
दक्खिन एशिया के बदलत भू-राजनैतिक बिसात पर अब एक नया अउर बहुत खतरनाक समीकरण तेजी से बनत बा। भारत-बिरोधी रवैया खातिर लम्बे समय से चर्चा में रहल तुर्किये अब खाली पाकिस्तान तक सीमित नाहीं रहल, बल्कि उ बांग्लादेश के साथ भी आपन रक्षा अउर सामरिक रिश्ता तेजी से बढ़ावे लागल बा। ढाका पहुँचके तुर्किये के बिदेश मंत्री हाकान फिदान जिस तरह बांग्लादेश के दक्खिन एशिया के सुरक्षा ढाँचा के महत्वपूर्ण खम्भा बताइन, ओसे नई दिल्ली के चिंता अउर बढ़ गईल बा। एह बयान के भारत के चारों ओर रणनीतिक दबाव बनावे के एगो सोची-समझी चाल के रूप में देखल जा रहल बा। तुर्किये साफ संकेत दे दिहले बा कि उ दक्खिन एशिया में आपन मौजूदगी खाली व्यापार या मानवीय सहायता तक सीमित नाहीं राखे के चाहत। ढाका में भइल उच्च-स्तरीय बातचीत में रक्षा सहयोग, रक्षा उत्पादन, सामरिक साझेदारी अउर आर्थिक बिस्तार पर जवने गंभीरता से चर्चा भइल, उ भारत खातिर मामुली बात नाहीं ह। बांग्लादेश तुर्किये के रक्षा सामग्री बनावे में निवेश करे के खुला न्योता दिहले बा। दुनो देसन पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़के रणनीतिक साझेदारी के रस्ता पर चले के बात कहले बाड़न। ई वही तुर्किये ह जवन पाकिस्तान के साथ मिलके बरसन तक भारत-बिरोधी मोर्चाबंदी कइलस, कश्मीर मुद्दा पर खुलके इस्लामाबाद के साथ दिहलस अउर इस्लामी सहयोग संगठन के मंच पर भारत के खिलाफ माहौल बनावे के कोसिस कइलस।
उधर, दिल्ली के सबसे बड़ चिंता ई बा कि तुर्किये अब भारत के पच्छिमी मोर्चे पर पाकिस्तान अउर पूरबी मोर्चे पर बांग्लादेश के साथ एकै साथ सामरिक रिश्ता बनावत बा। ई दुतरफा दबाव के रणनीति नियर दिखात बा। पाकिस्तान पहिले से ही तुर्किये के रक्षा उद्योग, ड्रोन तकनीक अउर सैन्य प्रशिक्षण के फायदा उठावत बा। अब अगर ओही ढाँचा के पहुँच बांग्लादेश तक भइल, त भारत खातिर सुरक्षा समीकरण अउर जटिल हो जईहें। खास तौर पर तब, जब बांग्लादेश में सत्ता पलटे के बाद नई सरकार आपन बिदेश नीति के नए ढंग से गढ़े के कोसिस करत बा। एकरा अलावा, तुर्किये अउर बांग्लादेश के बीच खाली रक्षा सहयोग ही नाहीं, बल्कि आर्थिक अउर संस्थागत साझेदारी भी तेजी से बढ़त बा। दुनो देस व्यापार के तेरह अरब डॉलर से बढ़ाके बीस अरब डॉलर तक ले जाए के तैयारी करत बाड़न। बिशेष आर्थिक क्षेत्रन में तुर्किये के निवेश के न्योता दिहल गइल बा। कपड़ा, दवा बनावे, जहाज बनावे अउर नवीकरणीय ऊर्जा नियर क्षेत्रन में सहयोग बढ़ावल जात बा। ढाका में अंतरराष्ट्रीय स्तर के अस्पताल अउर नर्सिंग संस्थान खोले के प्रस्ताव भी दिहल गइल बा। ई साफ देखात बा कि तुर्किये खाली सैन्य साझेदारी ही नाहीं, बल्कि लम्बा समय तक असर राखे वाली नीति पर काम करत बा।
सबसे महत्वपूर्ण बात ई बा कि तुर्किये दक्खिन एशिया में खुद के मुस्लिम दुनिया के प्रभावशाली संरक्षक के रूप में स्थापित करे के चाहत बा। रोहिंग्या मुद्दा पर ओकर सक्रियता, गाजा पर आक्रामक बयाबाजी अउर बांग्लादेश के साथ मानवीय सहयोग एहू रणनीति के हिस्सा ह। लेकिन एकरा पीछे छिपल बड़ उद्देश्य क्षेत्रीय परभाव बढ़ावे अउर भारत के सामरिक चुनौती के तगड़ा कइल बा। वैसे त तुर्किये लगातार ई कहत बा कि भारत के ओकर पाकिस्तान से रिश्ता के चलते ओसे दूरी ना बनावे के चाहीं। लेकिन असली सवाल भरोसा के बा। राष्ट्रपति एर्दोआन कई बेर खुलके कश्मीर पर पाकिस्तान के समर्थन में बयान दे चुकल बाड़न। तुर्किये पाकिस्तान के साथ आपन रक्षा रिश्ता भी बहुत मजबूत कइ लेले बा। इतना ही नाहीं, पिछला साल भारत अउर पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के दौरान तुर्किये पाकिस्तान के रक्षा उपकरण अउर ड्रोन तक मुहैया करवले रहे। भारत पाकिस्तान के तर्फ से आइल जवन कई ड्रोन गिरावल रहे, ओमें तुर्किये में बनल ड्रोन भी शामिल रहे। अइसे में तुर्किये के भारत से दोस्ती अउर संतुलन के बात कइल नई दिल्ली के एगो सोची-समझी रणनीतिक चाल लागल बा।
यही बजह से भारत भी अब तुर्किये के ओही के भाषा में जवाब देत बा। दरअसल, भारत हाल के बरसन में साइप्रस अउर आर्मेनिया के साथ आपन रक्षा संबंधन के तेजी से मजबूत कइले बा। आर्मेनिया अब भारतीय हथियार्न के बड़ खरीदार बन चुकल बा। साइप्रस के साथ भी भारत रणनीतिक अउर रक्षा सहयोग बढ़ावत बा। ई सीधा-सीधा तुर्किये के संदेश बा कि अगर अंकारा भारत के पड़ोस में दखल बढ़ाई, त नई दिल्ली भी तुर्किये के सामरिक क्षेत्र में जवाबी दबाव बनाई। जवन तरीका से तुर्किये पाकिस्तान अउर अब बांग्लादेश के जरिया भारत के घेरे के कोसिस करत बा, ओही तरह भारत भी तुर्किये के बिरोधी या प्रतिस्पर्धी देसन के साथ संबंध मजबूत करत बा। ई नई शीत प्रतिद्वंद्विता के संकेत ह।
उधर, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बिदेश नीति भी एह समय भारत खातिर गहरी चिंता के बिषय बनत जात बा। भारत के तर्फ से सबसे पहिले आधिकारिक यात्रा के न्योता मिलला के बावजूद रहमान पहिले मलेशिया अउर फिर चीन जाए के फैसला कइलन। ढाका साफ तौर पर ई संदेश देवे के कोसिस कइलस कि उ अब खाली भारत पर निर्भर रहे वाली नीति से आगे बढ़े के चाहत बा। खास बात ई बा कि चीन यात्रा के दौरान तीस्ता परियोजना समेत कई बड़ रणनीतिक मुद्दन पर बातचीत के संभावना जतात जात बा। साथ ही तारिक रहमान के मलेशिया यात्रा के खाली एगो सामान्य बिदेश दौरा के तौर पर ना देखल जात बा। एकरा पीछे साफ रणनीतिक सोच देखात बा। बांग्लादेश ना चाहत रहे कि नई सरकार के पहिली बिदेश यात्रा सीधा भारत या चीन में से कवनो एक देस के तर्फ झुकाव के संकेत दे। यही बजह से ढाका मलेशिया के पहिले पड़ाव के तौर पर चुनलस, ताकि उ खुद के तटस्थ देखा सके अउर भारत, चीन प्रतिस्पर्धा से दूरी बनावे के संदेश दे सके। लेकिन एकर राजनीतिक अउर सामरिक मायने बहुत बड़ बा। मलेशिया यात्रा के बाद चीन जाए के तैयारी ई संकेत देत बा कि बांग्लादेश अब आपन बिदेश नीति के नया संतुलन के साथ आगे बढ़ावे के चाहत बा। एकरा से भारत के चिंता एहसे बढ़त बा कि ढाका अब एक साथ चीन, तुर्किये, पाकिस्तान अउर अन्य इस्लामी देसन के साथ आपन रिश्ता मजबूत करे के दिसा में बढ़त देखात बा। ई आवे वाला समय में भारत खातिर कूटनीतिक अउर रणनीतिक चुनौती के अउर कठिन बना सकेला।
देखा जाई त भारत खातिर ई समय बहुत सचेत रहे के बा। पाकिस्तान के साथ तुर्किये के साझेदारी पहिले ही चिंता के कारण रहे, लेकिन अब अगर बांग्लादेश भी ओही धुरी के हिस्सा बने लागे, त ई भारत के पूरबी सुरक्षा ढाँचा खातिर गंभीर चुनौती बन सकेला। हालांकि भारत के कम आंकल ढाका, इस्लामाबाद अउर अंकारा तीनों के सबसे बड़ भूल साबित हो सकेला। भले ही बांग्लादेश चीन, पाकिस्तान अउर तुर्किये के साथ मिलके नया समीकरण बनावे के कोसिस करे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीति बहुत दूरदर्शी अउर बहुस्तरीय मानल जाला। कबो-कभार अइसे लाग सकेला कि भारत चुप काहे बा, लेकिन इतिहास गवाह बा कि सही समय आवे पर प्रधानमंत्री मोदी के जवाब बहुत सटीक अउर ताकतवर होला। कूटनीति के जवाब कूटनीति से अउर रणनीतिक चालन के जवाब ओसे भी बड़ चाल से देबे के मोदी जी के काम करे के तरीका रहल बा। यही बजह से आज भारत खाली आपन बिरोधियन के गतिविधि पर नजर नाहीं राखत, बल्कि उनकर हर कदम के जवाब देबे खातिर समानांतर रणनीतिक मोर्चा भी तैयार करत बा।
-नीरज कुमार दुबे