मुंबई बरे मुसीबत बने बांग्लादेशी अउर रोहिंग्या घुसपैठियन का पुलिस अउर प्रशासन नीक जतन से सबक सिखाए कय देश कय आर्थिक राजधानी का बड़ी राहत दियाए हैं। बांद्रा रेलवे स्टेशन के लगे गरीब नगर इलाका मा पश्चिम रेलवे कय तरफ से चलावा जाई रहा अब तक कय सबसे बड़ा अतिक्रमण हटावै कय अभियान न सिर्फ रेलवे कय जमीन का खाली करावै कय दिशा मा एक बड़ा कदम साबित भवा, बल्कि ई कार्रवाई से ईहो साफ होई गवा कि कइसे गैर-कानूनी कब्जा करै वाले कानून व्यवस्था का चुनौती देवै मा तनिकौ पाछे नहीं हटत हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस अउर रेलवे के अधिकारियन पर जमके पाथर बरसावा गवा, जेहसे एक दाईं फिर ई सवाल उठ खड़ा भवा कि देस के कौनों भी हिस्सा मा अतिक्रमण हटावै या गैर-कानूनी कब्जन के खिलाफ अभियान चलतई इन घुसपैठियन अउर कब्जा करै वालन के लगे अचानक एतने पाथर कहां से आइ जात हैं?
बतावा जात है कि पश्चिम रेलवे बांद्रा रेलवे स्टेशन के लगे गरीब नगर मा फैलल गैर-कानूनी कब्जन का हटावै बरे बड़ा अभियान सुरु करे है। ई मुंबई मा रेलवे कय अब तक कय सबसे बड़ी अतिक्रमण हटावै कय कार्रवाई मानी जा रही है। रेलवे के मुताबिक करीब पांच हजार दुई सौ वर्ग मीटर जमीन खाली कराई जा रही है, जेकर कीमत करीब छह सौ करोड़ रुपया आंकी गई है। ई इलाका हार्बर लाइन कय पटरियन अउर बिजली व्यवस्था के एकदम लगे पहुंच चुका रहा, जेहसे रेल चलै अउर मुसाफिरन कय सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा रहा।
रेलवे अधिकारियन के मुताबिक हियां कई बहुमंजिला झुग्गियां फुटओवर पुलन कय ऊंचाई से भी ऊपर तक बनाय दीन गई रहीं। जेहसे आगे कय रेलवे योजनन अउर ट्रेनन के आवै-जाय मा बाधा खड़ी होय रही रही। रेलवे बहुत दिनन से ई जमीन खाली करावै चाहत रहा, काहे से बांद्रा स्टेशन अउर बांद्रा कुर्ला परिसर के लगे बसा ई इलाका रणनीतिक नजरिया से बहुत जरूरी माना जात है।
ई मामला मा कानूनी प्रक्रिया साल 2017 से पहिले ही सुरु होई चुकी रही। सरकारी जगह (सार्वजनिक परिसर) कानून के तहत कार्रवाई करत भए 27 नवंबर 2017 का बेदखली कय आदेस जारी कीन गवा रहा। ओकरे बाद मामला बंबई हाई कोर्ट अउर फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। ई साल 29 अप्रैल का हाई कोर्ट गैर-कानूनी कब्जा हटावै कय मंजूरी दीस रहा। बाद मा सुप्रीम कोर्ट भी ई आदेस पर रोक नहीं लगाइस। ओकरे बाद प्रशासन कार्रवाई तेज कइ दीस।
पश्चिम रेलवे करीब पांच सौ झुग्गियन का हटावै बरे निसान लगाए रहा, जबकि मिलजुल के भवे सर्वे मा जेहका सही पावा गवा, वैसन लगभग एक सौ ढांचन का अभी नहीं छुवा गवा। रेलवे कय कहब है कि आगे चलके ई जमीन कय उपयोग उपनगरीय अउर लंबी दूरी कय रेल सेवा कय बढ़ावै बरे कीन जाई। कार्रवाई का सफल बनावै बरे तगड़ा सुरक्षा इंतजाम कीन गवा रहा। करीब चार सौ पुलिसवाले, चार सौ रेलवे सुरक्षा बल अउर सरकारी रेलवे पुलिस कय जवान अउर लगभग दुई सौ रेलवे अधिकारी अउर कर्मचारी तैनात कीन गए रहे। बांद्रा स्टेशन अउर बांद्रा टर्मिनस के आसपास कय कई रास्ता बंद कइ दीन गए रहे, जेहसे भारी जाम लगि गवा अउर मुसाफिरन का अपन सामान लेके पैदल चलेक पड़ा।
सुरु मा तौ कार्रवाई शांति से चलत रही, लेकिन दुसरके दिन दुपहरी के बाद माहौल अचानक गरमाई गवा। अधिकारी जब एक गैर-कानूनी मस्जिद अउर हुआं लाग प्राइवेट मोबाइल टावर का हटावै कय कोसिस कीन, तौ भीड़ भड़क गई। विरोध करै वालन पुलिस अउर प्रशासन कय टीमन पर पाथर, बर्तन अउर दूसर सामान फेंकब सुरु कइ दीन। ओकरे बाद पुलिस का हल्का बल प्रयोग करेक पड़ा। ई उपद्रव मा सात पुलिसवाले अउर छह प्रदर्शनकारी घायल भये। पुलिस दस लोगन का हिरासत मा लीस अउर निर्मल नगर पुलिस थाना मा गैर-कानूनी भीड़ जुटाय, दंगा करै अउर सरकारी नौकरन पर हमला करै कय आरोप मा मुकदमा दरज कीस। घायलन कय इलाज भाभा अस्पताल अउर वीएन देसाई अस्पताल मा कीन गवा। एक पुलिसवाले अउर एक प्रदर्शनकारी का अस्पताल मा भरती करेक पड़ा, हालांकि दुनों कय हालत ठीक बताई जात है.
एडिशनल पुलिस कमिश्नर अभिनव देशमुख चेताउनी दीन हैं कि हिंसा मा सामिल लोगन के खिलाफ कड़ा कानूनी कार्रवाई कीन जाई। दूसर तरफ, कुछ रहै वालन कय कहब रहा कि वै कइयौ दस्कन से हियां रहत रहे अउर ओनके लगे हाउस टैक्स, वाटर टैक्स अउर बिजली कय कनेक्शन कय कागज-पत्तर भी हैं। कई परिवारन आरोप लगाया कि ओनका घर खाली करै बरे पूरा बखत नहीं दीन गवा अउर दोबारा बसावै कय ठीक-ठाक इंतजाम भी नहीं कीन गवा। कुछ लोग ईहो कहेन कि ईद से ठीक पहिले भई ई कार्रवाई ओनके बरे मुसीबत बढ़ाय दीस है।
खैर, इन सब दावन अउर इंसानी नजरिया के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गैर-कानूनी कब्जन के खिलाफ हर कार्रवाई के दौरान पाथरबाजी कय घटना काहे सामने आवत हैं? चाहे देस कय कौनों भी राज्य होय, अतिक्रमण हटावै पहुंची पुलिस अउर प्रशासन पर हमला करब अब एक तय रणनीति नियन दिखाई देत है। जेहसे साफ है कि कुछ लोग कानून व्यवस्था बिगाड़ के सरकारी काम का रोके चाहत हैं। मुंबई जइसन संवेदनसील अउर आर्थिक रूप से जरूरी सहर मा अइसन हिंसा न सिर्फ चिंता कय बात है, बल्कि ई देस कय सुरक्षा अउर सहर कय व्यवस्था दुनों बरे बड़ी चुनौती है।
-नीरज कुमार दुबे