
पाकिस्तान कै कब्जा वाले कश्मीर मां अब हालात सिर्फ बिगड़ नइखे रहे हैं, बल्कि इ इस्लामाबाद के खिलाफ खुलके जनविद्रोह कै रूप लेइ लिहिन अहै। जिन मनईयन का पाकिस्तान दसन साल से आपन कब्जा कै हिस्सा बताइके दुनिया के सामने कश्मीर कै झूठा राग अलापत रहा, वही मनई आज सड़कन पर उतरि के ओकर दमनकारी चेहरा का बेनकाब करत अहैं। आटा पर सब्सिडी, बिजली दर मा कमी, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व अउर नागरिक अधिकारन जइसन बुनियादी मांगन का लेके शुरू भवा आंदोलन अब पाकिस्तान कै औपनिवेशिक नीतियन के खिलाफ व्यापक जनआक्रोश मा बदल चुका अहै।
जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व मा चलत इ आंदोलन का कुचले खातिर पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स अउर पुलिस जउन बर्बरता कै प्रदर्शन करिन अहै, ओकर से पूरी दुनिया झकझोरि के रहि गई अहै। निहत्थे प्रदर्शनकारीन पर गोलियां चलाइ गइ, लाठीचार्ज भवा, आंसू गैस कै गोला दागा गवा अउर इंटरनेट सेवा बंद कइके पूरा क्षेत्र का अंधेरा मा ढकेल दीहिन। अलग-अलग रिपोर्टन के अनुसार अब तक दर्जनों नागरिक मारि डारे गइ अहैं अउर हजारों गिरफ्तारी भइ अहै। रावलाकोट, मीरपुर, कोटली, भीमबर अउर पुंछ जइसन क्षेत्रन मा हालात विस्फोटक बने अहैं।
सबे से बड़ विडंबना इ अहै कि जिन मनईयन के जमीन का डुबाइ के मंगला बांध बनावा गवा, ओन्ही मनईयन का आज आसमान छूवत बिजली बिल थमाइ जात अहै। पाकिस्तान कै अर्थव्यवस्था का ऊर्जा देवे वाला इ विशाल बांध स्थानीय जनता खातिर अभिशाप बनि चुका अहै। हजारों परिवार उजड़ि गइ, लेकिन पुनर्वास तक नइखे मिला। प्राकृतिक संसाधनन कै दोहन पाकिस्तान करत अहै, लेकिन ओकर लाभ स्थानीय जनता का नइखे मिलत। इहे कारण अहै कि इ आंदोलन अब सिर्फ आर्थिक नइखे, बल्कि अस्तित्व अउर सम्मान कै लड़ाई बनि गवा अहै।
पाकिस्तान तथाकथित विधानसभा अउर संविधान कै ढांचा तौ खड़ा कइ दिहिस, लेकिन असली सत्ता हमेशा इस्लामाबाद अउर रावलपिंडी के हाथ मा रही अहै। वहां कै विधानसभा खाली कठपुतली संस्था बनि के रहि गई अहै। हाल ही मा आरक्षित सीट का लेके आवा फैसला जनता के गुस्सा का अउर भड़का दिहिस। इन सीट के जरिये पाकिस्तान आपन पसंद कै सरकार थोपत अहै अउर कश्मीरी आवाज का कुचलत अहै। इहे कारण अहै कि मनई अब खुलके कहत अहैं कि पाकिस्तान ओन्हे नागरिक नइखे, गुलाम समझत अहै।
स्थिति इत्ते बिगड़ चुकी अहै कि पाकिस्तान संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी का प्रतिबंधित कइ दिहिस अहै। ओकर नेताअन के सिर पर इनाम घोषित कइ दीहिन अहै। पत्रकारन का गिरफ्तार कीन जात अहै, मीडिया पर सेंसरशिप थोपि दीहिन अहै अउर इंटरनेट बंद कइके सच्चाई छिपाइवे कै कोशिश कीन जात अहै। लेकिन दमन जेतना बढ़ि रहल अहै, जनाक्रोश ओतना उग्र होत जात अहै। ब्रिटेन अउर अमेरिका मा बसे कश्मीरी प्रवासी भी पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कइ दिहिन अहैं। इ वही प्रवासी समुदाय अहै जेकर पाकिस्तान बरसन तक भारत विरोधी प्रचार खातिर इस्तेमाल करत रहा। मगर अब वही मनई इस्लामाबाद के दमन के खिलाफ दुनिया का सच बतावत अहैं।
रणनीतिक दृष्टि से देखैं तौ इ पाकिस्तान खातिर बहुत खतरनाक स्थिति अहै। इ संकट ओका सीधे 1971 कै याद दिवावत अहै, जब दमन अउर सैन्य बल के सहारे पूर्वी पाकिस्तान का दबाइवे कै कोशिश आखिर मा बांग्लादेश कै निर्माण कै रास्ता खोलि दिहिस रहा। आज पीओके मा भी वही हालात दिखात अहैं। जनता कै भरोसा टूटि चुका अहै अउर पाकिस्तान खाली बंदूक के दम पर कब्जा बनाइ राखे चाहत अहै। लेकिन इतिहास गवाह अहै कि डर के सहारे कवनो क्षेत्र का लंबा समय तक नियंत्रित नइखे राखि जाइ सकत।
उधर, भारत खातिर इ स्थिति सामरिक अउर कूटनीतिक दूनौ दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण अहै। जमीनी हकीकत इ अहै कि वैसे तौ पूरा जम्मू-कश्मीर भारत कै अभिन्न हिस्सा अहै लेकिन पीओके मा पाकिस्तान कै कब्जा अवैध अहै। अब जब वहां कै जनता खुद पाकिस्तान के खिलाफ उठि खड़ि भइ अहै अउर भारत के साथ मिले कै बात मुखर होइ लाग अहै तौ सवाल उठत अहै कि भारत का का पीओके मा सीधे हस्तक्षेप करै चाही? इ सवाल पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ बंटा भवा दिखात अहैं। कइयन विश्लेषकन कै कहब अहै कि सीधे हस्तक्षेप के बजाय भारत का अंतरराष्ट्रीय मंचन पर पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघन का अउर आक्रामक तरीका से उठावे चाही। भारत का संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशन अउर वैश्विक मानवाधिकार संगठन के सामने इ प्रश्न मजबूती से रखे के पड़ि कि आखिर पाकिस्तान किस नैतिक आधार पर कश्मीर कै बात करत अहै, जब ओकर कब्जा वाले क्षेत्र मा जनता का जिये तक कै अधिकार नइखे।
विश्लेषकन कै कहब अहै कि भारत के पास कइयन विकल्प अहैं। जइसे पीओके कै जनता के साथ मानवीय अउर सामाजिक संपर्क बढ़ावे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का घेरे, सीमा पर सुरक्षा अउर सतर्कता बढ़ावे। साथ ही पीओके के मनईयन खातिर राजनीतिक संदेश देवे के पड़ि कि भारत ओन्हे आपन नागरिक मानत अहै अउर ओकर अधिकारन के साथ खड़ा अहै। जम्मू-कश्मीर विधानसभा मा पीओके खातिर आरक्षित 24 सीट का सक्रिय राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़े पर भी गंभीरता से विचार करै चाही। पीओके मा जउन आग भड़कि अहै, ओका शांत कइवे अउर पाकिस्तान कै दमन का बेनकाब करै खातिर भारत का धैर्य अउर रणनीतिक दबाव कै नीति अपनावे चाही।