तरीका से खाली किसनवन के कमाई के साधनन मा बदलाव नाहीं आवा अउर ओन्हन के माली हालत मजबूत भई, बल्कि निजी क्षेत्र के सामिल होय से देहाती इलाकन मा हरियाली के घेरा भी तेजी से फैल गा।

खेती-किसानी के साथे पेड़ लगावैक इ बड़हन फैलाव ही खास तौर से ओपन फॉरेस्ट श्रेणी के ग्राफ का ऊपर उठावै मा सबसे बड़ योगदान दिहिस है, काहे से खेतन के मेड़न मा अउर निजी अहातन मा लगाए गए पेड़ समय के साथे बड़े होइके सैटेलाइट वाले पैमाना का पूरा करै मा सफल रहे, जेहसे हरियाली पट्टी के बिकास असान होइ गा।

पेड़ लगावैक अभियान के साथे-साथे लगाए गए पौधवन के जियत रहै के दर का बेहतर बनावै खातिर जिला प्रसासन डाहर से सुरक्षा अउर तकनीकी निगरानी के एक कई मंजिलन वाली प्रणाली लागू कीन गयी।

अक्सर इ देखा जात है कि पेड़ लगावै के बाद पौधवन के देख-रेख के कमी मा मनमुताबिक फल नाहीं मिलत, मुदा अंबेडकर नगर मा इ कमी का दूर करै बदे खास काम के योजना बनाई गयी।

पौधा लगावै के बाद नीक तरीका से गढ़ा खनाब, रोज-रोज पानी देब, गोबर के खाद अउर खुराक के नीक बंदोबस्त, कीड़ा-मकोड़ा से बचाउ अउर छुट्टा जनावरन तथा मनइन के रोक-टोक से बचावै खातिर घेरा बनावै जइसन कामन का पहिला आसरा दीन गा, जेहसे पौधा समय से पहिले मरे से बच गे अउर ओन्हन के बाढ़ तेजी से भई।

एके साथे लगाए गए पौधवन के असली हालत के बराबर जांच अउर जवाबदेही तय करै खातिर नया जमाना के तकनीकन के बड़े पैमाना पर सहारा लीन गा।

विभाग के स्तर पर हर एक पेड़ लगावैक जगह के जियो टैगिंग कीन गयी, जेहसे ओन्हन के असली जगही हालत का डिजिटल नक्सा पर देखा जा सके अउर काम मा सफाई बनी रहै।

फील्ड मॉनिटरिंग अउर समय-समय पर कीन जाय वाले सर्वे के जरिया तकनीकी निगरानी प्रणाली का बहुतै मजबूत बनावा गा।

जब इ सब सोच-समझ के कीन गए कोसिसन के नतीजा मा पौधवन के कैनोपी कवर तय दुनियाई सीमा यानी दस फीसदी या ओसे ढेर तक पहुंच गा, तब सैटेलाइट वाले देस-स्तर के गिनती मा एन्हन का जंगल के हिस्सा के रूप मा सामिल कीन गा।

हरियाली के घेरा मा दर्ज कीन गयी इ लगातार बढ़ती के नीक असर कई तरह के हैं जौन स्थानीय पर्यावरण का लंबे समय तक सुरक्षा देय रहे हैं।

वैज्ञानिक नजरिया से देखा जाय तउ घने होत पेड़न के कारन स्थानीय स्तर पर छोटकी जलवायु मा बड़ा नीक सुधार देखा जात है, जौन बढ़त गरमी का रोके मा अउर हवा मा नमी के तालमेल बनाए रक्खै मा मदद करत है।

एके साथे इ पेड़न के बाढ़ से कार्बन सोखै के ताकत मजबूत होत है, जौन पूरी दुनिया के मौसम बदलाव के स्थानीय असरन का कम करै डाहर एक बड़ असरदार कदम है।

बड़े पैमाना पर कीन गयी इ हरियाली से माटी बचावै का बड़ा भारी बल मिला है, जेहसे बरसात के दिनन मा होय वाले माटी के कटान मा भारी कमी आई है अउर जमीन के असली उपजाऊपन सुरक्षित बना है।

पानी के सोतन का बढ़ावै अउर जमीन के पानी रिचार्ज करै के कुदरती तरीका मा भी इ पेड़न के जरि एक जरूरी काम कर रही हैं, जेहसे देहाती इलाकन मा पानी के स्तर का थामे रक्खै मा मदद मिलत है।

जीव-जंतु के रहन-सहन के तंत्र खातिर भी इ हरियाली के फैलाव वरदान साबित भवा है काहे से नवा तैयार होत जंगलन मा जीव-जंतुअन खातिर सुरक्षित कुदरती घर मिल रहे हैं।

अंबेडकर नगर जिला के जंगल घेरा मा दर्ज भई इ तरक्की कउनो एक तुरंतै के कोसिस के फल नाहीं है, बल्कि इ उत्तर प्रदेश सरकार के दूर की सोच वाली नीतिन, प्रसासनिक लगन, नए जमाना के तकनीकी देख-रेख अउर जनता के आपसी तालमेल के एक बहुतै नीक नमूना है, जौन आवै वाले समय के बिकास के डगर साफ़ करत है।

आजु के हाल मा जहवां कल-कारखानन अउर सहर बसावै के दबाव के कारन पर्यावरण के सोझा मुसीबत बढ़ रही हैं, उहवां इ तरकीब के सफलता लगातार बिकास के लक्ष्यन का पावै डाहर एक मजबूत नींव रखत है।

इ नीक बदलाव का लगातार बनाए रक्खै अउर आवै वाले समय के पर्यावरण सुरक्षा पक्का करै खातिर प्रदेश सरकार के भलाई वाली योजना के तहत इ अभियानन का लगातार बढ़ावा दीन जा रहा है।

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जनपद- अंबेडकर नगर

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