पश्चिम बंगाल में अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार के तौर पर शुभेन्दु अधिकारी ने शासन की बागडोर संभाल ली है। भाजपा का यह साफ नारा रहा है कि वह विदेशी घुसपैठियों को देस से बाहर निकाल फेंकी। अउर इसीलिए पश्चिम बंगाल के जनादेस में जनता अब इस पर आपन मुहर भी लगा दिहिस है। ढेर सारे राजनीतिक बिस्लेषकन का ई मानब है कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण का बढ़ावा देके आपन शासन चलाइने। इमा बांग्लादेश से आवा घुसपैठियन का भी समर्थन सामिल रहा। अब भाजपा की सरकार बने के बाद ई तय होइ चुका है कि अब पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लागी हुई सीमाएं पहिले से ज्यादा सुरच्छित होइहैं अउर एक बड़ी समस्या से छुटकारा भी मिलि जाई।
इससे ई आशय भी निकलत है कि ‘सबका साथ अउर सबका विकास’ वाली राजनीतिक अवधारणा का स्वीकार कीन जाब लागे है। देस में अइसने राजनीति की जरूरत है। काहे से कि राजनीतिक दल आज देस में रहे वाले समाज के बीच इतना भेद पैदा कर दिहिन है कि कई जगह समाज बंधु एक-दूसरे के दुस्मन बन गए हैं। हिंदू अउर मुसलमान समाज के ही हिस्सा हैं, इहिनिसे इनका अलग-अलग देखे की राजनीति नाहीं होए के चाही। एकरे उलट देस के कछू राजनीतिक दल का आधार ही मुस्लिम वोट हैं। जबकि ई भी सही है कि तुष्टिकरण से केहू का भल नाहीं भवा है अउर नाहीं होइ।
लम्मे समय से पश्चिम बंगाल में जनसंख्या का अचानाक बढ़ना कई तरह के सवाल खड़ा करत रहा है। एकरे पाछे बांग्लादेश से आवा घुसपैठिये भी एक बड़ा कारण हैं। इ समस्या से खाली बंगाल ही नाहीं, असम भी प्रभावित है, मुदा नीक बात ई है कि बिपच्छी राजनीतिक दलान का ई समस्या देखात नाहीं। असम अउर पश्चिम बंगाल की जनता इ घुसपैठ के बिरोध में खड़ी होइ गई है, इहिनिसे इ बार का जनादेस भी बांग्लादेशी घुसपैठियन के बिरोध में आया। इही के चलते असम में भाजपा सरकार का दुबारा बने अउर पश्चिम बंगाल में एक नवा राजनीतिक उदय के साथ सत्तारूढ़ होब इ बात का परिचायक है कि भाजपा ही नाहीं, जनता भी देस से घुसपैठियन का निकाले का मन बना चुकी है। सुने में ई भी आवत है कि जो बांग्लादेशी नागरिक पश्चिम बंगाल में घुसपैठ करके आए रहे, वे आपन देस वापस जाए का मानस बना चुके हैं। इहिनिसे ई भी कहा जात है कि अब पश्चिम बंगाल घुसपैठ की समस्या से मुकत होइ जाई।
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भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में सुरु से ही इ बात पर जोर दिहिस रही कि ओका विदेशी घुसपैठियन से दिक्कत है। भाजपा के नेतान के भासन भी इहिनि पर केंद्रित रहत रहे। इ मुददा पर भाजपा का जनता का भी समर्थन मिलि अउर जनता भाजपा का बहुमत दे दिहिस। एकरे अलावा ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार जो काम कीन, ओका कतहुं न कतहुं हिंदू समाज का नीचा देखावे वाला ही कहा जाई, मुदा तृणमूल कांग्रेस के नेता शायद ई बात भूल गए कि बहुसंख्यक समाज का नकारे की राजनीति एक तरह से ओकर सत्ता से अलग होए की तसबीर पेस कर सकत है।
पश्चिम बंगाल घुसपैठ की समस्या से बहुत परभावित है। हियाँ अचानक से जमीनन पर अवैध कब्जा होइ रहे हैं। कई जगह अचानक ही मुस्लिम बाहुल्य छेत्र बनते जात हैं, जिनमा मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर अउर मालदा आदि हैं। इ तीनों जिला बांग्लादेश की सीमा से लागे हैं। इही के चलते बंगाल में अपराध भी बहुत होए लागे हैं। इकर कारण इहे माना जात है कि जो मनई घुसपैठ करके आवा है, ओकर सामने रोजगार का संकट है। जब रोजगार नाहीं मिलि तौ स्वाभाविक रूप से मनई गलत काम भी करे लागत है।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रस्ते कई बांग्लादेशी नागरिक घुसपैठ करत रहे हैं। स्थानीय नागरिकन की मदद से वे सब आपन आशियाना भी बनाइ रहे रहे, इनके ज्यादातर आशियाने अवैध कब्जा करके ही बने हैं। तृणमूल कांग्रेस की सरकार के समय इनका पर्याप्त सरच्छन भी मिलि। इ उल्लेखनीय है कि जिन छेत्रन में मुसलमानन की जनसंख्या अचानक बढ़ी है, वे सब तृणमूल कांग्रेस के परभाव वाले छेत्र रहे हैं। इन छेत्रन में हिंदू समाज का केहू मनई जाए से डेरवात है। सवाल ई है कि इ डर के पैदा कीन अउर इनका सरच्छन देबे वाले कौन हैं? तृणमूल कांग्रेस तुष्टिकरण की राह पर चलत भवा इनका ताकत देबे का काम कीन अउर इहे ओकर हार का कारण भी बना।
अब पश्चिम बंगाल का राजनीतिक दृस्य बदल चुका है। जो लम्मे समय तक अमानुसिक अत्त्याचार सहे, वे अब सत्ता में आ चुके हैं, मुदा भाजपा का इ सत्ता अइसे ही नाहीं मिलि गई। ओकर सैकड़ों कार्यकर्ता के बलिदान इ जीत के नींव के पत्थर बने। चुनाव के बाद शुभेन्दु अधिकारी के निजी सहायक देवनाथ की हत्या इकर ताजा उदाहरण है। जेकर बारे में कहा जात है कि इ काम प्रशिक्षित अपराधी कीन हैं। सम्भावना इ बात की भी है कि घटना के बाद वे बांग्लादेश भाग चुके हैं। इका राजनीतिक हत्या के तौर पर भी देखा जात है अउर इकर आरोप तृणमूल कांग्रेस के नेतान पर लागत है।
घुसपैठियन की समस्या से परेशान पश्चिम बंगाल में सरकार बदले के बाद विदेशी घुसपैठियन के चेहरा उतर गए हैं, काहे से कि अब इन विदेशी घुसपैठियन का सहे नाहीं जाई। अब इनका बाहर जाए ही पड़ी। भाजपा की सरकार ही इनका बाहर निकाली। देस के गृह मंत्री अमित शाह इकर चेतावनी पहिले से ही देत रहे हैं। हियाँ इ कहना भी उचित होई कि भाजपा खाली घुसपैठियन का बाहर निकाले की बात कीन है, भारत के मुसलमानन की नाहीं, मुदा बिपच्छ अउर खास करके तृणमूल कांग्रेस इ भ्रम फैलावे की कोसिस कीन कि सभे मुसलमानन पर इकर परभाव पड़ि। विदेशी घुसपैठियन का बाहर निकाले का सब चाहत हैं, बिपच्छ का इ मुददा पर भाजपा का साथ देबे के चाही, काहे से कि इ रासट्रीय हित की बात है। – सुरेश हिंदुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार