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बहराइच की पौराणिक स्थल मुनि अष्टावक्र के आश्रम की चित्तौरा झील का हो रहा है

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Date: Sun, May 31, 2026 at 9:13 AM

Subject: बहराइच क पौराणिक स्थल मुनि अष्टावक्र के आश्रम क चित्तौरा झील क होइ रहा अहै

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लेख

पर्यटन विभाग

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सूचना अउर जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

बहराइच क पौराणिक स्थल मुनि अष्टावक्र के आश्रम क चित्तौरा झील क होइ रहा अहै सुन्दरीकरण

लखनऊ: 30 मई, 2026

परदेस सरकार इको-टूरिज्म क बढ़ावा देइ बरे जनपद बहराइच क चित्तौरा झील क पर्यटन हब के रूप मा विकसित कीन जाये क फैसला लीहिस अहै। इ झील महाराजा सुहेलदेव स्मारक के मेर स्थित अहै। पर्यटन विभाग इ महत्वाकांक्षी परियोजना बरे 4.10 करोड़ रूपया क धनराशि मंजूर कीहिस अहै, जेहिमा 50 लाख रूपया क पहिली किस्त हू जारी कइ दीन्ह गयी अहै। इ झील प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ ऐतिहासिक अउर पौराणिक महत्व हू राखत अहै।

11वीं शताब्दी मा इहाँ महाराजा सुहेलदेव क सेना सैयद सालार मसूद गाजी क हराए रही। पौराणिक मान्यता अहै कि त्रेता जुग मा इ टेढ़ी नदी के नाम से जानि जात रही अउर अष्टावक्र मुनि क आश्रम हू रहा। राज्य सरकार द्वारा मंजूर कीन गयी धनराशि से एहि क्षेत्र मा पर्यटन गतिविधि क बढ़ावा मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन मा इ झील क सुन्दरीकरण करत भए इको-पर्यटन क रूप दीन जा रहा अहै। इ जगह प्राकृतिक सुन्दरता से भरल अउर ऐतिहासिक नजरि से बहुत महत्वपूर्ण अहै।

एहि क्षेत्र क विकास महाराजा सुहेलदेव के कर्मस्थली क सच्ची श्रद्धांजलि के रूप मा देखा जा रहा अहै। पर्यटन विकास परियोजना के माध्यम से झील के क्षेत्र क आधुनिक पर्यटन सुबिधा से सजावत भए एकर ऐतिहासिक धरोहर क बचाय के अउर देखाय के काम कीन जाई, ताकि आवे वाले लोग इहाँ प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ परदेस के गौरवशाली इतिहास क हू जानकारी पाइ सकें।

परदेस मा साल 2025 मा 34 लाख से बेसी सैलानी बहराइच घूमे रहेन। एहि परियोजना के तहत अलग-अलग बुनियादी सुबिधा के विकास पर करोड़ों रूपया खरच कीन जा रहा अहै। एहिमा कैफ़ेटेरिया ब्लॉक बरे सबसे ढेर 158.83 लाख रूपया अउर डेक अउर बोट जेट्टी के बनावे पर 56.31 लाख रूपया खरच होई। एकरे अलावा टिकट काउंटर ब्लॉक, शौचालय, पिए क पानी, अउर दूसर जरूरी बुनियादी सुबिधा के विकास बरे रुपिया तय कीन गवा अहै। एहि परियोजना मा सीसी इंटरलॉकिंग, सीसी सड़क, पानी क सप्लाई अउर सीवरेज, पानी क बचाव (वर्षाजल संचयन), ड्रेनेज अउर बिजली क काम हू सामिल कीन गवा अहै। साथे-साथ सुरक्षा अउर सुन्दरीकरण के तहत सीसीटीवी सिस्टम, बायोफेंसिंग, बगिया क काम अउर बैठे क इन्तजाम आदि तैयार कीन जाई।

चित्तौरा झील क एहि परियोजना मा इमबैंकमेंट वर्क अउर ड्राई स्टोन पिचिंग पर हू खास जोर दीन गवा अहै। बहराइच क इ ऐतिहासिक झील नीक पर्यटन स्थल के साथ-साथ बहादुरी अउर पराक्रम क कहानी समेटे अहै। एहि झील क पौराणिक महत्व अहै। राजा जनक के गुरू मुनि अष्टावक्र क एहि झील के तीरे आश्रम रहा। मुनि अष्टावक्र क देहिया जइसे आठ जगह से टेढ़ रहा, उवैसे इ टेढ़ी नदी हू अपने आकार बरे परसिद्ध रही अहै। पाछे इ चित्तौरा झील के रूप मा मशहूर भइ। चित्तौरा झील के पूरा विकास से इ परियोजना उत्तर प्रदेश मा इको-टूरिज्म क नई राह देखाय वाली साबित होई।

बहराइच जिला अपने प्राकृतिक सुन्दरी अउर घने जंगल अउर जंगली जनवरन बरे परसिद्ध अहै। इ पहले से ही कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य बरे देस-बिदेस मा अपनी पहिचान बनाय चुका अहै। नेपाल सरहद से सटल एहि क्षेत्र के देहाती इलाका आपसी भाईचारा, समृद्ध थारू संस्कृति अउर तेजी से बढ़त होम-स्टे मॉडल के जरिया पर्यटन क नई ऊँचाई पर पहुँचावत अहैं। एकरे साथे-साथ बिछिया से मैलानी तक चले वाली विस्टाडोम कोच के माध्यम से सैलानी घने जंगलन, हरियाली अउर मनमोहक प्राकृतिक नजारा क मजा लेइ सकत अहैं। इ पूरा इलाका इको-टूरिज्म के नजरि से बहुत समृद्ध अहै।

मेजा मा स्थित कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र क ईको-टूरिज्म के नये केन्द्र के रूप मा मिली पहिचान

जनपद प्रयागराज ऐतिहासिक अउर सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ महाकुंभ समेत अलग-अलग धरम करम के आयोजन बरे देस-बिदेस मा मशहूर अहै। पिछले साल महाकुंभ-2025 के दौरान लगभग 68 करोड़ धरम-करम वाले लोग देस-बिदेस से पुन्य कमाए आए रहेन। यूनेस्को द्वारा महाकुंभ क दुनिया क सबसे बड़ा मेला माना गवा अहै। प्रयागराज मा ढेर सारे आस्था के थान अहैं। एकरे अलावा अलग-अलग तिउहारन पर साल भर श्रद्धालु संगम मा आस्था क डुबकी लगावे आवत रहत अहैं। राज्य सरकार प्रयागराज मा सैलानिन अउर श्रद्धालु लोगन बरे आधुनिक सुबिधा क विकास कीहिस अहै। सैलानिन क खींचे बरे कइयू जगहिन क पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप मा विकसित कीन जा रहा अहै। प्रयागराज अब पर्यटन के क्षेत्र मा अपनी नई पहिचान बनावे की ओरी बढ़त अहै।

प्रयागराज के मेजा मा स्थित कृष्ण-मृग आरक्षित क्षेत्र मा बन रहे इको पार्क क काम तेजी से होइ रहा अहै। लगभग 05 करोड़ रूपया क लागत से बन रहे इहाँ के पर्यटन विकास योजना क लगभग 70 फीसदी काम पूरा होइ चुका अहै। उ0प्र0 पर्यटन विभाग के एहि पहल से क्षेत्र मा ईकोटूरिज्म क नई पहिचान मिली। एहिमा वॉच टावर, कैंटीन अउर बर्ड-जोन समेत कइयू सुबिधा तैयार कीन जा रही अहैं। यूपीपीसीएल क ओर से कराये जा रहे निर्माण काम मा सैलानिन क सुबिधा अउर प्राकृतिक माहौल क बचावे पर खास जोर दीन जा रहा अहै।

एहि कृष्ण मृग परियोजना के तहत बढ़िया फाटक, इंटरलॉकिंग पार्किंग, सुन्दर साइनेज, बैठे क इन्तजाम, शौचालय, कैंटीन ब्लॉक, वॉच टावर अउर गजीबो-हट जइसन सुबिधा बनायी जा रही अहैं। ईको-पार्क मा चिरइन क गतिविधि क्षेत्र, हार्टीकल्चर अउर लैंडस्केपिंग, सिंचाई क प्रबन्ध, बायो फेंसिंग अउर चेन लिंक फेंसिंग क काम करावा जा रहा अहै, जेहसे प्राकृतिक सुन्दरता अउर जीव-जन्तु सुरक्षित रहि सकें। अक्टूबर 2025 मा सुरू भइ इ परियोजना क अप्रैल 2027 तक पूरा करे क लक्ष्य धरा गवा अहै। अब तक 3.62 करोड़ से बेसी क रुपिया जारी कीन जा चुका अहै। हियाँ के रहै वाले मनइन क मानब अहै कि ईको-पार्क बने के बाद मेजा क्षेत्र परदेस के खास ईको-टूरिज्म जगहिन मा सामिल होइ जाई।

एहि पार्क के बन जाये से सैलानिन क गिनती मा बढ़ोत्तरी होई। साथे ही हियाँ के जवानन बरे रोजगार क नया मौका मिली। परदेस सरकार पर्यटन स्थलिन क आधुनिक सुबिधान से जोड़त भए ईको-टूरिज्म क बढ़ावा देइ बरे लगातार काम करति अहै। मेजा मा स्थित कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र मा बन रहा ईको-पार्क प्राकृतिक पर्यटन, पर्यावरण बचाव अउर स्थानीय रोजगार के नजरि से बहुत जरूरी परियोजना अहै। राज्य सरकार क कोसिस अहै कि उ0प्र0 के प्राकृतिक अउर जंगली क्षेत्रन क देस के स्तर पर नई पहिचान मिले, जेहसे

पर्यटन क साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था कऊँ भी मजबूती मिलि सकै।

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केवल, सेनि0 सूचना अधिकारी

लेख

उद्यान विभाग

पत्र सूचना शाखा

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

आधुनिक कृषि तकनीिकन अउर सरकारी प्रोत्साहन से मनोहर सिंह क खेती क मिली समृद्धि क नई राह

लखनऊ: 30 मई, 2026

आज क दौर मा खेती केवल पारंपरिक जीविका क साधन नाहीं रहि गय बा, बल्कि ई एक लाभकारी अउर आधुनिक व्यवसाय क रूप मा उभरत अहै। अन्नदाता किसानन क उत्थान अउर ओन्हरे स्वावलंबन खातिर केंद्र अउर प्रदेश सरकार लगातार कोसिस करत अहैं। बदलत समय क साथ जउ कृषक नई तकनीिकन अउर वैज्ञानिक तरीकन क अपनावइँ, तउ सीमित साधनन मा भी नीक उत्पादन अउर ढेर आय पावा जाइ सकत अहै। प्रदेश मा खेती-बारी क असीमित संभउना से किसानन क ढेर से ढेर लाभ पहुँचावइ अउर अर्थव्यवस्था क गति देइ खातिर सक्रिय कोसिस कीन गय बा। बढ़िया गुणवत्ता वाले बीया, हाइब्रिड किसिम अउर जैविक बीयन से फसल क उपज अउर पैदावार क बढ़ावा मिला बा। नीक कोसिसन अउर नई तकनीकन क वजह से खेती क क्षेत्र मा गजब क परिणाम मिले अहैं, जेहसे किसानन क सीधा रूप से ढेर उपज अउर आय मिलि रही बा अउर देस क उत्पादन मा राज्य क हिस्सा बढ़ि गवा बा।

इसनेइ एक प्रेरणादायक कहानी जनपद आजमगढ़ क विकास खंड अजमतगढ़ क मेघई खास गाँव क रहइया किसान मनोहर सिंह क अहै, जउन आपन मेहनत, लगन अउर नई तकनीिकन क अपनाइके खेती क क्षेत्र मा बढ़िया सफलता पाइन अहैं। स्नातक पढ़ल-लिखल मनोहर सिंह आपन 1.50 हेक्टेयर खेती क जमीन पर उन्नत खेती अपनाइन अहै। पहिले उहूँ दूसर किसानन नियर पारंपरिक खेती पर ही निरभर रहे। ओन्हर खेती पूरी तरह से पुरान तरीकन से होत रही, जेहमा ढेर मेहनत, ढेर लागत अउर कम मुनाफा जइसन समस्या आम रही। सिंचाई खातिर ढेर पानी अउर मेहनत क जरूरत परत रही, उहईं रोपनी अउर सोहनी-कोड़नी मा भी काफी खरचा आवत रहा। इन सब कारनन से खेती क लागत लगातार बढ़त जात रही, जबकि पैदावार अउर मुनाफा बहुतै कम रहा।

मनोहर सिंह जब खेती करब सुरू कीन तउ तमाम समस्या ओन्हरे सामने आवइ लागिन। पुरान सिंचाई व्यवस्था क कारन पानी क बर्बादी होत रही अउर समइ पर सिंचाई न होय से फसल पर खराब असर परत रहा। एकरे अलावा, कीड़ा अउर बियाधिन क परकोप भी फसलन क नुकसान पहुँचावत रहा, जेहसे पैदावार घटि जात रही। बजार मा भी ओन्हका आपन फसल क सही दाम नाहीं मिलत रहा। एह कारन खेती से मिलइ वाली आय अतनी नाहीं रही कि परिवार क जरूरत आसानी से पूरी कीन जाइ सकै। मजदूरी क खरच भी एक बड़ी समस्या रही। मजदूरन क न मिलब अउर बढ़त मजदूरी क कारन खेती क खरचा लगातार बढ़ि जात रहा। इन सब समस्या क नाते मनोहर सिंह क कइयो बार ई लागत रहा कि खेती छोड़ि के कउनो दूसर काम कीन जाय, मुला इहै बीच ओन्हका प्रदेश सरकार क किसानन खातिर जिम्मेदार अउर नीक रवैया क साथ-साथ किसानन क भलाई खातिर कइयो सरकारी योजनन क बारे मा सुनइ क मिला अउर उहइँ से उ ढेर जानकारी खातिर सरकारी दफ्तरन मा संपर्क करब सुरू कीन।

इहै सब कोसिसन क बीच मनोहर सिंह क उद्यान विभाग द्वारा चलावल जाय वाली एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनन क जानकारी मिली। उ इन योजनन क बारे मा विस्तार से जानकारी पाइन अउर ओन्हका आपन खेती मा इस्तेमाल करब सुरू कइ दिहिन। इहैं से ओन्हरे जिन्दगी मा एक बड़ा बदलाव आवइ लाग जेहका ई कहि सका जात है कि ओन्हरे जीवन मा एक बड़ा मोड़ (टर्निंग पॉइंट) आइ गवा। उ सबते पहिले ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ माइक्रो इरिगेशन योजना क तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली क अपनाइन। एह तकनीक से पानी सीधे पेड़न क जरि तक पहुँचत है, जेहसे पानी क बर्बादी रुक जात है अउर पेड़न क पूरी नमी मिलत है। ई तरीका अपनावइ से ओन्हरे खेत मा लगभग 40 से 50 फीसदी तक पानी क बचत भई। साथै-साथ, खाद भी सीधे जरि तक पहुँचे लागी, जेहसे पेड़न क बढ़त नीक भई।

एकरे अलावा मनोहर सिंह बढ़िया बीया क इस्तेमाल सुरू कीन, जेहसे फसल क गुणवत्ता अउर पैदावार दूनो मा भारी बढ़ती भई। उ पुरान फसलन क जगह टमाटर, तरह-तरह क तरकारियन, फल अउर दवा वाले पेड़न (औषधीय पौधा) क खेती भी सुरू कइ दिहिन। ई बदलाव ओन्हरे खातिर बहुतै फाइदेमंद साबित भवा। उ खाली नई फसलन क नाहीं अपनाइन, बल्कि आधुनिक खेती क तरीकन क भी आपन खेत मा पूरी तरह से लागू कीन। उ मल्चिंग तकनीक क इस्तेमाल कीन, जेहसे माटी मा नमी बनी रहत है अउर खर-पतवार बहुतै कम जमत है। एहसे मेहनत क जरूरत कम भई अउर खरचा मा भी भारी कमी आई। उ खुदै पौध तैयार करइ क लोटनल तरीका अपनाइन, जेहसे ओन्हका बाहरी लोगन पर निरभर नाहीं रहइ का परा। एहसे ओन्हर लागत अउर कम होइ गई अउर पौध क गुणवत्ता पर ओन्हर पूरा काबू होइ गवा।

फसल रोपत समय मनोहर सिंह पेड़न क बीच क वैज्ञानिक दूरी बनाइ रखिन, जेहसे पेड़न क पर्याप्त जगह मिली अउर ओन्हर बढ़त नीक भई। एहसे पैदावार मा गजब क बढ़ती देखइ क मिली। मनोहर सिंह क सफलता क ओन्हरे आर्थिक आँकड़न से भी आसानी से समझा जाइ सकत है। उ आपन फसल उगावै मा कुल लगभग 2 लाख रुपिया क खरचा कीन रहेन। आधुनिक तकनीकन अउर बढ़िया रख-रखाव क नाते ओन्हका लगभग 150 कुंतल पैदावार मिली। एह पैदावार से ओन्हका बजार मा कुल लगभग 9 लाख रुपिया क आय भई। जउ लागत क घटावा जाय, तउ ओन्हर असली मुनाफा लगभग 7 लाख रुपिया रहा। ई आय पारंपरिक खेती क तुलना मा कइयो गुना ढेर अहै।

मनोहर सिंह क एक अउर जरूरी फैसला बहु-फसली खेती अपनाउब रहा। उ एकही खेत मा अलग-अलग समय पर तरह-तरह क फसलन क पैदावार करब सुरू कीन। एहसे ओन्हका कइयो तरह क लाभ मिले। पहिला लाभ ई भवा कि बजार क उतार-चढ़ाव क असर ओन्हरे पर कम परा। जउ कउनो एक फसल क दाम कम भी होइ गवा, तउ दूसर फसलन से ओकर भरपाई आसानी से होइ जात रही। दूसरा लाभ ई भवा कि साल भर कमाई क जरिया बना रहा, जेहसे ओन्हरे परिवार मा माली मजबूती आई। फल, तरकारी अउर औषधीय पेड़न क खेती से ओन्हका पारंपरिक फसलन क तुलना मा 3 से 5 गुना ढेर मुनाफा मिला। थोरकी जमीन मा ढेर पैदावार अउर बढ़िया गुणवत्ता ओन्हरी आमदनी क नई ऊँचाई तक पहुँचाए दिहिस।

मनोहर सिंह आपन ई बढ़िया गुणवत्ता वाली उपज क स्थानीय मंडी मा बेंचत अहैं। ओन्हरी फसल क गुणवत्ता नीक होय क नाते ब्यपारियन से ओन्हका हमेसा नीक दाम मिलत है। लगातार तुड़ाई अउर बजार मा समय पर माल पहुँचावत रहइ से बजार मा ओन्हर भरोसा भी काफी बढ़ि गवा है। ओन्हरी सफलता क देखि के आसपास क इलाका क किसान भी ओन्हसे लगातार सीख लेत अहैं अउर ओन्हरे द्वारा अपनाई गई आधुनिक तकनीकन क आपन खेतन मा आजमावइ क कोसिस करत अहैं। आजु मनोहर सिंह एक सफल अउर प्रगतिशील किसान क रूप मा आपन पहिचान बनाइ चुके अहैं। ओन्हरी खेती न केवल ओन्हरे परिवार क माली हालत क मजबूत करत अहै, बल्कि गाँव क अर्थव्यवस्था कऊँ भी गति देइ रही अहै।

सीमित संसाधनन के बीच नीक प्रबंधन अउर नई सोच के सहारे मनोहर सिंह जौन मुकाम हासिल करे अहैं, उ जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग अउर विभागीय योजनन क पहुंच क देखावत अहै। खेती क घाटा के सौदा से उबारि के एक मुनाफा वाले व्यवसाय मा बदले क ई कोसिस दूसर क्षेत्रन के किसानन क भी प्रेरित करत अहै।

मनोहर सिंह आजु दूसर किसानन सेउ इहै अपील करत अहैं कि ओए लकीर क फकीर बने के बजाय आधुनिक तौर-तरीकन क सीखें। उद्यान विभाग अउर जिला प्रशासन के माध्यम से मिले वाला तकनीकी प्रशिक्षण, नीक किसिम के बीअन अउर ड्रिप सिंचाई जइसन तरीकन क अपनाइ के लागत मा बड़ी कटौती कीन जाइ सकत अहै, जेहसे सीधे तौर पर मुनाफा क ग्राफ बढ़त अहै।

खेती-किसानी के क्षेत्र मा इही तरह के व्यक्तिगत प्रयास तबहीं सफल होत अहैं जब ओन्हन क सरकारी नीतियन क मजबूत संरक्षण मिलत अहै। प्रदेश सरकार क जनकल्याणकारी नीतियां अउर कृषि विकास योजना आजु सीधे तौर पर धरातल पर लागू होत अहैं, जेहसे गांव-गिरांव क परिदृश्य बदल रहा अहै। मनोहर सिंह जइसन प्रगतिशील किसानन क सफलता इ बात क साफ प्रमाण अहै कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था अउर कल्याणकारी सरकारी योजना मिलिके कइसन ग्रामीण भारत मा आर्थिक आत्मनिर्भरता के नवा रास्ता खोलत अहैं अउर खेती-किसानी क समृद्धि क एक नई दिसा देत अहैं।

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जनपद: आजमगढ़

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