
आस्टियोआर्थराइटिस (गठिया), जवने का बहुत दिन से बुढ़ापे क बीमारी मानत रहे हैं, अब 30 साल क नौजवानन का भी तेजी से अपनी चपेट मा लेइत है। एकर मुख्य कारण खराब जीवनशैली, एक जगह बैठे रहना, मोटापा और ‘वीकेंड वॉरियर’ (हफ्ता भर कुछ न करे क बाद अचानक छुट्टी क दिन भारी कसरत करे वाला) फिटनेस कल्चर है। इ जानकारी अंतरराष्ट्रीय आर्थोपेडिक्स पत्रिका मा छपा एक समीक्षा मा दी गई है। समीक्षा मा आस्टियोआर्थराइटिस का एक बीमारी क बजाय अलग-अलग जैविक, बायोमैकेनिकल, मेटाबॉलिक, आनुवंशिक और आणविक तंत्रन से उपजत सिंड्रोम क रूप मा बतावा गा है।
बीमारी क अलग-अलग कारण
15 मई का छपी एक समीक्षा मा आस्टियोआर्थराइटिस का एक बीमारी क बजाय कई तरह क बायोलॉजिकल, बायोमैकेनिकल, मेटाबॉलिक, जेनेटिक और मॉलिक्यूलर कारनन से होय वाला एक मिला-जुला सिंड्रोम बतावा गा है। रिसर्च से पता चला है कि इलाज क जवन पुराना तरीका सब प एक बराबर लागू होत रहा, ऊ अक्सर इसलिए काम नहीं करत है काहे से हर मरीज मा बीमारी क कारण अलग-अलग होत हैं। पूरी दुनिया मा 50 करोड़ से ज्यादा लोग ओए (OA) से पीड़ित हैं, जवन कुल आबादी क 7.6 फीसदी है। ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज क अनुमान क मुताबिक पिछले 30 सालन मा एकर मामला 132 प्रतिशत बढ़ि गा है और 2050 तक इ मा 60 प्रतिशत अउर बढ़ोत्तरी होय क अनुमान है।
कई तरह क स्थितिन क समूह
इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल्स मा सीनियर कंसल्टेंट आर्थोपेडिक और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राजू वैश्य कहिन कि, आस्टियोआर्थराइटिस क मरीज अक्सर मोटापा और सुस्त जीवनशैली क कारण परेशान होत हैं। इ रिसर्च साफ करत है कि आस्टियोआर्थराइटिस कवनो एक बीमारी नहीं, बल्कि कई तरह क स्थितिन क समूह है। हर मरीज क खास शारीरिक लक्षण का पहचान क हम सबके लिए एक ही तरह क इलाज करे क बजाय, अउर ज्यादा असरदार और मरीज क जरूरत क हिसाब से इलाज देई सकत हैं। समीक्षा मा बीमारी क छह उप-प्रकार चिन्हित करे गए हैं, जवने मा सूजन, मेटाबॉलिक और दरद क प्रति संवेदनशीलता जइसन रूप शामिल हैं। इलाज तय करे क खातिर एमआरआइ (MRI) और बायोमार्कर पैनल क उपयोग करे क सलाह दी गई है।
दोनो उदाहरण
घुटने क दरद से परेशान 33 साल क एक आइटी प्रोफेशनल मा विटामिन-डी क कमी, बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और जोड़न क शुरुआती घिसाव मिला। मेटाबॉलिक आस्टियोआर्थराइटिस क केस मानिके ओकर वजन कंट्रोल करवावा गा, सप्लीमेंट दीन गा और सही तरीका से कसरत करवावा गा, जवने से मरीज क हालत मा सुधार भवा। एक अउर मामला मा घुटने मा तेज जलन और दरद से परेशान, और नींद न आवै क समस्या से जूझत 60 साल क महिला का आम दवावन से कवनो राहत नहीं मिली। बाद मा जांच क दौरान दरद क प्रति संवेदनशीलता वाला प्रकार क पता चला और नस क दरद क रास्ता का निशाना बनावे वाला न्यूरोमाड्यूलेटर से इलाज करे पर उनका आराम मिल गा।




