संपादकीय

प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर राजनीति कितनी जायज

भारतीय परंपरा मा गहना-गोटा बस पहिरे या सुंदरता बढ़ावे खातिर ना इस्तेमाल कीन जात रहा है। भारतीय परिवारन खातिर सोना-चांदी जइसन गहना बुरा बखत खातिर बचत के काम करत रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय परिवार बियाह-सादी के मौका पर सोना-चांदी के गहना खरीदे मा बहुत दिलचस्पी दिखावत हैं। भारतीय मेहरारूअन की कमजोरी अउर सुंदरता के जरिया रहल ई सोना अब विवादों मा आ गया है। ओकर वजह है, प्रधानमंत्री मोदी की अपील, जवने मा ऊ लोगन से एक साल तक खातिर सोना की फालतू खरीददारी टारे की अपील कीने हैं।

प्रधानमंत्री की ई अपील के अपने मायने हैं अउर जरूरत भी है। नीक तौ ई होत कि विपक्षी दल इस पर सहयोग करत, लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ई मसले पर सरकार के घेरे की कोसिस कीने हैं। उनका कहना है कि सरकार चलेवे मा नाकामी की वजह से प्रधानमंत्री लोगन से ई खरीदो अउर ई न खरीदो की अपील कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के बयान के पीछे 28 फरवरी का ईरान पर अमेरिकी हमला के बाद पैदा भयल हालात हैं। दरअसल पश्चिम एशिया मा तनाव की वजह से दुनिया भर मा सामान की सप्लाई पर संकट खड़ा हो गया है। चूंकि होमुर्ज जलडमरू मध्य पर ईरान का कब्जा है अउर अमेरिकी हमला के विरोध मा ऊ आवाजाही रोक दिहे है, जवने की वजह से दुनिया भर मा कच्चा तेल के सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है। ई वजह से जहाँ पेट्रोलियम पदार्थ मँहगा भयल है, ओहिजे सोना के दाम भी दुनिया भर मा बढ़े से आयात मँहगा हो गया है।

देश ही ना, आज पूरी दुनिया खातिर ऊर्जा के सबसे बड़ा जरिया पेट्रोलियम पदार्थ ही हैं। ई के अलावा रासायनिक खाद बनाए खातिर भी पेट्रोलियम पदार्थ ही कच्चा माल के रूप मा इस्तेमाल होत हैं। वैश्विक सप्लाई कमजोर होवे की वजह से ई सब पर होवे वाला भारी खर्च से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार इन दिनन लगातार कम होत जा रहा है। प्रधानमंत्री की अपील ई भंडार का बचावे खातिर है, काहे से भारत मा सबसे ज्यादा आयात खर्च पेट्रोलियम पदार्थ, खाद्य तेल, सोना अउर रासायनिक उर्वरक पर होत है। सरकारी आंकड़ा के मुताबिक, देश वित्त वर्ष 2025-26 मा ई चार वस्तुअन के आयात पर करीब 240 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा मा करीब 20 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च कीने है। जवन देश के कुल आयात बिल के करीब एक तिहाई है।

ईकर असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। जवन लगातार कम होत जा रहा है। एक मई का खतम भयल हफ्ता मा भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 7.7 अरब डॉलर घट के बस 690 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, देश के स्वर्ण भंडार मा भी कमी आई है, जवन पांच अरब डॉलर घट के 115 अरब डॉलर हो गया। भारत की निधि के सबसे बड़े हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति भी ई हफ्ता मा 2.7 अरब डॉलर घट के 551 अरब डॉलर रह गई।

वैसे तौ वैश्विक संकट की वजह से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है। भारत भी ओहिमा शामिल है। ई से बचे खातिर प्रधानमंत्री मितव्ययिता अउर खर्च घटावे की अपील कीने हैं।

रिजर्व बैंक अउर कारोबारी आंकड़ा के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष मा भारत कुल 775 अरब डॉलर के आयात कीने है। ई आयात मा बस चार प्रमुख वस्तुअन की हिस्सेदारी 240.7 अरब डॉलर रही। ई मा सबसे ज्यादा खर्च कच्चा तेल पर रहा। आंकड़ा के अनुसार, देश अकेले क्रूड ऑयल आयात पर करीब 134.7 अरब डॉलर खर्च कीने है। चूंकि पश्चिम एशिया मा तनाव की वजह से तेल के दाम मा भारी उछाल है, इसलिए भारत पर ई खर्च बढ़ गया है। अप्रैल मा भारत औसतन 114.48 डॉलर प्रति बैरल के दर से कच्चा तेल आयात कीने है। ई दाम की तुलना पिछले साल से करीं तौ भारी उछाल देखात है। पिछला वित्त वर्ष मा देश औसतन 70.99 डॉलर प्रति बैरल के दर से आयात कीने रहा। भारत अपने पेट्रोलियम पदार्थ के जरूरत के 88 फीसद हिस्सा आयात करत है। जाहिर है कि ई मद मा भारत का हर साल अतिरिक्त आर्थिक दबाव झेलना पड़त है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री पेट्रोल-डीजल के खपत कम करे अउर कार पूलिंग जइसन योजना अपनावे की अपील कीने हैं।

भारतीय घरन, खासकर मेहरारूअन खातिर सोना सबसे बड़ा आकर्षण रहा है। हाल के सालन मा चूंकि बैंक मा जमा धन पर खास कमाई ना हो रही है, ओकर तुलना मा सोना मा रिटर्न बढ़ रहा है। ई वजह से सोना के मांग बढ़ गई है। मौजूदा वित्त वर्ष मा भारत दूसरे नंबर पर विदेशी मुद्रा सोना के आयात मा ही खर्च कीने है। मौजूदा साल मा सोना के आयात रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। ई बढ़ोत्तरी पिछला साल के तुलना मा करीब 24 प्रतिशत ज्यादा है। जाहिर है कि ई पर भी भारत का भारी मात्रा मा विदेशी मुद्रा खर्च करेक पड़त है। चूंकि भारत स्विटजरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, पेरू, ऑस्ट्रेलिया अउर संयुक्त अरब अमीरात से सोना आयात करत है, इसलिए इहाँ भारी मात्रा मा विदेशी मुद्रा खर्च करेक पड़त है। हालांकि, पिछला साल के तुलना मा ई साल करीब 4.7 प्रतिशत कम सोना आयात भयल है। ईकर वजह दुनिया भर मा बढ़त दाम हैं। फिर भी सोना के प्रति भारतीयन के मोह कम ना भयल है। इसीलिए प्रधानमंत्री का सोना के फालतू खरीददारी टारे खातिर अपील करेक पड़ी है।

भारत मा जेतना खाद्य तेल इस्तेमाल होत है, ओकर करीब 57 से 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करेक पड़त है। ई मद मा भी भारत का भारी मात्रा मा विदेशी मुद्रा खर्च करेक पड़त है। मौजूदा वित्त वर्ष मा अब तक विदेश से वनस्पति तेल के आयात पर करीब 19.5 अरब डॉलर खर्च करेक पड़ा है। चूंकि लोगन के खान-पान पर रोक ना लगाई जा सकत, अउर खान-पान मा कटौती के कसर राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्षमता मा गिरावट के रूप मा देखाई दे सकत है, जवने का असर उत्पादन पर भी पड़ी। इसलिए ई मद मा होवे वाला खर्च रोकना आसान ना है। इसलिए प्रधानमंत्री खाद्य तेल के खर्च मा कटौती की बात सीधे तौ ना कीने हैं, लेकिन ई जरूर कहे हैं कि लोग सीमित इस्तेमाल करें।

इसी तरह रासायनिक उर्वरक के आयात 77 प्रतिशत बढ़ के 14.6 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। इसलिए मोदी किसानन से रासायनिक उर्वरक के इस्तेमाल 50 प्रतिशत तक कम करे की अपील कीने हैं। ऊ किसानन का डीजल पंप के जगह सोलर पंप अपनावे की सलाह भी दिहे हैं, ताकि पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम हो सके। कारोबारी आंकड़ा के अनुसार सिर्फ ई चार चीज के कुल आयात बिल पिछला वित्त वर्ष के तुलना मा ई बार बढ़ के 112 अरब डॉलर से 240.7 अरब डॉलर हो गया है। ई से देश के सामने संकट होवेक स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री की अपील ई संकट से बचाव का रास्ता है।

याद करीं, पिछला सदी के साठ के दशक का, जब भारत मा अपनी पूरी जनसंख्या का खियावे भर के अनाज पैदा ना हो पावत रहा। तब अमेरिका से गेहूं आयात करेक पड़त रहा। अमेरिका ईके बदले भारत का आँख दिखावत रहा। ई से बचाव खातिर तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री देश से एक शाम उपवास की अपील कीने रहे। ऊ खुद भी सोमवार के शाम उपवास रखत रहे। ई के बाद ही ऊ कृषि क्रांति के सपना देखे रहे। तब प्रधानमंत्री का लोगन साथ दिहे रहे, विपक्षी दल चाहे तब जे भी स्थिति मा रहे हों, ऊ भी प्रधानमंत्री पर सवाल ना उठाए रहे।

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