
औरतन कै दिल कै सेहत कय बारै मां अक्सर बात नाहीं होत अहै अउर न इहे पय पर्याप्त पढ़ाई-लिखाई होत अहै, जबकि हार्ट कै बीमारी से औरतन कै मउत सब प्रकार कै कैंसर के मुकाबला जियादा होत अहै। औरतन कै इ आम समस्या कय इलाज करै मां कई बार डॉक्टरन का भी बहुत जद्दोजहद करै पड़त अहै। शोध करै वालन का भी साफ नाहीं अहै कि कछू लाइलाज बीमारी काहे होत अहैं। औरतन मां हार्ट अटैक कै लक्षण बिल्कुल अलग होत अहैं। फेर भी, ढेर सारी चुनौती के बाद भी कछू उपाय से इ खतरा कम कीन जाइ सकत अहै।
कछू बात तौ मरद अउर औरत दूनौ के खातिर उपयोगी अहैं, जइसे नीक खान-पान, रोज व्यायाम करब अउर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल अउर ग्लूकोज का काबू मां राखब।
कैसें अलग होत अहै औरतन कै रिस्क फैक्टर?
हाइपरटेंशन, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान, सुस्ती अउर दिल कै बीमारी कै खानदानी इतिहास मरद अउर औरत दूनौ के खातिर चेतावनी अहै। मुदा औरतन का कछू जियादा सतर्क रहै कै जरूरत होत अहै। जिन औरतन का गर्भावस्था के दौरान प्री-एक्लेंपसिया या जेस्टेशनल डायबिटीज जइसन दिक्कत होत अहै, उनका बाद मां दिल कै बीमारी होय कै डर जियादा रहत अहै। खास बात इ अहै कि जियादातर मरीज 20 साल पहले प्रेग्नेंसी के समय भवा प्री-एक्लेंपसिया के बारे मां डॉक्टर का नाहीं बतावत अहैं अउर न डॉक्टर इ बारे मां जानै कै कोसिस करत अहैं।
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पी.सी.ओ.एस) से भी हार्ट कै बीमारी कै खतरा बढ़त अहै। इहइ तरह ल्यूपस अउर रूमेटाइड आर्थराइटिस आटोइम्यून बीमारी अहैं, जउन औरतन मां जियादा मिलत अहैं। जिन औरतन का 45 साल कै उमर के पहले मेनोपाज (रजोनिवृत्ति) होत अहै, उनका भी खतरा जियादा रहत अहै। असल मां, मेनोपाज दिल के खातिर एक बहुत बड़ बदलाव कै दौर होत अहै। एस्ट्रोजन हार्ट अउर खून कै नली का सुरक्षा देत अहै, जवने से औरतन मां मरदन के मुकाबला हार्ट कै बीमारी कै खतरा अक्सर 10 साल बाद देखै का मिलत अहै। मेनोपाज संक्रमण काल अहै, जहिया एस्ट्रोजन कम होइ जात अहै, तौ ब्लड प्रेशर अउर कोलेस्ट्रॉल बढ़ै से धमनी (नली) कै लचीलापन कम होय लागत अहै। इहइ से, खानपान अउर व्यायाम सही राखै के बाद भी औरतन मां कोलेस्ट्रॉल कै समस्या अचानक बढ़ जात अहै। अइसन स्थिति से निपटै के खातिर डॉक्टर जीवनशैली मां सुधार, दवाई या दूनौ उपाय बताइ सकत अहैं।
प्री-मेनोपाज के पहले औरतन मां इ खतरा कम रहत अहै। हाई ब्लड प्रेशर अउर कोलेस्ट्रॉल कै असर दशकन तक जमा होत रहत अहै, इहइ से 20 अउर 30 कै उमर मां रउआ जउन करत अहीं, ओकर असर बाद मां रउआ पय पड़त अहै।
औरतन मां हार्ट अटैक कै लक्षण
औरतन मां हार्ट अटैक कै लक्षण का अक्सर डॉक्टर अउर मरीज दूनौ के द्वारा अनदेखा कर दीन्ह जात अहै। एकर कारण इ अहै कि इ मां कई बार जियादा दरद या दबाव नाहीं महसूस होत। छाती मां दरद एकर सबसे आम लक्षण अहै, मुदा जियादातर औरतें इका भारीपन या दबाव महसूस होब बतावत अहैं, जबकि मरद साफ-साफ इका दरद बतावत अहैं।
औरतन मां कछू अउर लक्षण भी होत अहैं, जइसे- सांस लेब मां दिक्कत, जी मिचलाय, चक्कर आवै, जबाड़ा मां दरद, पीठ के ऊपर हिस्से मां दरद, ठंढा पसीना आवै या बहुत थकान महसूस होब आदि। घर-परिवार कै जिम्मेदारी के चलते उ अक्सर सेहत पय ध्यान नाहीं देत अहैं या फिर लक्षणन का समझै के खातिर अउर कारण ढूँढत रहत अहैं। डॉक्टर के द्वारा अनदेखा करै के कारण उ डॉक्टर के लगे दुबारा जाब टालत अहैं।
अनेक कारण होइ सकत अहैं जिम्मेदार
आमतौर पय, आब्स्ट्रक्टिव कोरोनरी आर्टरी बीमारी के चलते मरदन कै मुख्य धमनी मां ब्लाकेज होय से हार्ट अटैक होत अहै। प्लाक के टूटब या खून कै थक्का जमय के कारण हृदय तक खून कै बहाव रुक जात अहै, जवने से हृदय कै मांसपेशियन का नुकसान पहुँचत अहै। औरतन मां भी अइसन ब्लाकेज होत अहैं, मुदा मरदन के तुलना मां औरतन का अक्सर अइसन बीमारी के अलावा भी दिल का दौरा पड़त अहै, जवने का पता लगाब मुश्किल होइ सकत अहै। एकर खातिर अलग तरह कै इलाज कै जरूरत होत अहै।
उदाहरण के खातिर, औरतन मां मरदन के तुलना मां कोरोनरी माइक्रोवैस्कुलर बीमारी कै डर रहत अहै, जउन छोट खून कै नली पय असर डालत अहै। उनका कोरोनरी आर्टरी मां ऐंठन (सिकुड़न) होय कै भी खतरा रहत अहै, जवने मां आर्टरी समय-समय पय सिकुड़त रहत अहै। दूनौ स्थिति मां हार्ट अटैक होइ सकत अहै। औरतन मां कोरोनरी धमनी कै दीवार के फटै कै खतरा भी रहत अहै, खास कय बचवा पैदा होय के बाद एकर डर रहत अहै।
औरतन का अलग टेस्ट कै जरूरत
इमरजेंसी रूम के डॉक्टर कई बार गलत अंदाजा लगा लेत अहैं, काहे से औरतन कै असामान्य हार्ट अटैक हमेशा स्टैंडर्ड टेस्ट मां नाहीं दिखत, जइसे एक सामान्य एंजियोग्राम मां डॉक्टर डाई इंजेक्ट कर के एक्सरे लेत अहैं, संभव अहै कि इ दौरान आर्टरी मां ऐंठन या कउनो छोट ब्लड वेसल मां ब्लाकेज का पता न चलै। डॉक्टर हार्ट एम.आर.आई. या कोरोनरी फंक्शन टेस्टिंग पी.ई.टी. स्कैन कै सलाह देइ सकत अहैं। अइसन लक्षण देखै पय आगे कै जांच-पड़ताल बहुत जरूरी अहै।
मेडिकल रिसर्च मां लैंगिक एकरूपता न होय के चलते स्वास्थ्य सेवा प्रभावित होत रही अहै। दवाई कै खोज, मेडिकल डिवाइसेज के मामला मां औरतन कै भागीदारी बहुत कम रही अहै। कार्डियोवैस्कुलर सेहत पय हार्मोंस कै असर या प्रेग्नेंसी के लंबे समय मां पड़ै वाले असर का डॉक्टर पूरी तरह नाहीं समझ पाय अहैं।
इलाज कै निर्देशिका (गाइडलाइंस) आमतौर पय दशकन पुरानी अहै जवने मां महिला मरीजन कै भागीदारी बहुत कम रही अहै। इहइ तरह मेडिकल डिवाइसेज भी मरदन के मुताबिक डिजाइन कीन जात अहैं। अनेक औरतन मां स्टेंट मरदन कै आर्टरी के खातिर बना स्टेंट इस्तेमाल कीन जात अहै, जवने से परेशानी पैदा होइ सकत अहै। बहुत औरतन का खून कै दबाव अउर कोलेस्ट्रॉल कै दवाइन कै फायदा बहुत बाद मां मिलत अहै, जवने कै उनका पहले जरूरत रहत अहै। कई बार प्रजनन अवधि मां डॉक्टर कछू खास दवाई देवै मां हिचकिचात अहैं। गर्भकाल के दौरान कछू दवाई खायब असुरक्षित होइ सकत अहै, मुदा एकर मतलब इ नाहीं कि औरत का दवाई कै जरूरत नाहीं अहै। डॉक्टर कै देखरेख मां दवाई खाय चाही। सेहत का लेइ के सतर्कता डॉक्टर अउर मरीज दूनौ का बरतै चाही।




