
आयुर्वेद कय ग्रंथन मां इलाज कय खातिर चार तरह कय चिकनाई वाला पदार्थ बतावा गवा अहै- घी, तेल, अउर जनावरन कय मांस अउर हड्डी कय मज्जा से निकरा वसा। जड़ी-बूटी अउर खाना कय गुण कय अपने मां समाए लिहैक अउर आपन मूल स्वभाव बनाय रखैक कय कारन घी कय सब चिकनाई वाले पदार्थन मां सबसे नीक मानि जात अहै।
डॉ. आर. वात्स्यायन (आयुर्वेदाचार्य, लुधियाना) बतावत अहैं कि संस्कृत मां एकय घृतम् अउर सर्पि कहा गवा अहै। सदियन से घी न खाली वैदिक पूजा-पाठ कय हिस्सा रहा अहै, बलकि भारतीय रसोई मां भी एकय बहुत बड़ स्थान मिला रहा अहै। गाय, भैंस कय दूध कय अलावा बकरी, ऊंट अउर घोड़ी कय दूध से बना घी कय इस्तेमाल आयुर्वेद इलाज मां कीन जाइ सकत अहै।
गुणन से भरपूर होत अहै घी
सुश्रुत घी कय खासियत बतावत लिखिन अहै कि इ स्वाद मां मीठा, सुभाव मां ठंडा अउर हल्का होत अहै। इ बिगड़ल वात अउर पित्त कय शांत करत अहै। आयुर्वेद कय जानकार एकय स्वादिष्ट, याददास्त बढ़ावे वाला, बुद्धिमानी, चमक अउर कोमलता बढ़ावे वाला बताइन अहै। आयुर्वेदिक ग्रंथन मां गाय कय घी कय शरीर कय सात ऊतकों- पाचन रस, रकत, मांस, वसा, हड्डी, मज्जा अउर प्रजनन ऊतक कय बढ़ावे वाला बतावा गवा अहै। एकय फुर्ती देवे वाला अउर कायाकल्प करे वाला तत्त्व मानि जात अहै।
घी पेट साफ करे वाला होत अहै अउर इ बहुतै बीमारी मां फायदेमंद साबित होत अहै, जइसे कि मिर्गी, पागलपन, केमिकल से भवा जहर, सिरदर्द (माइग्रेन) अउर शरीर कय बाहरी छिद्रन से जुड़ल बीमारी।
असाध्य बीमारी कय खातिर काम कय औषधि
घी कय इस्तेमाल बाहर अउर भीतर दूनों तरह कय औषधि कय रूप मां कीन जाइ सकत अहै। शास्त्रन मां घृत चिकित्सा कय जिक्र अहै, जवने मां अलग-अलग तरह कय घी से इलाज कीन जात अहै। एकय खातिर, चुनिंदा जड़ी-बूटियन कय काढ़ा शुद्ध घी मां पकावा जात अहै, जइसे कि ओकर असरदार तत्त्व घी मां मिलि जाँय।
घी कतई दिन पुराना अहै, ओकर आधार पर ओकर गुण मां अंतर होत अहै। एक साल पुराना घी बाहरी इस्तेमाल कय खातिर सबसे नीक मानि जात अहै। कुंभ घृत अउर महाघृत जवन कि 11 से 100 साल तक पुराना होत अहैं, कुछ गंभीर बीमारी मां रामबाण औषधि कय रूप मां इस्तेमाल कीन जात अहैं।
घी कय इस्तेमाल पंचकर्म कय पहिला चरण (तेल लगावे) मां कीन जात अहै। कमजोर मरीजान मां ओकर मालिश बहुतै असरदार होत अहै, काहे से कि इ शरीर कय पोषण देत अहै अउर खून कय बहाव सुधारे अहै। माइग्रेन, पुरानी साइनसाइटिस या एलर्जी वाली सांस कय दिक्कत मां 10-15 दिन तक नाक मां हल्का गुनगुना घी डारे से आराम मिलत अहै। अक्षितर्पण एक अउर पंचकर्म इलाज अहै, जवने मां आंख कय बीमारी खातिर आंख कय ताज़ा अउर पिघला घी मां कुछ मिनट तक डूबावा जात अहै।
घी कय लेके भ्रम अउर राय
मानव शरीर पर घी कय असर कय लेके आयुर्वेद अउर आधुनिक चिकित्सा मां काफी फरक अहै। पंचकर्म प्रक्रिया कय दौरान घी खाए कय बाद मरीज कय ट्राइग्लिसराइड स्तर गिरे कय रिपोर्ट मिलत अहै, फेर भी आम जनता कय मन मां घी कय सुरक्षित सेवन कय लेके बहुतै डर अहै। हालाँकि आयुर्वेद घी या कवनो भी चीज़ सीमित मात्रा मां लेवे कय जोर देत अहै, पर शरीर कय अलग-अलग सिस्टम पर घी कय सही अउर गलत असर कय पक्का जाने खातिर दूनों सिस्टम कय जानकारन कय एक साथ मिलिके रिसर्च करे कय जरुरत अहै।
घी पर आधारित कुछ शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियां:
अर्जुन घृत- हृदय रोग
पंचतिक्त घृत- सोरायसिस
ब्रह्मी घृत एवं कल्याण घृत- मानसिक विकार
त्रिफला घृत- नेत्र रोग
शतावरी घृत- महिला रोग
इंदुकांत घृत- पेट कय समस्या
फल घृत- बांझपन अउर गर्भावस्था कय समस्या
अश्वगंधा घृत- तंत्रिका तंत्र मजबूत करे खातिर



