
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) औ केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा मिलि कै कीन गा बहु-केंद्रित क्लिनिकल ट्रायल (परीक्षण) मा ई पावा गा अहै कि आयरन क कमी से होय वाले एनीमिया क इलाज बरे इस्तेमाल कीन जाय वाली दूनों आयुर्वेदिक दवाइयां, मध्यम एनीमिया से पीड़ित मेहरारुन मा आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन के जतने ही असरदार अहैं। फेज-3 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (आरसीटी) क नतीजा 20 मई क आईसीएमआर द्वारा आयोजित पहिल आईसीएमआर सालाना क्लिनिकल ट्रायल मीट 2026 के दौरान पेश कीन गय।
एकै जइसन असरदार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ई अध्ययन मा आयरन क कमी से होय वाले एनीमिया क इलाज मा आयुर्वेदिक दवाइन मा अकेले पुनर्नवाड़ी मंडूर औ द्राक्षावलेह के साथे मिलाइ कै एकरे असर क जांच कीन गय। भारत मा आयरन क कमी से होय वाला एनीमिया एक बड़ी जन स्वास्थ्य क समस्या अहै। ई अध्ययन मा इन आयुर्वेदिक दवाइन क तुलना पुरानन से चली आ रही आयरन फोलिक एसिड थेरेपी से कीन गय।
ई परीक्षण लगभग 4,000 अइसन गैर-गर्भवती मेहरारुन के बीच कीन गय, जे 18 से 49 साल क उमिर वर्ग मा मध्यम एनीमिया से पीड़ित रहीं। शोधकर्ता लोगन 90 दिनन क समय मा हीमोग्लोबिन क स्तर औ दूसर क्लिनिकल नतीजन क जांच-परख कीन। बयान मा ई कहा गा कि नतीजन से साफ पता चला कि दूनों आयुर्वेदिक इलाज मानक आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन के बराबर ही असरदार रहे।
राष्ट्रीय स्तर क ई बैठक मा नीति बनावै वालन, वैज्ञानिकन, डाक्टरन, शोधकर्ता लोगन, नियामक प्राधिकरणन औ अलग-अलग क्षेत्रन क जानकारों क एकट्ठा कीन गा रहा, ताकि भारत क क्लिनिकल परीक्षण पारिस्थितिकी तंत्र क मजबूत कीन जाय सकै औ सबूतन पर आधारित समग्र चिकित्सा अनुसंधान क आगे बढ़ावै पर चर्चा कीन जाय सकै। कार्यक्रम मा आईसीएमआर क महानिदेशक डॉ. राजीव बहल औ केंद्रीय आयुष सचिव राजेश कोटेचा समेत स्वास्थ्य औ वैज्ञानिक समुदाय क तमाम जानकारों औ हितधारकों हिस्सा लीन।
आईसीएमआर औ सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज क मल्टीसेंट्रिक क्लिनिकल ट्रायल मा पता चला
ई परीक्षण 18 से 49 साल क उमिर वाली 4,000 अइसन गैर-गर्भवती मेहरारुन पर कीन गय, जे एनीमिया क शिकार रहीं।
37 जानकारों के साथे तैयार कीन गय रिपोर्ट
दिग्गज लोगन उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियन से निपटै औ स्वास्थ्य सेवा क अउर मजबूत बनावै बरे मजबूत क्लिनिकल अनुसंधान प्रणालियन, नैतिक शासन औ एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल तरीकन क वैज्ञानिक जांच क महत्व पर जोर दीन। ई कार्यक्रम क दौरान आईसीएमआर ‘भारत मा फर्स्ट-इन-ह्यूमन फेज 1 क्लिनिकल परीक्षणों क आगे बढ़ाना: विनियामक मार्ग औ अवसर पर एक डेल्फी अध्ययन’ नाम से एक रिपोर्टिउ जारी कीस।
ई रिपोर्ट फार्मास्यूटिकल उद्योग, अनुबंध अनुसंधान संगठनों, अकादमिक संस्थानों औ राष्ट्रीय नियामक एजेंसियों के 37 जानकारों के साथे दुई दौर क बातचीत के जरिए तैयार कीन गय रही, जेहमा भारत मा सुरुआती चरण क क्लिनिकल परीक्षणन क आगे बढ़ावै मा आवै वाली रुकावटन क पहचान कीन गय। रिपोर्ट मा नियामक क्षमता क मजबूत करै, मंजूरी मिलै क तरीका सरल बनावै औ अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल मा सुधार करै क सिफारिश कीन गय अहै।
ई कार्यक्रम मा भारत मा बहु-केंद्र अनुसंधान बरे एकै नैतिक समीक्षा क संचालन से जुड़े दिशानिर्देश भी जारी कीन गे, जेकर मकसद देस भर मा बहु-केंद्र अध्ययनों बरे नैतिक समीक्षा प्रणाली क एक साथ जोड़ब अहै।




