भारत अउर साइप्रस के बीच हालहीं मा भई रणनीतिक साझेदारी अउर अलग-अलग समझौता क कईठो बड़ा कूटनीतिक, सामरिक अउर आर्थिक मायने अहैं। देखा जाय त इ खाली दुइनौ देसन के आपसी संबंधन क बढ़उब नाहीं अहै, बल्कि यूरोप, भूमध्यसागर, पश्चिम एशिया अउर दुनिया भर क ताकत क संतुलन से भी जुड़ा कदम माना जात अहै।
चूंकि तुर्की अउर साइप्रस के बीच गहिर दुश्मनी अहै, इही ताईं भारत ओका तुर्किये के खिलाफ इस्तेमाल कइ सकत अहै, काहे से तुर्किये भारत क पुरान दुस्मन पाकिस्तान क पक्का मीत अहै। इ तरह से भारत के रणनीतिकारन एके तीर से कईठो निसान साधे अहैं।
बताउब जरूरी अहै कि साइप्रस एक टापू (द्वीप) आय, इही ताईं ओकर जमीनी सीमा तुर्की के साथे नाहीं लागत है। लेकिन समुंदर के रस्ता से साइप्रस अउर तुर्की के बीच क दूरी खाली ६५ से ७० किलोमीटर अहै। एतने नाहीं, साइप्रस तुर्की से ८५ गुना छोटा देस अहै। इही ताईं तुर्की साइप्रस के उत्तरी हिस्सा पर जबरजस्ती कब्जा कइके बइठा अहै। काहे से तुर्की त साइप्रस का एक देस तक नाहीं मानत। इही वजह से दुइनौ देसन के बीच खटपट हमेशा बनी रहत अहै।
बीते दिनन वही देस साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स दिल्ली के दौरा पर आए रहिन। इ बीच भारत अउर साइप्रस के बीच १४ मुद्दन् पै ऐतिहासिक सौदा (डील) पक्का होइ गवा।
आवा अब हम पंचन का इ १४ डील्स क बारे मा बिस्तार से बताईत अहैं, लेकिन ओसे पहिले इ समझब जरूरी अहै कि आखिर मा इ खास डील अउर समझौता काय अहैं? त इ जानि लेइ कि भारत अउर साइप्रस अपने संबंधन का “रणनीतिक साझेदारी” (Strategic Partnership) तक बढ़ाए अहैं। जेहसे दुइनौ देसन के बीच रक्षा सहयोग क खाका (रोडमैप), आतंकवाद क खिलाफ साझा काम करै वाला दल, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, निवेश, पढ़ाई-लिखाई (शिक्षा), संस्कृति अउर व्यापार से जुड़ा कईठो समझौता भवा अहै। इही ताईं, इनके कूटनीतिक मायने बहुतै खास अहैं:-
पहिला, यूरोप मा भारत क रणनीतिक पकड़ मजबूत भई अहै, काहे से साइप्रस यूरोपीय संघ (EU) क सदस्य अहै। अइसे मा भारत का यूरोप के भीतर एक भरोसेमंद साथी मिलत अहै। साइप्रस भारत-ईयू फ्री ट्रेड अग्रीमेंट (India-EU Free Trade Agreement) का आगे बढ़ावै क समर्थन भी करे अहै। एकर मतलब इ अहै कि भारत क यूरोप तक आर्थिक पहुँच मजबूत होई। जेहसे भारतीय कंपनियन बरे यूरोप के बजार क दुआर अउर खुलि सकत अहैं। साथे-साथे भारत क कूटनीतिक आवाज ईयू (EU) के मंचन पै अउर असरदार होई।
दूसरा, तुर्किये-पाकिस्तान क गठजोड़ तोड़ै मा अब भारत का सहूलियत मिली, काहे से साइप्रस अउर तुर्किये के बीच बहुत दिनन से तनाव चलत अहै। दूसर कइती, तुर्किये कई बार पाकिस्तान क फेवर लेत हुए कश्मीर क मुद्दा उठावत रहा अहै। अइसे मा भारत-साइप्रस क नजदीकी का एक भू-राजनीतिक संतुलन के रूप मा देखा जात अहै। इहै वजह अहै कि भारत साइप्रस क संप्रभुता अउर अखंडता क समर्थन करे अहै, अउर साइप्रस भी आतंकवाद क खिलाफ भारत के रुख के साथे खड़ा देखान।
तीसरा, चीन के बढ़ते असर क जबाब भी माना जात अहै, काहे से भारत, साइप्रस अउर यूरोप के बीच बढ़ती साझेदारी का चीन क ‘बेल्ट एंड रोड’ (Belt and Road) रणनीति क विकल्प के रूप मा देखा जात अहै। खास कइके समुद्री व्यापार, माल पहुँचावै क रस्ता (सप्लाई चेन) अउर बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) मा सहयोग के नजरिया से इ बहुतै जरूरी अहै।
चौथा, आईएमईसी (IMEC) कॉरिडोर का मजबूती मिली, काहे से भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) भारत क बड़ी रणनीतिक योजनन मा से एक अहै। खास बात इ अहै कि साइप्रस पूरबी भूमध्यसागर मा होवै के नाते इ कॉरिडोर क एक जरूरी लॉजिस्टिक अउर समुद्री केंद्र बनि सकत अहै। जेहसे भारत क यूरोप तक व्यापार तेज होई, स्वेज नहर पै निर्भरता कुछ कम होई, अउर चीन के समुद्री नेटवर्क क एक नीक विकल्प तैयार होई।
पांचवां, समुद्री अउर रक्षा सहयोग बढ़ी, काहे से दुइनौ देसन रक्षा क खाका (रोडमैप) अउर समुद्री सुरक्षा सहयोग पै जोर दीन्हे अहैं। एकर मतलब इ अहै कि हिंद महासागर से लइके भूमध्यसागर तक भारत क रणनीतिक मौजूदगी बढ़ि सकत अहै। जेहसे साइबर सुरक्षा अउर आतंकवाद विरोधी नेटवर्क मजबूत होइहैं, अउर भारतीय नौसेना का एक परोक्ष (अप्रत्यक्ष) फायदा मिली।
छठा, भारत क “मल्टी-अलाइनमेंट” (बहु-पक्षीय) नीति का मजबूती मिली। काहे से भारत अब खाली एकै ताकत पै भरोसा कइके नाहीं बइठब चाहत। इही ताईं रूस, अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देसन अउर भूमध्यसागरीय देसन के साथे एक साथे नीक संबंध बनाइके भारत दुनिया भर क ताकत के संतुलन मा अपनी आजाद पहचान मजबूत करत अहै। साइप्रस के साथे भवा समझौता इहै नीति क हिस्सा माना जात अहै।
एकर आर्थिक मायने भी बहुतै खास अहैं, काहे से निवेश का दुगना करै क लक्ष्य धरा गवा अहै। साथे-साथे शिपिंग, फिनटेक, घूमै-घामै (पर्यटन) अउर स्टार्टअप के छेत्र मा भी सहयोग बढ़ि सकत अहै। साइप्रस भारतीय निवेश बरे यूरोप क “गेटवे” (दुआर) बनि सकत अहै।
इ डील भारत बरे एक बड़ा संदेसा भी अहै, काहे से इ सौदा देखावत अहै कि भारत अब खाली दक्खिन एशिया तक सिमट के नाहीं रहब चाहत, बल्कि यूरोप, भूमध्यसागर, पश्चिम एशिया अउर दुनिया के व्यापारिक रस्ता मा भी अपनी लम्बी अवधि क रणनीतिक भूमिका बढ़ावत अहै।
आखिर मा इ कहा जाइ सकत अहै कि भारत-साइप्रस समझौता खाली कौनों छोटे देस के साथे मामूली आपसी संबंध नाहीं अहै, बल्कि यूरोप मा रणनीतिक घुसपैठ, तुर्किये-पाकिस्तान-चीन क तिकड़म का काबू मा रखब, IMEC कॉरिडोर का मजबूती देब अउर दुनिया क राजनीति मा भारत क बढ़ती ताकत क साफ इसारा अहै।
– कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार अउर राजनीतिक विश्लेषक