
भारत क कुदरती विरासत बचाउब अब खाली पसंद नाहीं, बलुक हमरी आवे वाली पीढ़ी क ताईं सबसे जरूरी काम होइगा है।
भारत, पूरी दुनिया मा सबसे ढेर अउर समृद्ध जैविक विविधता वाला देस आय, आज कुदरती संपदा क भारी संकट के सोझ ठाढ़ है। हमार नदियाँ, पहाड़, जंगल, ताल-तलैया, खनिज अउर माटी—ई सब खाली रुपिया-पइसा क पूंजी नाहीं अहैं, बलुक जिनगी क आधार आयं। बदकिसमती से, लगातार बढ़त आबादी, कल-कारखाना अउर बिना कउनो योजना के बसत सहरन क वजह से इन संसाधनन पर बेहिसाब बोझ बढ़िगा है। जउ न हम आजु तुरंत कउनो ठोस कदम नाहीं उठाइब, तौ आवे वाली पीढ़िन क हमरी ई लापरवाही क भारी नुकसान उठावै क पड़ी।
कुदरती संपदा हमरी जिनगी क हर हिस्सा से जुड़ी अहैं। पानी क किल्लत, माटी क कटाव, जंगलन क कटाई—इन सबकै सीधा असर खेती-किसानी, बिजली, उद्योग अउर आम आदमी क जिनगी पर परत अहै।
मिसाल क तौर पर:
पानी: नदियाँ अउर ताल-तलैया भारत क खेती अउर पिए क पानी क मुख्य जरिया आयं।
जंगल: जैविक विविधता क बचाव, मौसम क मिजाज बनावे अउर प्रदूषण रोकै मा जंगल बहुत जरूरी भूमिका निभावत हैं।
खनिज अउर माटी: उद्योग क तरक्की, निर्माण अउर बिजली क्षेत्र पूरी तरह इन्ही पर टिके अहैं।
हाल क रिपोर्टन अउर खबरन से ई साफ पता चलत है कि भारत कुदरती संपदा क बेतहासा इस्तेमाल अउर प्रदूषण के खतरा मा है। नदियन क पानी कम होत जात है अउर कई नदियाँ गंदी होइ चुकी अहैं। पहाड़न अउर जंगलन मा गैर-कानूनी खुदाई अउर कटाई तेजी से होइ रही है। हवा अउर जमीन मा प्रदूषण क मात्रा लगातार बढ़त जात है। जानकार लोग चेतावनी दइ रहे अहैं कि जउ न अइसने चलत रहा, तौ भारत मा पानी, अनाज अउर बिजली क सुरक्षा पर भारी संकट आइ जाई।
भारत का अपनी कुदरती संपदा बचावै क ताईं कइयौ कदम उठावै क जरूरत है:
कड़े नियम अउर निगरानी: नदियन, पहाड़न अउर जंगलन मा होय वाली गैर-कानूनी गतिविधि पर कड़ाई से रोक लगावब।
टिकाऊ विकास: कल-कारखानन अउर सहरन क बढ़ावे मा पर्यावरण क संतुलन का सबसे पहिले रखब।
जागरूकता अउर पढ़ाई: आम जनता अउर स्थानीय समुदायन का ई संपदा क महत्व बताउब अउर उनखा जागरूक करब।
कुदरती संपदा क फिर से भराई: पेड़ लगावब, पानी बचाउब अउर माटी बचावै जइसन कामन का बढ़ावा देब।
भारत क कुदरती विरासत खाली देस क ताकत नाहीं अहै, बलुक जिनगी क वजूद क गारंटी भी अहै। आज जउ न हम इन संसाधनन का बचावै मा फेल होइ गय, तौ एकर खामियाजा हमरी आवे वाली पीढ़िन का भुगतै क पड़ी। येहि ताईं सरकार, जनता अउर बड़े-बड़े उद्योग—सबका मिलिकै कुदरती संपदा क बचाव का सबसे पहिले रखै क होइ। ई खाली पर्यावरण क रक्षा नाहीं अहै, बलुक देस क टिकाऊ तरक्की अउर भविष्य क सुरक्षा क ताईं एक जरूरी धरम आय।