
रक्षा विभाग के लोगन सोमवार का बताइन कि महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार द्वीप समूह परियोजना न सिर्फ भारत के रणनीतिक समुद्री और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरेगी, बल्कि ई पर्यावरण के बचाव और आदिवासी भाइयन के सुरक्षा खातिर भी बहुत जरूरी साबित होई। लोगन के मुताबिक, ई परियोजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता और संचार के साधन के बहुत करीब होवे के कारण भारत के काफी फायदा पहुँचाई। ई परियोजना से विदेशी बंदरगाहों पर हमारी निर्भरता कम होई और भारत के रक्षा बल अउर भी मजबूत होइहें।
उन्होने बतावा कि भारत सरकार चार गो परियोजना के जरिए ग्रेट निकोबार के विकास के खाका तैयार कइले बा। एमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP), संयुक्त इस्तेमाल वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा अउर नौसेना के अड्डा, टाउनशिप अउर एकठो बिजली संयंत्र शामिल बा। ई परियोजना रणनीतिक हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण बा काहे कि ई ‘सिक्स डिग्री चैनल’ से बस 40 किलोमीटर के दूरी पर बा अउर अदन की खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य तक जाए वाला व्यापारिक रास्ता पर स्थित बा।
दुनिया के दुई-तिहाई तेल अउर आधा कंटेनर यातायात इहे रास्ता से हो के गुजरेला। हाल के सालन में हिंद महासागर में दुसरन देशन के बढ़ती दखल, हथियन की तस्करी, नशाखोरी अउर अवैध घुसपैठ के देखत ई परियोजना बहुत जरूरी बा। ई प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में भारत के ताकत बढ़ावे के साथ ही ‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’ अउर आपदा के समय सबसे पहिले मदद करे वाला देश के रूप में भारत के नाम अउर ऊंच करी।
रक्षा विभाग के लोगन आगे बताइन कि इससे अवैध समुद्री गतिविधि रोके में पुलिस अउर सेना के मजबूती मिली। जइसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सागर’ (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) सिद्धांत में कहले रहे। भारत के तटीय इलाका, अंडमान-निकोबार अउर मुख्य समुद्री रास्तान पर नजर रखे खातिर अब तगड़ी निगरानी बहुत जरूरी बा।
रक्षा सूत्रन ने साफ कहल कि ई परियोजना भारत के अपने क्षेत्र के पास मौजूदगी बढ़ावे, सामान अउर रसद (लॉजिस्टिक्स) के जल्दी पहुँचावे अउर निगरानी करे के क्षमता देई। अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, जवन मलक्का जलडमरूमध्य से बस 40 समुद्री मील दूर बा, भारत के व्यापारिक महत्वाकांक्षा के नई उड़ान देई।
रणनीतिक अउर आर्थिक फायदा के सोचत, पिछला नवंबर में मंत्रिमंडल नौसेना के कंट्रोल में नया हवाई अड्डा बनावे के मंजूरी दिहिस। ई हवाई अड्डा भारत के समुद्री निगरानी के ताकत के अइसन बढ़ाई जवन पुराना ढांचा के बढ़ावे से संभव ना रहा।
ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनावे खातिर कैम्पबेल खाड़ी में INS बाज़ समेत पांच जगहन के जांच भइल। अंत में गलाथिया खाड़ी के चुनल गइल। INS बाज़ के बढ़ावे में कुछ दिक्कत रही, जइसे कि उहाँ के उत्तर में 80 मीटर से ऊंची पहाड़ी बा, जवने के काटे में अउर बड़े जहाज के आवाजाही में बहुत समस्या आवत। मौजूदा रनवे भी छोट बा अउर कोड 4 रनवे के मानक के हिसाब से ना बा। एहसे उहाँ विस्तार के संभावना कम रही, जवने से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनावे में दिक्कत आवत।