
पिछिले दुई-तीन बरिसन मां कांग्रेस कय सियासी बिसात पय आपन सब कुछ लुटा-पिटा देय के बाद इंडिया (INDIA) गठबंधन कय सहयोगी दलिन कय जो “नई दिल्ली बैठक” भई, ओकर राजनीतिक मायने कांग्रेस खतिव बहुत फायदेमंद साबित भवा। काहे से कि या बैठक मां पहली बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कय आवाज ध्यान से सुनी गै अउर उनके नेतृत्व कय अउर उनके पार्टी कय गाहे-बगाहे चुनौती देय वाले क्षेत्रीय दलिन कय सुरमा भोपाली नेता दबी जबान मां आपन भावना प्रकट करय कय मजबूर भइयं। खास कय नेशनल कांफ्रेंस कय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सपा प्रमुख अखिलेश यादव कय छोड़िकय। इहे कारन रहा कि या बैठक खाली एक नियमित विपक्षी बैठक तक सीमित नाहीं रही, काहे से कि या बैठक अइसन समय भई, जब कई सहयोगी दल अउर कांग्रेस कय बीच मतभेदन कय बढ़त-घटत खबरिआं सामने आई रहीं, इहे कारन एकर संदेश पय खास ध्यान दीन्ह जाई।
मिली जानकारी कय अनुसार, 8 जून कय इंडिया (INDIA) गठबंधन कय बैठक मां लगभग 23 दलिन कय नेता शामिल भइयं। बैठक मां विपक्षी दलिन आपन एकजुटता देखावय अउर आगे कय राजनीतिक रणनीति पय चर्चा करिन। प्राप्त रिपोर्टन कय अनुसार, बैठक मां लगभग 23 विपक्षी दलिन कय प्रतिनिधि भाग लिहिन। जिनमां मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सुप्रिया सुले कय अलावा प्रमुख वामपंथी दलिन कय ढेर नेता मौजूद रहेन।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केंद्र सरकार कय नीतियन, विदेश नीति अउर मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ल मुद्दा कय प्रमुखता से उठाइन। जबकि विपक्षी दलिन संसद अउर सड़क दुनो स्तर पय मिलिकय आंदोलन चलवय अउर राष्ट्रीय मुद्दा पय साझा रुख अपनावय पय चर्चा करिन। साथ ही, 2029 लोकसभा चुनाव कय तैयारी, विपक्षी एकता अउर गठबंधन कय भविष्य कय दिशा भी बैठक कय एजेंडे मां शामिल रही।
बैठक कय दौरान मतदाता सूची पुनरीक्षण अउर चुनावी प्रक्रिया से जुड़ल सवाल पय मंथन भवा। फिर केंद्र सरकार कय नीतियन कय खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाई गै अउर संसद मां विपक्षी दलिन कय बेहतर तालमेल कय जरुरत पय जोर दीन्ह गय। याकय अलावा, अलग-अलग राज्यन मां विपक्षी दलिन कय बीच तालमेल अउर राजनीतिक सहयोग होय कय पुष्टि भई।
उहंई, या बैठक कय कुछ चुनौतियउ सामने आईं, काहे से कि जहंई तमिलनाडु मां सत्ता से बाहर भई DMK कांग्रेस से नाराजगी कय चलते या बैठक से दूरी बनाई, जेसे गठबंधन कय भीतर मतभेदन कय चर्चा तेज रही। उहंई, आप (AAP) कय सुप्रीमो अरबिंद केजरीवाल कय नाहीं रहब भी चर्चा मां रहा। जबकि कुछ अउर सहयोगी दलिन कय भूमिका अउर भागीदारी कय लइकय भी सवाल बनल रहेन।
जहंा तक इंडिया गठबंधन कय या बहुप्रतीक्षित बैठक कय राजनीतिक मायने कय बात अहै, तौ या बैठक लोकसभा चुनाव 2024 कय बाद विपक्ष कय सबसे महत्वपूर्ण गैर-संसदीय बैठकन मां से एक मानि जात अहै। जेकर माध्यम से विपक्ष संदेश देवय कय कोसिस करिस कि मतभेदन कय बाद भी भाजपा कय खिलाफ साझा मंच अभी कायम अहै। उहंई, भाजपा DMK कय अनुपस्थिति अउर अउर अंतरविरोधन कय लइकय गठबंधन कय एकता पय सवाल उठाइन अहै।
या बैठक कय सबसे बड़े राजनीतिक निष्कर्ष या अहैं:
पहिला, INDIA गठबंधन अभी खतम नाहीं भवा अहै: सबसे बड़का संदेश यही रहा कि तमाम मतभेदन, चुनावी झटका अउर सहयोगी दलिन कय नाराजगी कय बाद भी विपक्षी दलिन एक साझा मंच बनाय राखय कय फैसला करिन। 23 दलिन कय भागीदारी कांग्रेस कय या कहय कय मौका दिहिस कि गठबंधन अभी भी प्रासंगिक अहै।
दूसर, 2029 कय तैयारी अभी से शुरू होय गई अहै: बैठक कय मुख्य उद्देश्य खाली वर्तमान राजनीतिक मुद्दा पय प्रतिक्रिया देवय नाहीं रहा, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव खतिव लंबी रणनीति तैयार करब भी रहा। विपक्ष भाजपा कय विरुद्ध एक बड़ा राष्ट्रीय नैरेटिव बनावय कय कोसिस मां देखा।
तीसर, कांग्रेस फेर से समन्वयक कय भूमिका मां: बैठक से या संकेत मिला कि कांग्रेस गठबंधन कय धुरी बनल रहय चाहत अहै। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विपक्षी एकता पय जोर दिहिन अउर केंद्र सरकार कय विरुद्ध साझा संघर्ष कय आह्वान करिन।
चौथा, गठबंधन कय कमजोरी भी उजागर भई: M. K. Stalin कय DMK अउर Arvind Kejriwal कय AAP कय बैठक से दूर रहब बतावत अहै कि विपक्षी एकता अभी भी कई अंतरविरोधन से घिरी भई अहै।
राजनीतिक विश्लेषक बतावत अहैं कि या बैठक कय बिहार कय राजनीति पय असर पड़ी, काहे से कि राजद नेता तेजस्वी यादव कय राष्ट्रीय मंच मिला। बैठक मां तेजस्वी यादव कय मौजूदगी या संदेश दिहिस कि ऊ खाली बिहार तक सीमित नेता नाहीं, बल्कि राष्ट्रीय विपक्ष कय प्रमुख चेहरा अहैं। उहंई, बिहार चुनाव मां विपक्षी एकता कय संदेश भी गय। अइसन मां यदि कांग्रेस, राजद अउर वाम दल तालमेल बनाय रखत अहैं तौ बिहार मां NDA कय खिलाफ विपक्षी चुनौती मजबूत रहि सकत अहै।
उहंई, जाति अउर सामाजिक न्याय कय राजनीति कय भी बल मिला। काहे से कि राहुल गांधी अउर तेजस्वी यादव पिछले कुछ समय से सामाजिक न्याय, जातीय गणना अउर प्रतिनिधित्व जइसन मुद्दा कय साथ उठावत अहैं। बैठक से संकेत मिला कि या विपक्ष कय प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बनल रहि सकत अहै।
जहंा तक 2029 कय लोकसभा चुनाव पय संभावित असर कय बात अहै तौ एकर सकारात्मक पक्ष या रहा कि भाजपा कय विरुद्ध एक साझा राष्ट्रीय मंच बनल अहै। उहंई, संसदीय मुद्दा पय तालमेल बढ़ि सकत अहै। साथ ही क्षेत्रीय दलिन अउर कांग्रेस कय बीच संवाद कायम रहय कय संभावना बनल अहै। उहंई, जहंा तक चुनौतियन कय बात अहै तौ सीट बंटवारा सबसे बड़की समस्या रही। काहे से कि कई राज्यन मां सहयोगी दल एक-दूसरे कय प्रतिद्वंद्वी अहैं। उहंई, DMK अउर AAP जइसन पार्टियन कय दूरी गठबंधन कय विश्वसनीयता पय सवाल खड़ा करत अहै।
निष्कर्ष मां या कहि जाइ सकत अहै कि या बैठक कय सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश या रहा कि INDIA गठबंधन आपन अस्तित्व अउर प्रासंगिकता कय प्रदर्शन करय कय कोसिस करिस। लेकिन या भी साफ होय गय कि विपक्ष कय सबसे बड़की चुनौती भाजपा नाहीं, बल्कि आपन भीतर कय एकता बनाय राखब अहै। बिहार मां एकर तात्कालिक फायदा महागठबंधन कय मिलि सकत अहै, जबकि 2029 खतिव या बैठक कय विपक्षी पुनर्गठन कय शुरुआत मानि जाइ सकत अहै—हालांकि सफलता या बात पय निर्भर करी कि सहयोगी दल भविष्य मां आपन मतभेद कतनी प्रभावी ढंग से सुलझा पावत अहैं।
— कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक