
तमिलनाडु की राजनीति में तब एक नया भूचाल आ गया जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देके अपने नए राजनीतिक आंदोलन के ऐलान कर दिहिन। ई फैसला तमिलनाडु की जमी भई राजनीतिक संस्कृति का चुनौती देवे वाला एक बहुत बड़ संदेश अहै। अन्नामलाई जौन साफगोई, साहस अउर वैचारिक दृढ़ता के साथ अपना फैसला सबके सामने रखे अहैं, उससे ई साफ होइ गवा अहै कि ऊ अब कउनो दल के सीमित दायरा में नाहीं, बल्कि तमिल समाज के व्यापक आकांक्षाओं के प्रतिनिधि के रूप में उभरे चाहत अहैं।
अन्नामलाई खुलकर कहे कि उनके भीतर लंबा समय से ई संघर्ष चलत रहा कि ऊ पहले भारतीय अहैं या तमिल। ई बयान बस भावनात्मक अभिव्यक्ति नाहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के ऊ मूल द्वंद्व का सामने लावत अहै जेमें राष्ट्रीय दलों का अक्सर क्षेत्रीय अस्मिता के सामने संघर्ष करे का पड़त अहै। ऊ बताइन कि चार दिसंबर 2025 का ही ऊ पार्टी नेतृत्व का इस्तीफा के फैसला बता दिहे रहे, लेकिन उनसे चुनाव तक रुकै के अनुरोध कीन गवा। इससे ई भी साफ होत अहै कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व उनके लोकप्रियता अउर प्रभाव का लेके कितना सजग रहा।
अन्नामलाई के गेम अउर शाह के प्लान, पूरी कहानी कुछ अउर अहै
पूर्व पुलिस अधिकारी रहे अन्नामलाई भारतीय जनता पार्टी में सकारात्मक बदलाव के उद्देश्य से प्रवेश कीन रहे। ऊ कहे कि पार्टी में रहत भये ऊ कभी तमिलनाडु की पहचान से समझौता नाहीं कीन। पिछला अठारह महीना में संगठनात्मक मामला का लेके उनके असहमति लगातार बढ़त गई। यही कारण अहै कि ऊ अब एक स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता चुने के फैसला कइ लिहिन अहै। ई निर्णय कउनो आवेश के परिणाम नाहीं, बल्कि लंबा चिंतन अउर रणनीतिक तैयारी के हिस्सा देखात अहै।
अन्नामलाई अपना नया आंदोलन “वी द लीडर” के ऐलान करत भये साफ कर दिहिन कि उनके उद्देश्य बस एक अउर राजनीतिक दल खड़ा करे का नाहीं, बल्कि राजनीति की भाषा अउर संस्कृति का बदले का अहै। ऊ परिवारवाद अउर व्यक्तिपूजा की राजनीति पर सीधा हमला बोलत भये कहे कि कउनो भी विधायक, सांसद या मंत्री के पद स्थायी नाहीं होवे का चाही। ई बयान तमिलनाडु की ऊ परंपरागत राजनीति पर करारा प्रहार अहै जेमें कुछ परिवार अउर सीमित चेहरा के इर्द-गिर्द सत्ता घूमत रही अहै।
सबसे महत्वपूर्ण बात ई अहै कि अन्नामलाई राजनीति में तकनीकी विशेषज्ञ, युवा अउर सामान्य नागरिक के भागीदारी पर जोर दिहिन अहै। ऊ युवा लोगन से राजनीति में आवे के अपील करत भये कहे कि अब आम आदमी की नई पीढ़ी की राजनीति की नींव राखत अहै। ई सोच उनको पारंपरिक नेता लोगन से अलग करत अहै। देखल जाय तौ तमिलनाडु में जहवां लंबा समय से भावनात्मक नारा अउर जातीय समीकरण के आधार पर राजनीति चलत रही अहै, उहवां अन्नामलाई प्रशासनिक दक्षता, नैतिकता अउर प्रतिभा आधारित नेतृत्व की बात करत अहैं। यही उनके सबसे बड़ ताकत बन सकत अहै।
उनके आंदोलन के अंतर्गत कोयंबटूर में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फोर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स के स्थापना के फैसला भी बतावत अहै कि ऊ बस चुनावी राजनीति नाहीं, बल्कि वैचारिक अउर नैतिक प्रशिक्षण की स्थायी व्यवस्था खड़ा करे चाहत अहैं। ई दृष्टिकोण तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बौद्धिक धारा पैदा कर सकत अहै। उनके आह्वान के कुछ ही समय बाद हजारन लोगन के उनके राजनीतिक आंदोलन से जुड़े संकेत देत अहै कि जनता के एक हिस्सा में बदलाव की बेचैनी पहले से मौजूद रही।
बतावा जात अहै कि अन्नामलाई भाजपा नेतृत्व के सामने दुई साफ विकल्प रखे रहे। एक तौ उनको पर्याप्त स्वायत्तता अउर अधिकार के साथ कम से कम सात साल तक प्रदेश नेतृत्व दीन जाय, या फिर उनको स्वतंत्र राजनीतिक राह चुने दीन जाय। ई मांग उनके आत्मविश्वास अउर दूरदृष्टि दुनों का दिखावत अहै। साथ ही इस्तीफा के ऐलान करे से पहले दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अउर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से उनके मुलाकात अउर पार्टी नेतृत्व द्वारा उनको मनावे के कोशिश ई बात के प्रमाण अहै कि अन्नामलाई की अहमियत से भाजपा नेतृत्व वाकिफ अहै।
वैसे तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति भी अन्नामलाई के लिए अवसर लेके आई अहै। हालिया विधानसभा चुनाव में द्रविड़ दल का झटका लाग अउर अभिनेता विजय की पार्टी अप्रत्याशित सफलता हासिल कीन। इससे ई साफ होइ गवा कि राज्य की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक ढांचा से बाहर विकल्प खोजत अहै। अन्नामलाई के मानब अहै कि राष्ट्रीय दल के लिए हियां सीमित राजनीतिक जगह अहै, इहिकै से एक मजबूत क्षेत्रीय विकल्प ही जनता की आकांक्षा का सही दिशा दे सकत अहै। उनके ई समझ राजनीतिक रूप से बहुत व्यावहारिक अउर दूरदर्शी मानल जात अहै।
उधर, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भले ही कहे हों कि अन्नामलाई के जाब से पार्टी का कउनो नुकसान नाहीं होई, लेकिन राजनीतिक वास्तविकता इससे अलग देखात अहै। अन्नामलाई तमिलनाडु में भाजपा का ऊर्जा, आक्रामकता अउर जनस्वीकार्यता दिहे रहे। अब उनके अलग होब से भाजपा के सामने नेतृत्व अउर जनाधार दुनों के चुनौती खड़ी होई। दूसरी ओर, अन्नामलाई जदि अपना आंदोलन का संगठित ढंग से आगे बढ़ावत अहैं तौ ऊ तमिलनाडु की राजनीति में तीसरी शक्ति के रूप में तेजी से उभर सकत अहैं।
बहरहाल, ई साफ अहै कि अन्नामलाई बस पार्टी नाहीं छोड़े, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति का नई दिशा देवे के चुनौती स्वीकार कीन अहै। उनके राजनीति में साहस अहै, वैचारिक स्पष्टता अहै अउर बदलाव की बेचैनी भी अहै। आवे वाला सालन में ई देखब बहुत दिलचस्प होई कि का उनके ई आंदोलन तमिलनाडु की राजनीति में वइसन परिवर्तन ला पाई जइसन ऊ कल्पना करत अहैं। फिलहाल इतना तय अहै कि अन्नामलाई राजनीति के मैदान में एक नई बहस छेड़ दिहे अहैं अउर ई बहस का नजरअंदाज कर पाना कउनो के लिए आसान नाहीं होई। -नीरज कुमार दुबे
