
आजु कय समाज एक अइसन मोड़ पर खड़ा है, जहाँ नैतिकता अउर मर्यादा कय तय पैमाना तेजी से कमजोर होत जात हिन। खास कइके मीडिया, मनोरंजन, अउर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती अश्लीलता एक गंभीर चिंता पैदा कय दिहिस है। खुलापन अउर अभिव्यक्ति की आजादी के नाव पर अइसन चीज परोसी जात हिन जउन न खाली समाजी मूल्यन का नुकसान पहुँचावत हिन, बल्कि नई पीढ़ी का भी रस्ता से भटकावत हिन।
हाल ही मा समय रैना (Samay Raina) मामला इ बहस का अउर भी जरूरी बनाय दिहिस है। इ घटना खाली एक मनई या एक वीडियो तक सीमित नाहीं है, बल्कि इ एक बड़की समस्या कय उदाहरण है, जउन इ देखावत है कि समाज मा अश्लीलता अउर अनैतिकता का बढ़ावा देय वाले लोगन का कतनी आसानी से स्वीकार कीन जात है। मीडिया अउर मनोरंजन उद्योग कय काम खाली जानकारी अउर मनोरंजन देब नाहीं है, बल्कि समाज मा नैतिकता, संस्कृति अउर संस्कारन का बचाय रखब भी है। मुला दुख की बात इ है कि आजु मीडिया मुनाफा अउर टीआरपी (TRP) की दौड़ मा नैतिक मूल्यन का भूलत जात है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अउर सोशल मीडिया कय भूमिका: बिना कवनो सेंसरशिप के उपलब्ध सामग्री मा अश्लीलता, हिंसा अउर अनैतिक कामन का बढ़ावा दीन जात है। मनोरंजन के नाव पर मर्यादा कय उल्लंघन कीन जात है। फिलिमन, वेब सीरीज अउर यूट्यूब कंटेंट मा ग्लैमर अउर भड़काऊ सीन का सफलता कय पैमाना बनाय दीन गवा है।
युवा पीढ़ी पर असर: इंटरनेट के आसानी से मिलै के कारण लइका अउर जवान अइसन चीजिन से प्रभावित होत हिन, जेसे उनके मानसिक अउर नैतिक विकास पर बुरा असर पड़त है। समय रैना के विवादित कंटेंट इ साबित कय दिहिस कि आजु सोशल मीडिया पर मशहूर होय खातिर कवनो भी हद पार कीन जाय सकत है। इ घटना इ भी देखावत है कि कइसन गलत चीजिन का आम बनाया जात है अउर जवान लोग एका आदर्श मानत हिन।
एकरे पहिले भी कइयौ यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अउर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स विवाद मा रहे हिन, मुला लोगन के गुस्सा के बावजूद कवनो कड़ा कदम नाहीं उठावा गवा। नतीजा इ है कि इ चलन लगातार बढ़त जात है। समाज मा बढ़ती अश्लीलता खाली मनोरंजन कय बात नाहीं है, बल्कि इ हमरे नैतिक पतन अउर सामाजिक दिशा कय आईना है।
जउ हम समय रहत नाहीं जागे, तौ आवे वाली पीढिन का अइसन समाज मा रहै का पड़ी, जहाँ मर्यादा, संस्कृति अउर नैतिकता कय कवनो जगह नाहीं होइ। अब बखत आइ गवा है कि हम खाली चर्चा न करी, बल्कि इ बुराई के खिलाफ कड़ा कदम उठाई। समाज के हर मनई का इ सोचे का परी कि उ अश्लीलता बढ़ावै वाला बनइ चाहत है या एक नीक, मर्यादित अउर नैतिक समाज बनावै मा आपन भूमिका निभावै चाहत है।