
dek: नई रिसर्च मा ई बात सामने आई है कि अस्थमा मा इस्तेमाल होवे वाला स्टेराइड इनहेलर हड्डिन का कमजोर कइ सकत है अउर रीढ़ के हड्डी से जुड़ी दिक्कतन का बढ़ाए सकत है।
अस्थमा के इलाज मा जे इनहेलर इस्तेमाल कीन जात हैं, उ मरीजन के तईं जान बचावे वाला साबित होत हैं। पर एक नई खोज (रिसर्च) से इनके बहुत दिनन तक उपयोग का लई के मरीजन के चिंता बढ़ि गई है। अमेरिका के जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी अउर एम्स (दिल्ली) के जानकारन के मिलल-जुलाल पढ़ाई (अध्ययन) मा ई बात सामने आई है कि स्टेराइड वाले इनहेलर हड्डिन का कमजोर कइ देत हैं अउर रीढ़ के हड्डी से जुड़ी दिक्कतन के खतरा बढ़ाए सकत हैं।
का कहत है नई स्टडी?
ई पढ़ाई नामी मेडिकल जर्नल ‘स्पाइन’ मा छपी है। एम्स के आर्थोपेडिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. भावुक गर्ग बतावत हैं कि रिसर्च मा मार्च 2006 से मार्च 2026 के बीच रीढ़ के ऑपरेशन (सर्जरी) करावे वाले मरीजन के बारे मा जांच-परख कीन गई। कुल मरीजन का तीन हिस्सन मा बांटा गवा—इनहेलर लेवे वाले अस्थमा मरीज, बिना इनहेलर वाले अस्थमा मरीज अउर साधारण मरीज। हर हिस्सा मा 768 मरीज शामिल कीन गए रहें।
नतीजा मा ई पावा गवा कि जे अस्थमा मरीज इनहेलर इस्तेमाल करत रहे, उनका ऑपरेशन के बाद ढेर दिक्कतन के सामना करे का पड़ा। इनमा से 19.7 प्रतिशत मरीजन का दू साल के भीतरै दोबारा ऑपरेशन करावे का पड़ा, जबकि पांच साल मा ई गिनती 26.3 प्रतिशत तक पहुँच गई। एकरे उलट, जे अस्थमा मरीज इनहेलर नाहीं लेत रहे, उनका परेशानी कम भई। उंहा दू साल मा खाली 7.3 प्रतिशत अउर पांच साल मा 10.2 प्रतिशत मरीजन का दोबारा सर्जरी करइ पड़ी।
रिसर्च के हिसाब से, स्टेराइड के बहुत दिनन तक इस्तेमाल से हड्डिन के मजबूती पर असर पड़त है, जेसे रीढ़ के ऑपरेशन के बाद हड्डी जुड़ै के रफ़्तार धीमी या कमजोर होई सकत है।
धुआं-धक्कड़ वाले सहरन मा जादे खतरा
एम्स के जानकारन के मानब है कि प्रदूषण से प्रभावित सहरन जइसे दिल्ली मा अस्थमा के मरीज ढेर होत हैं अउर इनहेलर के इस्तेमाल भी बढ़ि जात है, जेसे ई खतरा अउर बढ़ि जात है।
बढ़त तापमान से सांस के बीमारी के डर
मेडिकल रिपोर्टन से पता चलत है कि जब तापमान बढ़त है, तौ हवा मा ओजोन अउर पार्टिकुलेट मैटर के लेवल भी बढ़ि जात है, जेसे फेफड़न मा सूजन आइ सकत है अउर सांस लेवे मा तकलीफ होइ सकत है। ई सब चिज्जन मिल के अस्थमा मरीजन खातिर ‘ट्रिगर’ के काम करत हैं। एकरे अलावा, घाम मा पानी के कमी (डिहाइड्रेशन), इलेक्ट्रोलाइट्स के गड़बड़ी अउर थकान से भी सांस के तकलीफ बढ़ि सकत है। लू (लूह) चले के टेम पर अस्पतालन मा अस्थमा से जुड़ी इमरजेंसी मा 10-15% तक के बढ़ोतरी देखी गई है।
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