
लोगन मां इ आम धारणा बा कि प्रीडायबिटीज जैसी स्थिति मां एग फ्रीजिंग या आईवीएफ का विकल्प नाहीं चुना जा सकता, जबकि सच्चाई एकर एकदम उलट बा। अउर ऐसा कोई कारण नाहीं जो इ साबित करि सकै कि एक 30 साल की प्री-डायबिटिक हिस्ट्री वाली महिला एग फ्रीजिंग या आईवीएफ नाहीं करा सकती। हमनका इ समझै की जरूरत बा कि प्रीडायबिटीज गर्भधारण कै इन तौरन के लिए कोई बाधा नाहीं अहै। हालांकि, कोई महिला अगर ऐसा करै चाहति बा तौ एकर लिए सेहत से जुड़ी सामान्य जांच, ब्लड ग्लूकोज, ओवेरियन रिजर्व अउर प्रजनन से जुड़ी प्राथमिकताओं की जांच करवावब जरूरी अहै।
30 की उम्र मां हाई क्वालिटी एग्स फ्रीजिंग के लिए अच्छा अवसर 30 की उम्र मां एग की क्वालिटी अउर ओवेरियन रिजर्व बेहतर होत बा, जो एग्स फ्रीजिंग अउर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए एक अच्छा मौका होइ सकत बा। बता दीं कि एग फ्रीजिंग एक ऐसा तरीका अहै जिहमां एक महिला अपने एग्स फ्रीज कर भविष्य मां इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रख सकती बा। वहीं, आईवीएफ मां इन एग्स का गर्भाशय मां ट्रांसफर किहा जात बा।
प्रीडायबिटीज का फर्टिलिटी ट्रीटमेंट पर असर किसी मामले मां अगर मरीज प्रीडायबिटिक अहै, तौ एकर मतलब इ बा कि उनके ब्लड मां ग्लूकोज का लेवल सामान्य से ज्यादा बा, पर अभी वो डायबिटीज के स्तर तक नाहीं पहुँचा अहै। महिलाओं मां इ स्थिति कई बार इंसुलिन रेजिस्टेंस, हॉर्मोन के असंतुलन अउर यहां तक कि PCOS मां भी बन सकत बा। ऐसे मां डॉक्टर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू करै से पहिले, कई तरह के टेस्ट करानै की सलाह देइ सकत हैं। इन्हमां HbA1c, खाली पेट ब्लड शुगर, थायरॉइड हार्मोन अउर ओवेरियन रिजर्व, AMH, अउर अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट शामिल अहैं।
एग फ्रीजिंग या IVF के समय ब्लड शुगर मैनेज किहा जा सकता बा? हां, नियमित रूप से संतुलित डाइट, एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद अउर डॉक्टर की सलाह मानकर ब्लड ग्लूकोज का सही से मैनेज किहा जा सकता बा, इर्से रिप्रोडक्टिव हेल्थ भी बेहतर रहति बा। एकर लिए फर्टिलिटी टीम ब्लड ग्लूकोज की जांच करति बा, खासकर जब हॉर्मोनल स्टिम्युलेशन या मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी कंडीशन मौजूद होय।
ट्रीटमेंट कब शुरू करवाएं? महिलाओं का प्रीडायबिटीज की स्थिति मां अपना फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करवावब से नाहीं हिचकिचाना चाहिए, एकर बजाय जोखिमों से बचाव के लिए रिप्रोडक्टिव एंडोक्रिनोलॉजिस्ट अउर जरूरत पड़ै पर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट जैसे एक्सपर्ट से सलाह लेइचाहिए।




