संपादकीय

का नितिन गडकरी कय E20 नीति कय वजह से गाड़ियन मा खराबी आब अहै?

केंद्रीय सड़क परिवहन अउर राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर आजकल चारों ओर से हमला होइ रहा अहै। कबहूं सोशल मीडिया पर वायरल होइत वीडियो मा E20 पेट्रोल कय गाड़ियन मा खराबी कय कारण बतावा जाइ रहा अहै, तौ कबहूं सड़क पर उतरे कय चेतावनी दइके केंद्र सरकार कय एथनॉल नीति के खिलाफ माहौल बनावा जाइ रहा अहै। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, जउन बहुत दिनन से एथनॉल मिलावा ईंधन कय भारत कय ऊर्जा आत्मनिर्भरता अउर किसानन कय कमाई बढ़ावे कय माध्यम बतावत रहे हैं, अब उही नीति कय लेके गंभीर सवालन कय घेरा मा हैं।

हम आपन का बताइ देईं कि E20 यानी पेट्रोल मा 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिलावे कय लेके विवाद लगातार बढ़त जाइ रहा अहै। ताजा मामला मा बिहार कय चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप आपन टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस मा आई खराबी कय आरोप सीधे E20 पेट्रोल अउर सरकार कय नीति पर लगावा अहै। मनीष कय दावा अहै कि ओनकय दुई महीना पुरान अउर लगभग 12 हजार किलोमीटर चली गाड़ी कय इंजन अचानक खराब होइ गवा। उ आरोप लगाइन कि फ्यूल टैंक से निकारे गए पेट्रोल मा 20 प्रतिशत से ज्यादा एथनॉल अउर गन्दगी मिली। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मा उ बहुत दुखी दिखेन अउर बोलिन कि लाखन रुपया खर्च कय खरीदल गाड़ी इतनी जल्दी खराब होइ जाना बहुत चिंता कय विषय अहै।

देखै तौ मनीष कश्यप अकेले नाहीं हैं। देशभर मा हजारन गाड़ी मालिक माइलेज घटे, इंजन परफॉर्मेंस कम होवे अउर गाड़ियन मा तकनीकी समस्या कय शिकायत करत हैं। कई वीडियो मा गुलाबी रंग कय पेट्रोल, टंकी मा पानी जइसन परत अउर दूसर गन्दगी देखावा जाइके दावा कीन जाइ रहा अहै कि पेट्रोल मा एथनॉल कय मात्रा तय सीमा से ज्यादा अहै। हालांकि सरकार अउर पेट्रोलियम मंत्रालय इ दावा कय गलत बतावत हैं।

इ विवाद अब राजनीतिक अउर सामाजिक रूप भी लइ लइ अहै। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला दिल्ली कय जंतर मंतर पर E20 नीति के खिलाफ प्रदर्शन कय ऐलान कीन हैं। “टीम भारत अगेंस्ट द एथनॉल स्कैम” कय बैनर तले प्रस्तावित इ प्रदर्शन कय एथनॉल नीति के खिलाफ पहिला बड़ा सार्वजनिक आंदोलन बतावा जाइ रहा अहै। पूनावाला कय कहब अहै कि लोग एथनॉल नीति के खिलाफ नाहीं हैं, बल्कि एकर हड़बड़ी मा भई लागू करे कय प्रक्रिया अउर ग्राहकन का विकल्प न देवे कय विरोध करत हैं। उ इ तक कहिन कि जदि प्रदर्शन कय अनुमति नाहीं मिली तौ कुछ लोग नितिन गडकरी कय घर कय बाहर धरना पर बइठि सकत हैं।

देखै तौ विवाद सिर्फ गाड़ी खराबी तक नाहीं अहै। एक उद्योगपति भी सरकार कय E20 नीति पर गंभीर सवाल उठायें हैं। उ सर्वोच्च न्यायालय मा भई सुनवाई कय हवाला देत भये कहिन कि सरकार जनता कय सामने इ योजना का पूरा सफल बतावत अहै, बाकिर अदालत मा इ अबहूँ “चलत प्रयोग” बतावा गवा। हालांकि बाद मा अटॉर्नी जनरल कय दफ्तर इ दावा कय गलत बताइस। उ उद्योगपति कय कहब अहै कि असली चिंता उ उद्योग अउर निवेशकन कय अहै जउन सरकार कय नीति पर भरोसा कयके एथनॉल प्लांट मा अरबों रुपया लगायें हैं। जदि एथनॉल कय खरीद अउर मांग ही निश्चित नाहीं अहै, तौ निवेशकन का का भरोसा दइके निवेश खातिर प्रेरित कीन गवा।

सोशल मीडिया पर कई लोगन एथनॉल नीति कय आर्थिक अउर खेती-किसानी पर असर कय लेके भी सवाल उठायें हैं। उनकर कहब अहै कि E20 कार्यक्रम भारत का विदेशी मक्का अउर ओकर उत्पाद पर ज्यादा निर्भर बनाइ सकत अहै। सोशल मीडिया यूजर्स इ भी आरोप लगायें हैं कि इ नीति अब किसान केंद्रित कम अउर आयात पर आधारित ढांचा जइसन ज्यादा दिखात अहै। उ सरकार से E20 कय अनिवार्यता पर फिर से सोच-विचार कय E5 या E10 जइसन विकल्प फेर से उपलब्ध करावे कय मांग कीन हैं।

दूसरी ओर, देशी अउर विदेशी गाड़ी बनावे वाली कंपनी मिली-जुली बाकिर संतुलित रुख अपनायें हैं। मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टोयोटा, होंडा अउर किआ जइसन कंपनी कहिन हैं कि अप्रैल 2023 के बाद बनल ज्यादातर नई गाड़ी E20 अनुकूल बनावा जाइ चुकी हैं अउर उमा इ ईंधन कय इस्तेमाल से कोई बड़ा सुरक्षा खतरा नाहीं अहै। गाड़ी उद्योग संगठन सियाम (SIAM) भी मानत अहै कि E20 से माइलेज मा लगभग 2 से 4 प्रतिशत तक गिरावट आब सकत अहै, बाकिर इससे इंजन हमेशा खातिर खराब होवे कय कोई सबूत नाहीं मिला अहै।

केंद्र सरकार लगातार इ योजना कय बचाव करत अहै। सरकार कय दावा अहै कि भारत तय समय से पहिले दिसंबर 2025 मा पेट्रोल मा 20 प्रतिशत एथनॉल मिलावे कय लक्ष्य हासिल कय लिहे अहै। पेट्रोलियम मंत्रालय कय अनुसार इ कार्यक्रम से देश का 1.90 लाख करोड़ रुपया से ज्यादा कय विदेशी मुद्रा कय बचत भई अहै, किसानन का 1.60 लाख करोड़ रुपया से ज्यादा कय भुगतान भवा अहै अउर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन मा भारी कमी आई अहै। नितिन गडकरी एथनॉल विरोधी प्रचार का “पेड कैंपेन” कहि चुकेन हैं। उनकर आरोप अहै कि पेट्रोलियम लॉबी भारत कय जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होवे से परेशान अहै अउर इही से दुष्प्रचार करत अहै।

बहरहाल, फिलहाल एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर विवाद थमते नाहीं दिखात। एक ओर सरकार इका किसानन, पर्यावरण अउर अर्थव्यवस्था खातिर क्रांतिकारी कदम बतावत अहै, तौ दूसरी ओर ग्राहक, गाड़ी मालिक अउर कुछ उद्योग विशेषज्ञ एकर प्रभाव का लेके गंभीर चिंता जतावत हैं। आवत समय मा इ बहस सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नाहीं रही, बल्कि सड़क, अदालत अउर राजनीतिक मंचन तक अउर तेज होइत देखाई देइ।

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