‘नीट प्रश्नपत्र लीक’ के मामिला मा धर-पकड़ क सिलसिला जारी अहै। जांच क जिम्मा सीबीआई का सौंप दीन गा अहै। राजस्थान से कुछ दोसी पकड़े गय हइँ। बाकी जौन मनई पकड़े गय हइँ, उनका संबध राजनीती से अहै। पुलिस क हिरासत मा उनकर सरेआम मीडिया क कैमरन के सामने ई बोलब कि ऊ तौ खाली मोहरा हइँ, असली खेलाड़ी तौ कोऊ अउर हइँ जौन बहुतै बड़े लेवल क हइँ? दोसियन के मुँह से निकरे ई सब्द पक्का तौर पर नीक जांच क उम्मीदन पर ग्रहण लगावै बरे बहुते हइँ। हियाँ से ही पूरी जांच क उम्मीदन टूटत देखात हइँ।
साढ़े बाइस लाख परिक्षार्थियों के भबिस्य के साथे भवा इतन बड़का खलिवाड़ का खाली एक कहानी बनि क सरकारी फाइलन मा सिमटि जाई? करोड़न लोग नीट परीक्षा लीक कांड क जांच का अब धुंधलात देखत हइँ। धीरज तौ उन महतारी-बापिन का भी धरेक चाही, जौन इनसाफ क आस लगाय बइठे हइँ। अब साफ-सुथरी जांच-परताल क उम्मेद अउरौ नाहीं कीन जा सकत, काहे से कि पूरा सिस्टम जांच-वांच छोड़ि क, बड़े-बड़े मगरमच्छन का बचावै मा जुटि जाई। अइसन ई पहली बार नाहीं, पिछलके लगभग सप्पै पेपर लीक कांड मा अइसने भवा अहै। नीट तौ खाली दाखिला परीक्षा अहै, बाकी भारत मा तौ भरती क पूरी की पूरी परीक्षन क पेपर लीक होय लाग हइँ। एतना होय के बादौ केंद्र सरकार कोनो अइसन जतन नाहीं करि पावत अहै जेहसे परिक्षार्थियों के भबिस्य के साथे ई खलिवाड़ रूकि सकै।
पिछलके ७ सालन मा यानी २०१९ से लइके मई २०२६ तक, भारत मा अलग-अलग लेवल क लगभग ७० प्रतियोगी परीक्षन क पेपर लीक भवा। आज तक कोनो मामिला क जांच न पूरी भई अउर नाहीं कोनो मा इनसाफ मिलि पावा। हर मामिला मा छोटके कर्मचारी ही पकड़े गय जौन कुछ महीना या साल-दो साल मा जमानत पाइ गय। सबसे पहिले तौ दाखिला परीक्षा करावै वाली संस्था ‘एनटीए’ का ओहके जिम्मेदारी से मुक्त करि देवैक चाही। एनटीए क काम अब संतोषजनक नाहीं रहि गवा अहै, काहे से कि ऊ अभीव पुरान तौर-तरीका अपनावत अहै। आपन सिस्टम मा कोनो सुधार नाहीं करत। दुनिया क प्रतिष्ठित अउर भरोसेमंद परीक्षन से भी ऊ कुछ नाहीं सीखत। इंटरनेट-कंप्यूटर क जमाना मा भी ऊ पेपर छपवाइ क परीक्षा केंद्रन तक पहुँचावै मा बिस्वास करत अहै।
जउ अइसन ही करब अहै तौ पेपरन क सेट बदलि क अउर अलग-अलग होवेक चाही ताकि कोनो गड़बड़ी क गुंजाइस ना रहै। जउ खुदा-ना-खास्ता कछू होइ जाइ, तौ पूरी परीक्षा ना रद कीन जाय, खाली उहै सेंटर पर दोबारा परीक्षा करवाई जाय जहाँ गड़बड़ी भई होय। जउ अइसन नवा तरीका अपनावा जाय तौ परिक्षार्थियों के साथे खलिवाड़ ना होय। केंद्र से लइके राज्य सरकारन का भी नीक से पता अहै कि भारत मा होय वाली हर चौथी प्रतियोगी परीक्षा क पेपर लीक होत अहै, जेहमा पुलिस भरती अउर शिक्षा विभाग क परीक्षन बदनाम हइँ। जबकि, नीट परीक्षा कोनो नौकरी वाली परीक्षा नाहीं अहै, ई मेडिकल कॉलेज मा दाखिला क बरे आयोजित होत अहै, ओहमा भी सेंधमारी? ई तौ हद अहै।
गौर करै वाली बात ई अहै कि जउ पहिले भये पेपर लीक मामिलन मा कड़ाई अउर निष्पक्ष जांच भई होती, अउर दोसियन क नाँव सरेआम कीन गवा होत अउर सजा क तौर पर उमरकैद या भारी जुर्माना वसूला गवा होत, तौ अइसन कांड करै वाले खौफ खाय होते। आगे गड़बड़ी करै से तौबा करत। बाकी लचर कानून अउर परसासन क नरम रवैया से दोसी तनिकौ नाहीं डरात। ऊ एक कांड करत हइँ अउर दूसरे क तैयारी मा जुटि जात हइँ।
फिलहाल मौजूदा नीट पेपर कांड मा पहली गलती तौ परीक्षा करावै वाली संस्था ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ यानी एनटीए क ही अहै। मेडिकल कॉलेज मा दाखिला क पात्रता परीक्षा नीट क सवाल लीक होय से पूरी परीक्षा रद करै क मजबूरी जतनी सरमनाक अहै, उतेई फिकिर वाली बात अहै। एनटीए २०१७ मा बनी रही, तबसे लइके आज तक ई संस्था क विश्वसनीयता सवालो क घेरा मा अहै। ५ मई २०२४ का भी जब ई नीट परीक्षा मा घपला भवा रहा अउर मामिला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा रहा, तब ई संस्था वादा करे रही कि आगे अइसन गलती दोबारा नाहीं होई। खाली अदालत का नाहीं, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का भी भरोसा दिहे रही। बाकी ढिठाई तौ देखौ, खाली २४ महीना बाद ही पिछलके से भी बड़का कांड करि दिहिस। पिछली बार इन्है कइयौ लरिकन का ७२० मा ७२० नंबर दइ दिहे रहिन, जबकि ऊ लरिका पढ़ै मा एकदम सामान्य रहिन, उनके मुकाबले टॉपरन का उनसे कम नंबर मिला रहा।
ई बार तौ उससे भी बड़का ब्लंडर होइ गवा। पेपर लीक क खबर सबसे पहिले राजस्थान से बाहर निकरी। जहाँ, कइयौ लरिकन के पास १४० से ज्यादा परीक्षा क मूल सवालन से मिलते-जुलते सवाल गेस पेपरन मा मिलि गय। लीक भये सवालन पर पहिले एनटीए क ओर से सफाई दीन गई कि पेपर प्रिटिंग प्रेस से लीक भवा। जबकि सब जानत हइँ कि जहाँ पेपरन क छपाई होत अहै, उहाँ परिंदा भी पर नाहीं मारि सकत। ऊ बहुतै गुप्त जगह होत अहै अउर उहाँ क कर्मचारियन का फोन तक रखै क इजाजत नाहीं होत। अइसन मा प्रिंटिंग प्रेस से सवाल लीक होय क सवालै नाहीं उठत। ई कांड मा पूरा क पूरा सिंडिकेट सामिल रहत अहै।
अब समय क माँग ई अहै कि कोनो अइसन कानून केंद्रीय लेवल पर बनेक चाही, ताकि लरिकन क जिंदगी से कोऊ खलिवाड़ न करि पावै। केंद्र सरकार का आगे आइ के दखल देवैक चाही। काहे से कि मौजूदा कांड मा सरकार क चुप्पी सबहिन का खलत अहै। अइसन घटना होय के बाद छात्र सिर्फ सरकार से ही इनसाफ क उम्मेद रखत हइँ। उनकर उम्मेद नाहीं टूटैक चाही।
– डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!