
आज जब पूरी दुनिया जुद्ध, आतंकवाद, हिंसा, मानसिक तनाव, पर्यावरणीय संकट अउर नई-नई बीमारी कय चुनौती स घिरी बा, तब मानवता अइसन रास्ता कय तलाश मां अहै जवन न सिर्फ शरीर कय, बलुक मन, बुद्धि अउर आत्मा कय भी संतुलित कर सकै। अइसन संक्रमणकाल मां योग सिर्फ एक व्यायाम पद्धति या स्वास्थ्य विज्ञान नईं, बलुक मानव सभ्यता बरे आशा कय प्रकाश-स्तंभ बनिके उभरा अहै। यही कारण अहै कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज सिर्फ भारत कय नईं, बलुक पूरा विश्व कय उत्सव बन गवा अहै।
भारत अनादिकाल स योग कय भूमि रहा अहै। इ धरती कय कण-कण मां ऋषि, मुनि, तपस्वी अउर योगी लोगन कय साधना कय सुगंध समाइल बा। वैदिक ऋषि लोगन स लइके भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, आदि शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी, श्री अरविन्द, आचार्य तुलसी अउर आचार्य महाप्रज्ञ तक, सबहिन योग कय जीवन कय उत्कर्ष अउर मानव कल्याण कय आधार मानिन। योग भारत कय आध्यात्मिक चेतना कय सिर्फ गढ़ा नाहीं, बलुक विश्व कय ई संदेश भी दीहिन कि मनई कय असली विकास भीतर स शुरू होत अहै।
आज विश्व जवन दिशा मां बढ़त अहै, ऊ चिंता कय विषय अहै। रूस-यूक्रेन जुद्ध, पश्चिम एशिया मां संघर्ष, आतंकवाद कय घटना, साम्प्रदायिक तनाव अउर हथियार कय बढ़ती होड़ मानव सभ्यता कय डर अउर असुरक्षा कय ओर ढकेलत अहै। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान अउर तकनीक ढेर सारी सुविधा त दीहिन अहैं, लेकिन इनकय साथ विनाश कय संभावना भी बढ़ी बा। अइसन समय मां योग कय प्रासंगिकता पहिले स कहीं ढेर बढ़ि गवा अहै।
योग मनई कय भीतर स शांत, संतुलित अउर संवेदनशील बनावत अहै। जब मनई कय भीतर शांति होई, तभी समाज अउर राष्ट्र मां शांति कय वातावरण बनी। योग कय मूल अर्थ ही अहै-जोड़ना। ई मनई कय मनई स, आत्मा कय परमात्मा स, व्यक्ति कय समाज स अउर मानवता कय पूरी सृष्टि स जोड़त अहै। योग विभाजन नईं, एकता कय दर्शन अहै। इसलिए ई हिंसा, घृणा, आतंक अउर संघर्ष कय स्वाभाविक दुश्मन अहै।
विश्व स्वास्थ्य संगठन कय अनुसार आज मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा अउर जीवनशैली स जुड़ी बीमारी तेजी स बढ़त अहैं। आधुनिक जीवन कय भागदौड़ मां मनई बाहरी उपलब्धि कय पीछे दौड़त अहै, लेकिन भीतर स खाली अउर अशांत होत जात अहै। अइसन स्थिति मां योग एक समग्र चिकित्सा-पद्धति कय रूप मां सामने आया अहै। योग शरीर, मन अउर भावना कय बीच संतुलन बनावत अहै। नियमित आसन, प्राणायाम अउर ध्यान व्यक्ति कय प्रतिरक्षा शक्ति कय बढ़ावत अहैं, तनाव कम करत अहैं अउर मानसिक स्वास्थ्य कय मजबूत बनावत अहैं।
पातंजलि योग कय “चित्तवृत्ति निरोध” कहिन अहै। यानी मन कय चंचलता अउर विकार प नियंत्रण। आज कय पीढ़ी, जवन तनाव, प्रतिस्पर्धा अउर डिजिटल व्यसन कय बीच जीयत अहै, ओकरे बरे योग मानसिक संतुलन कय सबसे मजबूत साधन बन सकत अहै। योग कय एक महत्वपूर्ण पक्ष ओकर नैतिक अउर मानवीय आयाम भी अहै। यम अउर नियम जइसन सिद्धांत सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, संयम अउर संतोष कय शिक्षा देत अहैं।
भारतीय संस्कृति कय वैश्विक स्वीकार्यता मां योग कय महत्वपूर्ण भूमिका रही अहै। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कय पहल प संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 21 जून कय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कइब भारत कय सांस्कृतिक शक्ति अउर विश्वसनीयता कय बड़ा सबूत अहै। आज दुनिया कय लगभग सब देश मां योग कय अभ्यास होत अहै।
इतिहास गवाह अहै कि योग हर युग मां एक मौन क्रांति कय जन्म दीन अहै। इ राजा लोगन कय ऋषि बनाइ दिहिस, योद्धा लोगन कय संत बनाइ दिहिस अउर सामान्य मनई लोगन कय असाधारण व्यक्तित्व दइ दिहिस। स्वामी विवेकानन्द योग कय माध्यम स भारतीय अध्यात्म कय विश्व कय सामने रखिन। महात्मा गांधी कर्मयोग अउर अहिंसा कय बल प एक साम्राज्य कय चुनौती दीन।
आज आचार्य महाप्रज्ञ कय योगदान भी बहुत महत्वपूर्ण अहै। उ ‘प्रेक्षाध्यान’ पद्धति कय माध्यम स ध्यान कय पारंपरिक अवधारणा कय एक नया वैज्ञानिक स्वरूप दिहिन। वर्तमान समय मां मानवता जवन दोराहा प खड़ी अहै, उहां योग सिर्फ एक विकल्प नईं, बलुक जरूरत बन गवा अहै। इ शरीर कय निरोग, मन कय शांत, बुद्धि कय निर्मल अउर आत्मा कय जागृत करत अहै। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कय असली संदेश इहे अहै कि मनई बाहर कय दुनिया कय बदले स पहिले अपने भीतर कय दुनिया कय बदले। भारत योग कय माध्यम स विश्व कय एक अनमोल उपहार दीन अहै।
– ललित गर्ग, लेखक, पत्रकार एवं स्तंभकार