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घर बइठे खतौनी के प्रमाणित नकल: डिजिटल इण्डिया के दिशा मा उत्तर प्रदेश के मजबूत कदम

अब तहसील अउर कचहरी के चक्कर काटब भवा पुरान बात, योगी सरकार के ऑनलाइन व्यवस्था से एक क्लिक मा मिलि रही प्रमाणित खतौनी।

भारत आज बहुत तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुज़र रहा अअइ। अब सरकारी कामकाज के पुरान अउर थकावै वाले तरीकन का नई तकनीक से आसान, साफ-सुथरा अउर सबके पहुँच मा बनावा जाइ रहा अअइ। एही कड़ी मा उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठावा अअइ—खतौनी के प्रमाणित नकल का पूरी तना ऑनलाइन कइ देब। ई योजना न खाली आम जनता बरे बड़ी राहत लइके आई अअइ, बल्कि सरकारी सिस्टम का भी अउर फुर्तीला अउर पारदर्शी बनावै मा मदद कइ रही अअइ।

पहिले जब कउनो मनई का अपनी जमीन के खतौनी के प्रमाणित नकल चाही होत रहा, तौ ओका तहसील या कचहरी के कइयौ चक्कर लगावै का पड़त रहा। लम्बी लाइन मा खड़ा होब, बखत के बर्बादी, दलालन के दखल अउर फालतू के खरचा जइसन समस्यन से लोग परेशान रहत रहे। पर अब ई सब बीती बातें बनि चुकी अहैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिया अब कउनो भी मनई अपने घर बइठे, कतहुँ भी अउर कबहूँ भी, खाली अपनी जमीन के जानकारी भरिके एक क्लिक मा प्रमाणित खतौनी पाइ सकत अअइ।

कइसन मिली खतौनी?

एही नई व्यवस्था मा लोग राजस्व विभाग के सरकारी पोर्टल पर जाइके लॉगिन करत अहैं। ओकरे बाद ‘खतौनी की नकल’ वाला विकल्प चुनि के अपना जिला, तहसील अउर गाँव के नाम भरइ का पड़त है। फिर अपनी गाटा संख्या चुनइ के बाद जइसन ही तय कीन गई फीस के ऑनलाइन पइसा जमा कीन जात है, प्रमाणित नकल तुरंतै डाउनलोड बरे मिलि जात अअइ। ई पूरा काम इतना आसान अअइ कि कउनो भी आम मनई जेका बहुत ज्यादा मोबाइल या कम्प्यूटर नाहीं आवत, ऊ भी एका आसानी से कइ सकत अअइ।

24 घण्टा सेवा अउर भ्रष्टाचार पर लगाम

एही सुविधा के सबसे बड़ी खूबी ई अअइ कि ई 24 घण्टा चालू रहत है। पहिले सरकारी दफ्तर खुले के इन्तजार करइ का पड़त रहा, पर अब दिन होय या रात, कबहूँ भी खतौनी निकाली जाइ सकत अअइ। यूपीआई (UPI) जइसन डिजिटल पेमेंट से पइसा जमा करब भी बहुत सुरक्षित अउर आसान होई गवा अअइ।

डिजिटल खतौनी से बेईमानी अउर भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगी अअइ। पहिले कागजन मा हेरा-फेरी या देरी के बहुत शिकायत आवत रही, पर अब सब काम ऑनलाइन अअइ अउर ओकर एक-एक रिकॉर्ड सिस्टम मा दर्ज रहत है। एसे जनता के भरोसा भी सरकार पर बढ़ि रहा अअइ। लोगन के बखत अउर पइसा दोनों बचि रहा है, अब दफ्तर जाइ बरे छुट्टी लेइ के या लम्बी दूरी तय करइ के जरूरत नाहीं अअइ। कागज के कम इस्तेमाल से पर्यावरण का भी फायदा पहुँचि रहा अअइ।

गाँव-गिरावं बरे वरदान

गाँव मा रहइ वाले लोगन बरे ई सेवा कउनो वरदान से कम नाहीं अअइ। पहिले गाँव से सहर दफ्तर तक जाब बहुत कठिन होत रहा, पर अब इंटरनेट के फइलाव से गाँव के लोग भी एही सुविधा के फायदा उठाय रहे अहैं। एसे सहर अउर गाँव के बीच के दूरी कम होई रही अअइ। उत्तर प्रदेश सरकार के ई कोशिश ‘डिजिटल इण्डिया’ के सपन का सच कइ रही अअइ।

डिजिटल व्यवस्था मा कुछ चुनौतियाँ भी अहैं, जइसे कि सब लोगन के लगे इंटरनेट नाहीं अअइ या बुजुर्ग लोग एका समझि नाहीं पावत। पर सरकार ने एकरे बरे ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (CSC) जइसन विकल्प अउर डिजिटल पढ़ाई-लिखाई के इन्तजाम कीन अअइ, जेहसे ई दिक्कतें कम होई रही अहैं।

आने वाले बखत मा मोबाइल ऐप अउर अउर आसान तरीकन से एका अउर बढ़िया बनावै के तैयारी अअइ। कुल मिलाइके देखा जाय तौ प्रमाणित खतौनी का ऑनलाइन करब एक बहुत बड़ा बदलाव अअइ। एसे न खाली लोगन के जिंदगी आसान भई अअइ, बल्कि सरकारी सिस्टम मा भी ईमानदारी अउर फुर्ती आई अअइ।


– जनपद-लखनऊ


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