विदेश

यूएस-ईरान समझौता के बाद होर्मुज से जल्द निकरिहैं 34 भारतीय जहाज

अमेरिका अउर ईरान के बीच भये समझौते कै असर अब देखाई देय लाग अहै, होर्मुज मां लाग पाबंदी मां थोड़ी नरमी आई अहै। होर्मुज मां फंसा भारत कै 34 जहाज भी जल्द निकरि जइहैं, जेसे देश के करोड़ों उपभोक्तावन कय राहत मिलि। अमेरिका अउर ईरान के बीच अब शांति समझौता होइ गवा अहै। या समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज अब बिना रोक-टोक आवै-जाइ सकिहैं। इसका असर भी देखाई देय लाग अहै। सच तौ या अहै कि तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) लावत भारतीय टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित होर्मुज पार कइ लिहिस अहै। भारत आवत 34 अउर जहाज भी जल्द ही होर्मुज पार कइ लेइहैं, अइसन उम्मीद अहै। ये जहाज पश्चिम एशिया के संकट के चलते होर्मुज मां फंसा रहे।

करोड़ों किसानन अउर उपभोक्तावन कय मिलि राहत

होर्मुज मां फंसा 34 जहाज मां 16 जहाज अइसन अहैं जउन खाद (फर्टिलाइजर) लइके भारत आवत अहैं। इन 16 जहाज मां से 8 पर यूरिया, चार पर डाइ-अमोनियम फॉस्फेट, तीन पर सल्फर अउर एक पर अमोनिया लाद अहै। अगर समझौते के मुताबिक सब कुछ सही रहा अउर होर्मुज खुल गवा तौ जल्द ही भारत के करोड़ों किसानन कय खेती-किसानी खातिर खाद मिलि जइ। हालांकि, हालात कय पूरी तरह सामान्य होय मां अभी कुछ वक्त लागि।

तुरंत पूरी राहत के आसार नहीं

पश्चिम एशिया मां लड़ाई के दौरान ऊर्जा केंद्रन कय निशाना बनावा गवा रहा। पश्चिम एशिया के कइयन अहम रिफाइनरी अउर गैस प्लांट हमला मां बुरी तरह बर्बाद भइ अहैं। जवने के चलते लड़ाई खतम होय के बाद भी आपूर्ति सामान्य होय मां कइ महीना लागि सकत अहै। कतर कै ‘रास लफ्फान’ प्लांट हमला मां बहुत खराब होइ गवा अहै अउर वहां से ईंधन आपूर्ति सामान्य होय मां कइयन महीना लागि सकत अहै। भारत कै या गैस प्लांट से एलपीजी आपूर्ति कै कॉन्ट्रैक्ट अहै, अइसने मां हालात सामान्य होय मां अभी वक्त लागि।

भारत अपनी जरूरत कै 88 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगावत अहै। इमां से आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आवत अहै। साथ ही भारत कै कुल आयात कै 60 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी भी होर्मुज से होकर आवत अहै। यही कारण अहै कि पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होय से भारत कय तेल अउर गैस कै आपूर्ति रुक गइ रही। होर्मुज से निकरा ‘दिशा’ टैंकर 18 जून तक भारत आ सकत अहै अउर इस पर 62,370 टन एलएनजी लदा अहै।

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