संपादकीय

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट कय जरिये मोदी चलिन बड़का मास्टरस्ट्रोक, हिंद महासागर कय बीचोंबीच होई भारत कय सबसे बड़का सैन्य किला

मोदी सरकार हिंद महासागर मां अइसन दांव चलिन अहै, जवने से चीन कय सबसे बड़की रणनीतिक चिंता बढ़ि गवा अहै। ग्रेट निकोबार मां बनै वाला भारत कय नया सैन्य अउर आर्थिक हब अब दुस्मनन खइतीर खुली चेतावनी बनि चुका अहै। जवने समुद्री रास्ता से दुनिया कय सबसे बड़का तेल अउर व्यापार गुजरत अहै, उहां अब भारत अपनी ताकत कय स्थायी पहरा बइठाय जा रहा अहै। साफ अहै कि मोदी सरकार हिंद महासागर मां भारत कय खाली मजबूत नाहीं, बल्कि सबसे प्रभावशाली ताकत बनावे कय तैयारी मां जुट चुकी अहै।

हम आपकय याद दिवाई दीं कि केंद्र सरकार पिछला साल जवने हरित क्षेत्र हवाई अड्डा कय मंजूरी दिहिन रही, उअगला पांच सालन मां तैयार होय कय उम्मीद अहै। सबसे महत्वपूर्ण बात या अहै कि या हवाई अड्डा भारतीय नौसेना कय संचालन नियंत्रण मां रही। यानी या खाली नागरिक उड़ानन कय केंद्र नाहीं रही, बल्कि हिंद महासागर मां भारत कय सैन्य शक्ति कय नया अग्रिम मोर्चा बनि। या दुइमुखी उपयोग वाला हवाई अड्डा भारत कय समुद्री निगरानी क्षमता, सैन्य पहुंच अउर त्वरित कार्रवाई कय ताकत कय कई गुना बढ़ाय दी।

हम आपकय बताइ दीं कि ग्रेट निकोबार कय या परियोजना चार बड़का खम्भन पर आधारित अहै। इमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, आधुनिक नगर, ऊर्जा संयंत्र अउर नौसैनिक हवाई अड्डा सामिल अहैं। या पूरा ढांचा भारत कय उ समुद्री क्षेत्र मां स्थायी उपस्थिति दई, जवने से दुनिया कय दुइ-तिहाई तेल व्यापार अउर आधा कंटेनर यातायात गुजरत अहै। ग्रेट निकोबार खाली चालीस किलोमीटर दूर स्थित अहै उ सिक्स डिग्री चैनल से, जवने कय अदन कय खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य तक फैलल समुद्री व्यापार मार्ग कय सबसे संवेदनशील हिस्सा मानल जात अहै। याही उ इलाका अहै जवने मां चीन लगातार अपनी घुसपैठ बढ़ात अहै।

हिंद महासागर क्षेत्र मां कई बाहरी ताकतन आर्थिक अउर सैन्य दबदबा बनावे मां जुटिन अहैं। अइसन मां मोदी सरकार कय या कदम भारत कय दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर मां निर्णायक बढ़त दई। यानी अब भारत या पूरा क्षेत्र मां सुरक्षा साझेदार अउर संकट कय समय सबसे पहिले सहायता पहुचावे वाली ताकत कय रूप मां उभरि।

रक्षा सूत्रन कय साफ कहब अहै कि या परियोजना तीस साल पहिले ही पूरी होय जायक चाही रही, लेकिन पिछला सरकारन कय सुस्ती अउर दूरदृष्टि कय कमी कय कारन भारत बहुमूल्य समय गंवाय दिहिन। अब मोदी सरकार उ रणनीतिक भूल कय सुधारत अहै। या परियोजना भारत कय अपने सैन्य संसाधनन कय तेज आवाजाही, अग्रिम रसद आपूर्ति अउर समुद्री निगरानी मां अभूतपूर्व क्षमता दई।

विशेषज्ञन कय मानब अहै कि ग्रेट निकोबार कय आसपास समुद्र मां विशाल हाइड्रोकार्बन भंडार भी होय सकत अहैं। अगर अइसन होत अहै तव या परियोजना भारत कय ऊर्जा सुरक्षा खइतीर भी ऐतिहासिक साबित होइ। यानी या खाली सैन्य ताकत कय सवाल नाहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता कय भी बड़का आधार बनि। साथ ही मोदी सरकार उन आलोचनान कय भी करारा जवाब दिहिन अहै, जवने मां या परियोजना कय खाली व्यावसायिक योजना बतायके बदनाम करय कय कोसिस कीन जात रही। रक्षा सूत्रन साफ कहिन अहै कि एकय खाली कारोबारी परियोजना कहब भौगोलिक अज्ञानता कय प्रमाण अहै।

सरकार या भी स्पष्ट कीन कि सब परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता अउर विधिवत ठेका प्रक्रिया कय तहत चलत अहैं। हम आपकय बताइ दीं कि परियोजना कय अलग-अलग हिस्san पर तेजी से काम चलत अहै। कंटेनर बंदरगाह खइतीर सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होइ चुकी अहै। नगर परियोजना पर व्यय वित्त समिति कय बइठक होइ चुकी अहै, जबकि द्रवीकृत प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा संयंत्र कय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर लीन गे अहै।

एकय साथ ही पर्यावरण कय लेइके उठल सवालन पर भी सरकार तथ्यात्मक जवाब दिहिन अहै। पर्यावरण प्रभाव आकलन कय अनुसार पूरा द्वीप कय खाली 166.1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कय विकास खइतीर चिन्हित कीन गे अहै, जबकि 81.74 प्रतिशत क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, वन अउर जनजातीय संरक्षण क्षेत्रन कय रूप मां सुरक्षित रही। वन क्षेत्र कय उपयोग मां भी आधा से ज्यादा हिस्सा कय हरित क्षेत्र कय रूप मां सुरक्षित राखि जाय, जहवां पेड़न कय कटाई नाहीं होइ। इसके साथ ही वन्यजीवों, प्रवाल भित्तियों और मैंग्रोव संरक्षण के लिए तीस वर्षों में दो हजार दो सौ बीस करोड़ रुपये से अधिक का विशेष संरक्षण कार्यक्रम भी तैयार किया गया है। लेदरबैक कछुए, निकोबार मेगापोड और मगरमच्छों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अइसन स्पष्ट अहै कि ग्रेट निकोबार परियोजना मोदी सरकार कय खाली विकास अभियान नाहीं, बल्कि भारत कय समुद्री शक्ति कय नया शंखनाद अहै। या उ मास्टरस्ट्रोक अहै जवने आवै वाला दशकन मां हिंद महासागर कय रणनीतिक तस्वीर बदल सकत अहै। भारत अब अपने समुद्री हितन कय रक्षा खाली तटवन से नाहीं करी, बल्कि समुद्र कय बीचोंबीच अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराई। -नीरज कुमार दुबे

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