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नीति आयोग कै पूर्व उपाध्यक्ष बताइन विकसित भारत कय मास्टरप्लान

मंत्रालय (Indian Economy Reforms) गठित करय कय भी वकालत करिन। उनका कहब अहै कि विनिवेश विभाग निजीकरण कय रफ़्तार बनाय रखय मां सफल नहीं रहा अहै।

उन्हों ‘पीटीआई-भाषा’ कय दिहे साक्षात्कार मां कहिन, ‘‘मोर दृढ़ विश्वास अहै कि राजकोषीय दबाव कय परवाह कयै बिना पीएसयू अउर अधिकतर सार्वजनिक क्षेत्र कय बैंकन कय निजीकरण हमार आर्थिक सुधारन कय अभिन्न अंग अहै।’’

पनगढ़िया कहिन कि पश्चिम एशिया तनाव कय बावजूद पीएसयू अउर बैंकन कय निजीकरण जारी रहय चाही। उन्हों कहिन, ‘‘विकसित भारत-2047 दृष्टिकोण कय तहत अर्थव्यवस्था कय आधुनिकीकरण खतिव हमका पीएसयू अउर पीएसबी कय निजीकरण कार्यक्रम कय फिर से सुरू करय पड़ी।’’

पनगढ़िया जब नीति आयोग मां उपाध्यक्ष रहे, तब पीएसयू कय विनिवेश कय अवधारणा कय आगे बढ़ाइन रहा। नीति आयोग कय निजीकरण कार्यक्रम साल 2016 मां सुरू भवा रहा। जब ई पूछा गवा कि का छ: से सात प्रतिशत कय उच्च आर्थिक वृद्धि दर वाला देश (भारत) से पूंजी कय बाहर जाय उन्हें असामान्य लागत अहै?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कय प्रदर्शन बहुत नीक रहा

पनगढ़िया कहिन कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) कय प्रदर्शन बहुत नीक रहा अहै। ई वित्त वर्ष 2023-24 कय 71.3 अरब डॉलर से बढ़िकै 2024-25 मां 80.6 अरब डॉलर अउर 2025-26 मां 94.5 अरब डॉलर तक पहुँच गवा।

उन्हों कहिन, ‘‘साफ़ अहै कि विदेशी निवेशक भारत मां निवेश कय दीर्घकालिक उत्पादकता कय लइकै सकारात्मक दृष्टिकोण राखत अहैं।’’

फिलहाल कोलंबिया विश्वविद्यालय मां अर्थशास्त्र कय प्रोफ़ेसर पनगढ़िया कहिन कि विदेशी निवेशक कउनो भी साल मां अपने पुरान निवेश कय एक हिस्सा वापस निकाल लेत अहैं।

सोलहवें वित्त आयोग कय चेयरमैन पनगढ़िया कहिन कि पिछिल दुई सालन मां भारतीय कंपनी कय विदेशन मां निवेश भी बढ़ि गवा अहै, जेकरे कारन देस से कुछ पूंजी बाहर गई अहै।

उन्हों कहिन कि पिछिल दुई सालन मां विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) कय निकासी भी बहुत ज्यादा रही अहै, जेसे डॉलर कय बाहर जाय कय रफ़्तार बढ़ि गई अहै। पनगढ़िया कहिन, ‘‘सब संकेत बतावत अहैं कि भारतीय शेयर कय मूल्यांकन बहुत जादा होय गवा रहा, जेसे निकासी तेज भई। हालांकि अब मूल्यांकन सुधर गवा अहै।’’

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