
जबहियों फेफड़न सिय जुड़ल कवनो बीमारी कै बात होत अहै, अक्सर लोगन कै दिमागै मां स्मोकिंग इय आवत अहै। इ सच अहै कि स्मोकिंग कै कारन फेफड़न कय काफ़ी नुकसान पहुंचत अहै अउर इ कई सारी बीमारियन कै वजह भी अहै, पै इ एकलौता कारन नाहीं अहै। अगर आप स्मोक नाहीं करत, पै कुछ नुकसानदेह आदतैं आपकी लाइफस्टाइल कै हिस्सा अहैं, तौहौ आपके फेफड़न कय नुकसान होई सकत अहै। आवा जानैं कि ओन कौन-कौन सी आदतैं अहैं, जौन फेफड़न कय नुकसान पहुंचात हव।
पैसिव स्मोकिंग कै शिकार होना
अगर आप खुद स्मोक नाहीं करत, पै सिगरेट या बीड़ी पीवइ वाले लोगन कै साथे खड़ा होत अहैं, तौ आप पैसिव स्मोकर अहैं। सिगरेट कै धुआं हवा कै जरियै आपके फेफड़न तक पहुंचत अहै अउर सीधेतौर पर लंग्स कै काम करै कै क्षमता कय कम करत अहै अउर अस्थमा अउर लंग कैंसर कै जोखिम बढ़ावत अहै।
प्रदूषण मां रहना
हवा मां घुलत जहरीला धुआं, धूल-मिट्टी अउर पीएम 2.5 फेफड़न कय काफ़ी नुकसान पहुंचात हव। गाड़ियन कै धुआं अउर फैक्टरी सिय निकलत प्रदूषण फेफड़न कै बीमारी कै कारन बन सकत हव। अइसा ज्यादा प्रदूषण वाली जगहन पर बिना मास्क कै रहै सिय इ जहरीले कण हमार फेफड़न तक पहुंच जात हव अउर ब्रोंकाइटिस जैसी समस्या पैदा करत हव।
इंडोर पॉल्यूशन कय नजरअंदाज करब
घर कै अंदर कै हवा भी प्रदूषित होई सकत अहै। तेज गंध वाले रूम फ्रेशनर, मच्छर भगावइ वाली कॉइल, अगरबत्ती, खुशबूदार मोमबत्ती आदि मां हानिकारक केमिकल्स होत हव, जौन हवा कै जरियै हमार फेफड़न तक पहुंचत हव। इकै अलावा, घर मां धूल-मिट्टी जमा होय सिय एलर्जी भी होई सकत अहै। इहै मारे बंद कमरान मां धूप आवै दें अउर दिन मां ताजी हवा खर्तिन खिड़कियन खोलें।
फिजिकली एक्टिव न रहब
कसरत न करै या घंटा भर बैठै रहै सिय फेफड़न कै काम करै कै क्षमता कम होय लागत अहै। इहै मारे सीढ़ियां चढ़ै या थोड़ा सा तेज चलै सिय भी सांस फूलै लागत अहै। कसरत करै सिय फेफड़े मजबूत बनत हव अउर आपकी सेहत भी दुरुस्त रहत अहै।
इन्फेक्शन या एलर्जी कय अनदेखा करब
बार-बार होय वाले जुकाम, खांसी, कफ वगैरा कय मामूली एलर्जी या सर्दी समुझि कै इग्नोर करब भारी पड़ी सकत अहै। इ फेफड़न सिय जुड़ल कवनो गंभीर समस्या कै संकेत भी होई सकत अहै। इहै मारे समय पर इलाज न होय सिय इ समस्या अउर बढ़ि सकत अहै।




