जीवनशैली

बार-बार आंख फड़के का न करं नजरअंदाज: होइ सकत अहै तनाव, थकान अउर नसों कय कमजोरी कय बड़ इशारा

आंख फड़के के समस्या बहुत चिंता के बात तौ नइखे होत, पर जवन मनई कय ई बार-बार होत अहै, तौ उ ‘बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म’ (BEB) के वजह से होइ सकत अहै। कभौं-कभौं अइसन दुर्लभ मामला भी देखल गय अहै जहवां ई कवनो गंभीर बीमारी के इशारा होय। अइसन काहे होत अहै, एकर का लक्षण अहै, अउर कब ई परेशानी कय रूप लइ लेत अहै, हम ई लेख में जानब।

का अहै ई परेशानी?
अचानक एक या दुनों पलक फड़के लगैत अहै। ई तौ सामान्य प्रक्रिया अहै, लेकिन जदि ई गंभीर भइ गय तौ आंख कय रोशनी कय ऊपर भी असर पड़ि सकत अहै। ई तौ कवनो के साथ भी होइ सकत अहै, लेकिन बीच उमर कय या बुजुर्ग मेहरारू लोगन कय ई समस्या जादा होत अहै।

का अहै कारण?
थकान, जादा कैफीन या तनाव एकर मुख्य वजह होइ सकत अहै। लगातार आंख फड़के कय परेशानी ‘बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म’ कहल जात अहै, जवने में दुनों आंख एकै समय फड़केत अहै। शोध में अबहीं तक एकर सही कारण तौ नइखे पता चल पाय, लेकिन आंख के अगल-बगल कय मांसपेशियन में गड़बड़ी भइै पर अइसन होइ सकत अहै। कछू लोगन में आनुवंशिक कारण (जेनेटिक्स) से भी आंख जादा फड़केत अहै।

कई बार दिमाग या नर्वस सिस्टम से जुड़ल ई परेशानी भी आंख फड़के के कारण बनत अहै:

• पार्किंसन्स रोग
• दिमाग में चोट या स्ट्रोक
• मानसिक स्वास्थ्य कय कवनो खास दवा
• मल्टीपल स्केलरोसिस
• बेल पाल्सी
• हेमिफेशियल स्पाज्म

मैग्नीशियम कय कमी भी बन सकत अहै कारण
आंख कय मांसपेशी में फड़फड़ाहट मैग्नीशियम कय कमी से भी होइ सकत अहै। खान-पान सही न होय या शरीर में पोषक तत्व ठीक से न सोखाय, तब भी ई समस्या होइ सकत अहै।

इन्हन का अहै जादा खतरा:
• सिर मा कवनो चोट लाग होय।
• जदि परिवार में कवनो का ई समस्या होय।
• जदि मानसिक स्वास्थ्य कय कवनो दवा चलत होय।

अइसन दिखत अहै लक्षण:
• आंख में जलन होय।
• बार-बार आंख झपके।
• रोशनी से तकलीफ (सेंसिटिविटी) होय।
• आंख सूखा लागय (ड्राई आइज)।
• लगातार आंख फड़के से देखे में दिक्कत होय।

जदि आंख फड़के कय समस्या क्रोनिक होय:
जदि आंख फड़के कय समस्या गंभीर भइै, तौ पलक अउर आंख कय आसपास कय हिस्सा कय हमेशा बर नुकसान होइ सकत अहै। अइसन परेशानी होइ सकत अहै:

• पलकें सामान्य से जादा नीचे लटक सकत अहै।
• भंव (आइब्रोज) सामान्य से जादा नीचे होइ सकत अहै।
• आंख के ऊपर या नीचे एक्स्ट्रा चमड़ी जमा होइ सकत अहै।
• पलकें अजीब ढंग से मुड़ सकत अहै।

अइसन कर सकत अहैं बचाव:
• कैफीन कम से कम लियं।
• नींद पूरी करं।
• तनाव से बचं।
• डॉक्टर कय सलाह पर आईड्रॉप कय इस्तेमाल करं।
• धूप में सनग्लास (धूप का चश्मा) लगाय के निकरं।

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