संपादकीय

दिल्ली अग्निकांड: अब हादसा के राजधानी बन गइल है देस के राजधानी

दिल्ली के होटल में भइल अग्निकांड में 21 लोगन के मौत, एक बेर फेर साबित कइ दिहिस है कि देश में आम आदमी के जिन्दगी कउनो सुरक्षित नाहीं है। सरकार के सुरक्षा के जिम्मेदारी सिर्फ देखावा भर है। नागरिकन के सुरक्षा भ्रष्टाचार अउर मिलीभगत के भेंट चढ़त है। सरकार अइसन हादसा से कबहूँ सबक नाहीं लेत है। इहे वजह है कि एक हादसा के बाद दूसर हादसा होत चला जात है अउर सरकार सिर्फ लीपापोती करे में जुटी रहत है। असल में, अइसन हादसा में लापरवाही अउर भ्रष्टाचार के जिम्मेदार अफसरन के जब तक जेल भेजे के कानून नाहीं बनी, तब तक हादसा फेर-फेर होत रहिहें।

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टेज में भारी आग लागै से 21 लोगन के मौत होइ गै। मरे वाला 21 लोगन में बांग्लादेश अउर अफ्रीकी देसन के नागरिक भी शामिल हैं। मतलब इहाँ देस के लोग तौ सुरक्षित नाहीं ही हैं, विदेशी भी सुरक्षित नाहीं हैं। होटल से दमकलकर्मी कुल 37 लोगन के बाहेर निकारे। वहीं 12 लोग खिड़की से नीचे कूद के अपनी जान बचाईं।

आश्चर्य इ है कि दिल्ली में केंद्र सरकार अउर राज्य सरकार, दूनो भाजपा के है। चुनाव जीते खातिर भाजपा भ्रष्टाचार अउर डबल इंजिन से तेजी से विकास के दावा करत रही है। अइसन हादसा बतावत है कि सरकार के एकौ इंजिन सही तरीका से काम नाहीं करत है। भाजपा तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर शराब घोटाला में शामिल होवे के आरोप लगाये रही। केजरीवाल के न सिर्फ जेल जाय पड़ा बल्कि उनकी पार्टी ‘आप’ दिल्ली विधानसभा के चुनाव भाजपा के हाथ हार गई। अदालत केजरीवाल के बरी कइ दिहिस। तत्कालीन केजरीवाल सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप दिल्ली में सत्ता हासिल करे में भाजपा खातिर बड़ा कारण साबित भइ। अदालत के इ फैसला से पहिले भये दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत में आ गई।

दिल्ली के जौन होटल में इ भयानक हादसा भवा, ओकर पास बिल्डिंग के फायर सुरक्षा के अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नाहीं रहा। होटल में 25 कमरा हैं। दिल्ली के दमकल विभाग के मुताबिक बिल्डिंग में बेसमेंट अउर ग्राउंड फ्लोर के अलावा पाँच मंजिल अउर है। इ पूरी बिल्डिंग में सिर्फ एक सीढ़ी अउर एक लिफ्ट है। बिल्डिंग पूरी तरीका से सील रही अउर इहाँ हवा के आवाजाही (वेंटिलेशन) के कउनो इंतजाम नाहीं रहा। बाथरूम के खिड़की समेत सब खिड़की पूरी तरीका से बंद रही। आग लागे पर अइसन बिल्डिंग एक चिमनी के तरह काम करत है। इ हालत दिल्ली अउर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सैकड़न होटल अउर व्यावसायिक संस्थानन के है। इन संस्थानन के पास आग से बचे के पर्याप्त इंतजाम नाहीं है। इ कमी के जांच होत है, तौ मिलीभगत के कारण अफसर आँख मूंद लेत हैं। इहे वजह है कि दिल्ली अउर आसपास के क्षेत्रन में लगातार अइसन अग्निकांड होत है। अइसन हादसा में लोग जर के या दम घुट के मरत हैं, लेकिन सरकार कबहूँ बचाव के ठोस इंतजाम नाहीं करी।

इ होटल दिल्ली सरकार के ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (BnB) स्कीम के तहत चलत रहा। इ योजना केंद्र सरकार के है, जौन राष्ट्रमंडल खेल के दौरान साल 2010 में लागू कइ गा रही। ओकर तहत छह कमरा के BnB में स्वीकृति रही। ओका अग्निशमन, एमसीडी या पुलिस से मंजूरी लेवे के जरूरत नाहीं है। दिल्ली में अइसन 1000 से ज्यादा प्रतिष्ठान में BnB चलत है। सवाल इ है कि का सरकारी योजना से चले वाला इ होटल-गेस्टहाउस आग के लिहाज से सुरक्षित हैं? इकर पक्का जवाब दिल्ली भाजपा सरकार अउर प्रशासन के पास नाहीं है।

देस के राजधानी दिल्ली आग के गोला पर बइठी है। पिछला 6 महीना में दिल्ली में आग के अलग-अलग घटना में 66 लोगन के जान जा चुकी है। 3 मई 2026 के विवेक विहार में एसी में धमाका के बाद चार मंजिला इमारत में आग लाग गई, जवने में 9 लोगन के मौत होइ गई। 18 मार्च 2026 के पालम में पाँच मंजिला इमारत में लागल आग 9 लोगन के जान लइ ली। अइसी तरह 14 मार्च 2024 के शाहदरा में 4 लोगन के मौत भइ। 15 फरवरी 2024 के अलीपुर फैक्ट्री क्षेत्र में 11 लोगन के जान गई। 13 मई 2022 के मुंडका में 27 लोगन के मौत भइ रही। दिल्ली में अग्नि दुर्घटना के सिलसिला रुक नाहीं रहा है। 12 फरवरी 2019 के करोल बाग के होटल अर्पित पैलेस में 17, 8 दिसंबर 2019 के रानी झांसी रोड पेपर फैक्ट्री में 45, 31 मई 1999 के लाल कुआं में 57 अउर 13 जून 1997 के उपहार सिनेमा में 59 लोगन के मौत होइ चुकी है।

दिल्ली के 80 प्रतिशत इमारत आग से सुरक्षित नाहीं है। दिल्ली में फायर सेफ्टी कानून है, जौन 1983 में आया रहा, जवने में 15 मीटर से ऊँची इमारत खातिर नियम बनल रहा। लेकिन लोग एकर तोड़ निकाल के फायर सेफ्टी के दायरा से बचे खातिर साढ़े 14 मीटर या 14.9 मीटर के इमारत बनावे लगें। सिर्फ 25 हजार के करीब अइसन इमारत होई, जवने में स्ट्रक्चर के लिहाज से फायर सेफ्टी के उपाय है अउर फायर एनओसी मिलल है। दिल्ली फायर सर्विसेज 2025 में मार्च से अप्रैल के बीच 37 सरकारी अस्पताल के फायर सेफ्टी अउर ढांचागत मजबूती के जांच कइ, जवने में 9 अस्पताल के पास फायर क्लीयरेंस नाहीं रहा।

दिल्ली के मुखर्जी नगर में 15 जून 2023 के कोचिंग सेंटर में लागल आग में 60 से ज्यादा छात्र झुलस गए रहें। इ घटना पर हाईकोर्ट खुद संज्ञान ले के दिल्ली के कोचिंग सेंटर में अग्नि सुरक्षा के ऑडिट रिपोर्ट मांगिस रही। हाईकोर्ट के निर्देश पर अग्निशमन विभाग 383 इमारत के सर्वे करी, जवने में कोचिंग सेंटर चलत हैं। सर्वे में पावा गइल कि अधिकतर इमारत आग के लिहाज से खतरनाक है। ज्यादातर इमारत में अग्नि सुरक्षा के उपकरण तौ रहे, लेकिन उनकी हालत अइसन नाहीं रही कि आपात स्थिति में इस्तेमाल कइ जा सके।

सरकार अउर राजनीतिक दल के नेता अइसन हादसा के बाद सिर्फ घड़ियाली आँसू बहावत हैं। अइसन हादसा के बाद सरकार मुआवजा अउर जांच के घोषणा कर के अपनी जिम्मेदारी पूरा कइ लेत है। भविष्य में अइसन हादसा न हो, इ खातिर ठोस इंतजाम कबहूँ नाहीं कइ जात है। इ हालत देस के राजधानी दिल्ली के है, तौ बाकी देस के का हाल होई, इ समझा जा सकत है। दिल्ली में अब तक भयल अग्निकांड में सैकड़न लोगन के मौत के बावजूद एकौ वरिष्ठ अधिकारी के सीधे जिम्मेदार मान के जेल नाहीं भेजा गइल। कारण साफ है कि सरकार कउनो भी पार्टी के हो, आज तक अइसन कउनो कानून नाहीं बनल कि जिम्मेदारी न निभावे पर अफसरन के जेल जाय पड़े। इहे वजह है कि अग्नि सुरक्षा हो या कउनो अउर सुरक्षा मानक, कानून के धज्जियाँ उड़त रहत है अउर अफसर अउर नेता तमाशबीन बनल रहत हैं। जब तक अइसन हादसा खातिर सीधे अफसरन के जिम्मेदार ठहरा के जेल के हवा नाहीं खियावा जइहै, तब तक अइसन हादसा होत रहिहै।

– योगेन्द्र योगी

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