
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिला में चलत आतंकवाद-रोधी अभियान के बीच भारतीय सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी आपन कर्तव्य निभावत हुए सर्वोच्च बलिदान दइ दिहन। कठिन पहाड़ी इलाका में आतंकवादियन क तलास के दौरान भयल इ हादसा पूरा देस क गम में डुबो दिहिस। सेना, प्रशासन, नेता अउर आम नागरिक भावभीनी श्रद्धांजलि देत उनकर शहादत क राष्ट्र सेवा क बेजोड़ उदाहरण बतावा है।
हम आपक बताइ दीं कि लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी राजौरी जिला के दोरीमल गंभीर मुगलान इलाका में चलत “ऑपरेशन शेरूवाली” क हिस्सा रहें। इ अभियान 17 दिन से लगातार चलत है। सेना अउर अर्धसैनिक बल घना जंगल अउर पहाड़ी इलाका में छुपल दुई से तीन पाकिस्तानी आतंकवादियन क खोज करत हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक इनमे एक टॉप कमांडर भी सामिल है, जवने क कूट नाम “फौजी” बतावा जात है।
शनिवार के संझिया अभियान के दौरान लेफ्टिनेंट गोस्वामी आपन टुकड़ी क अगुवाई करत रहें। ऊ एक संकरी अउर खतरनाक पहाड़ी धार से गुजरत रहें, तभी अचानक उनकर संतुलन बिगड़ि गया अउर ऊ गहरी खाई में गिर गइलन। साथ मौजूद जवान तुरंत बचाव अभियान चलाइके उनक बाहर निकालिन, लेकिन गंभीर चोट लागे के कारण इलाज के दौरान ऊ शहीद हो गइलन। जवन इलाका में इ अभियान चलत है, उहां ऊँची चट्टान, घना जंगल, खराब मौसम अउर फिसलन भरी ढलान सुरक्षा बल खातिर हमेशा चुनौती बनी रहत हैं।
भारतीय सेना के व्हाइट नाइट कोर इ दुखद घटना पर गहरा शोक जतइले है। कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पी.के. मिश्रा अउर सब अधिकारी अउर जवान लेफ्टिनेंट गोस्वामी क श्रद्धांजलि देत कहिन कि उनकर कर्तव्यनिष्ठा, साहस अउर राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण हमेशा सैनिकन खातिर प्रेरणा बना रही। सेना कहिस कि कठिन परिस्थिति में ड्यूटी निभावत ऊ सर्वोच्च बलिदान दइ दिहन।
रिववार क जम्मू वायुसेना स्टेशन पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि सभा भई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा अउर पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात समेत सेना, पुलिस अउर प्रशासन के बड़े अधिकारी फूल-माला चढ़ाइके दिवंगत अधिकारी क आखिरी सलामी दिहन। एकरे बाद उनकर पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार खातिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित उनकर पैतृक गांव पांडे खोला भेजा गवा।
अल्मोड़ा में भी शहीद अधिकारी क पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। सेना के हेलीकाप्टर से उनकर पार्थिव शरीर अल्मोड़ा पहुँचे, जहां प्रशासनिक अधिकारी, सेना के जवान, जनप्रतिनिधि अउर सैकड़ों गाँव वाले नम आंखिन से श्रद्धांजलि दिहन। विश्वनाथ घाट पर सैन्य परंपरा के अनुसार शस्त्र झुकाइक अउर गार्ड ऑफ आनर दइके अंतिम संस्कार भवा। इ दौरान पूरा इलाका गमगीन रहा।
हम आपक बताइ दीं कि लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी सिरिफ पच्चीस बरिस के रहें। कम उमिर में ही ऊ सेना में अधिकारी बनके देस सेवा क आपन सपना पूरा कइ रहे। उनकर पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी प्रशासनिक अधिकारी हैं, जबकि महतारी सरस्वती देवी शिक्षिका हैं। उनकर बड़ भाई भी सरकारी नौकरी में हैं। अइसन खबर भी है कि पदोन्नति (प्रमोशन) से दो दिन पहले ही उनका निधन भवा है।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह कहिन कि इतनी कम उमिर में देस रक्षा खातिर दिहल गा उनकर बलिदान हमेशा याद राखि जइहै अउर युवा पीढ़ी क प्रेरित करत रही। वहीं जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा अउर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई नेता उनकर शहादत क राष्ट्रभक्ति, साहस अउर कर्तव्यनिष्ठा क प्रतीक बताइन।
राजौरी के दुर्गम जंगलन में आतंकवादियन के खिलाफ चलत अभियान अभी जारी है। सुरक्षा बल इलाका में घेराबंदी, तलास अभियान, घात अउर आधुनिक तकनीक से आतंकवादियन क खोज करत हैं। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी क शहादत इ अभियान क अउर संवेदनशील बनाइ दिहिस है, लेकिन साथ ही इ देस के उ जवानन के अदम्य साहस क भी याद दिआवत है, जवन हर स्थिति में देस क सुरक्षा खातिर आपन जान दांव पर लगाइ देत हैं।
ऑपरेशन शेरुवाली से जुड़ल ताजा अपडेट इ भी है कि राजौरी अउर पुंछ के पहाड़ी इलाका में आतंक के खिलाफ चलत सबसे लम्बी अउर कठिन घेराबंदी अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचत दिखात है। घना जंगल, दुर्गम पहाड़ी अउर नियंत्रण रेखा से सटल संवेदनशील इलाका इस समय सुरक्षा बल के घेरा में हैं। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस अउर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के संयुक्त टीम लगातार संदिग्ध आतंकवादियन क तलाश में जंगल-जंगल छानबीन करत है। सुरक्षा बल आधुनिक निगरानी तंत्र अउर लगातार दबाव बनाइक आतंकवादियन के हर चाल पर नजर राखले हैं। सूत्रन के मुताबिक सुरक्षा एजेंसी इलाका में आतंकवादियन क आवन-जावन रोके खातिर हर संसाधन क इस्तेमाल करत हैं। पूरे इलाका में सुरक्षा क घेरा इतना मजबूत कइ दिहल गवा है कि बिना जाँच कवनो क भी संवेदनशील इलाका में जाये क इजाजत नहीं है।