संपादकीय

बंगाल मा “शुभ राज“ के साथै सनातन क सुरुज उइयै

पच्छिम बंगाल मा 69 साल के भारी संघर्ष के बादै, भारतीय जनता पार्टी क पूरी बहुमत वाली पहिली सरकार शुभेंदु अधिकारी के अगुआई मा जिम्मेदारी सँभाड़ लिहिस है अउर काम-काज मा जुडि गय है। बंगाल मा भाजपा के ई जीत बहुतै बड़ी अउर ऐतिहासिक अहै। खाली बंगाले मा नाहीं, बल्कि भारत के अउर हिस्सा मा भी ई जीत क खुशी साफ़ देखाई पड़त है। ई जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब कर्नाटक, तेलंगना अउर गुजरात के दौरा पे गए, तौ हुआँ जौन भीड़ उमड़ी ओसे आम जनता अउर भाजपा कार्यकर्तान् के उत्साह क अंदाजा लगावा जाइ सकत है।

बंगाल विधानसभा चुनाव मा हिंदू समाज पहिली दाईं बांग्लादेशी घुसपैठ अउर मुस्लिम तुष्टिकरण के खराब राजनीति के खिलाफ एक मुठ्ठ होके वोट दिहिन, जेकर नतीजा आज पूरा भारत देखत है। बंगाल के जौन धरती पे 75 साल पहिले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के बिचार वाली नींव धरी रही, उहै बंगाल मा पहिली दाईं भाजपा 27 सीट के साथै सत्ता के ऊँचाई पे पहुँचि गय अउर भगवा कपड़ा पहिरे शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद क शपथ लिहिन। बंगाल के कैबिनेट मा अभी पाँचै मंत्रिन का शपथ दियावा गा है, जेमा बंगाल मा भाजपा संगठन खड़ा करै मा खास भूमिका निभावे वाले दिलीप घोष, फैशन डिजाइनर से बंगाल भाजपा के सबले तेज-तर्रार नेत्री बनी अग्निमित्रा पॉल जौन तृणमूल के खिलाफ खूब मोर्चा सँभाड़ी रही, बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थी मतुआ समुदाय के बड़े चेहरा अशोक कीर्तनिया जौन उत्तर 24 परगना जिला मा भारत-बांग्लादेश सीमा के लगे भाजपा के जमीनी संगठन बनावै मा बहुतै सक्रिय रहे हैं, छात्र राजनीति से निकरे नेता निशीथ प्रामाणिक जौन 2019 मा भाजपा मा आए रहे अउर जंगल महल के आदिवासी समुदाय के बड़े नेता खुदीराम टुडू सामिल हैं। अभी ई मंत्रीमंडल क बिस्तार होब बाकी अहै।

बंगाल मा शपथ ग्रहण समारोह के मंच पे ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के सोच के हिसाब से लघु भारत के भव्य दरसन होय रहे अउर भविष्य के राजनीति के संकेत भी मिलत रहे। आजादी मिले के बाद से आज तक बंगाल मा कांग्रेस, वामपंथ अउर तृणमूल के सरकार रही जौन तुष्टिकरण मा एकदम डूबी रहीं अउर हिंदू मनइन का दोयम दरजा के नागरिक बनाय दिहिन। हालत एतनी खराब होइ गय रही कि बंगाल के धरती पे ‘जय श्रीराम’ बोलै पे नफरत क कहर टूटत रहा। आज उहै बंगाल मा जब ‘जय श्रीराम’ के नारा गूँजत हैं, तौ बंगाल के हर सनातनी खुशी से सराबोर अहै। बंगाल मा भाजपा सरकार आवै से पच्छिम बंगाल के हिंदुअन का तुष्टिकरण के दमनकारी नीति अउर डर के माहौल से आजादी मिलि गय है।

ई जीत खाली सत्ता के बदलाव नाय आय, बल्कि बंगाल के फिर से जागै क बिगुल अहै। अब बंगाल सही मायने मा ‘सोनार बांग्ला’ बनै की ओर आगे बढ़ी। भाजपा के नेता मनइन क कहब है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अगुआई मा पच्छिम बंगाल सांस्कृतिक, आध्यात्मिक अउर आर्थिक तरक्की के नवा दौर मा कदम रखी। हार के दुख मा डूबे तृणमूल अउर विरोधी दल के नेता अभीव एसआईआर, चुनाव आयोग अउर केंद्रीय सुरक्षाबलों पे ओही पुराना आरोप लगावत हैं, जबकि सच्चाई ई है कि भाजपा ई चुनाव बहुतै लंबा संघर्ष अउर अपने कार्यकर्तान् के बलिदानी के बाद जीती है।

तृणमूल के राज मा साल 2011 से 2025 के बीच भाजपा के 321 कार्यकर्ता मारि डाले गए, उनके खिलाफ भई हिंसा मा हजारन घर उजाड़ दिहे गए, भाजपा अउर संघ के केहु कार्यकर्ता का बम से उड़ावा गा तौ केहु का पेड़ से लटकाय दिहा गा। 2021 मा तौ भाजपा कार्यकर्तान् के साथै तृणमूल के मनई क्रूरता क सारी हद पार कइ दिहिन रही। नंदीग्राम से लेके वीरभूम तक, कूच बिहार होय या बशीरहाट, चुनाव के बाद बदला लेवै के नाम पे पूरा-पूरा गाँव खाली करवाय दिहा गा रहा। 2021 के चुनावी हिंसा मा हाईकोर्ट सीबीआई जाँच क आदेस दिहिस रहा, लेकिन ममता सरकार ओमा अड़ंगा लगावत रही। आज संदेशखाली से लेके आर जी कर कांड तक के सब्बै पीड़ित परिवारन के मन मा एक नई किरन जगी है कि अब इंसाफ होके रही।

बंगाल के हिंदू जनता का नई सरकार पे भरोसो है, ओही नाते नई सरकार का भी बहुतै फुर्ती अउर सावधानी के साथै संकल्प पत्र का पूरा करै का परी। नई सरकार अपनी पहिली कैबिनेट बैठक मा जौन फैसला लिहिस है, ओसे ओकर गंभीरता अउर बंगाल की जनता के प्रति ओकर जिम्मेदारी साफ देखात है।

नयी सरकार के पहिले फैसला-

शुभेंदु मंत्रिपरिषद अपनी पहिली बैठक मा कई बड़े फैसला लिहिस है। जेमा आयुष्मान भारत योजना का बंगाल मा लागू करब, भारतीय न्याय संहिता के तीनू कानून का लागू करब अउर बीएसएफ का सीमावर्ती इलाका मा 45 दिन के भीतर जमीन सौंपब सामिल है। ममता बनर्जी के सरकार ई सब काम मा हमेसा अड़ंगा लगावत रही है। – मृत्युंजय दीक्षित

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