संपादकीय

असम-नगालैंड कय बीच दशकन कय विवाद खतम, तेल समझौता संपन्न, शाह पूर्वोत्तर कय भाग्य बदल दिहिन

ऊर्जा आत्मनिर्भरता कय डगर मां तेजी से आगे बढ़त मोदी सरकार कय पूर्वोत्तर से एक बड़ रणनीतिक कामयाबी मिलि अहै। केंद्र, असम अउर नगालैंड कय बीच तेल अउर प्राकृतिक गैस खोजय कय लइके भवा त्रिपक्षीय समझौता भारत कय ऊर्जा क्षेत्र मां आत्मनिर्भर बनावय कय अभियान कय निर्णायक पन्ना अहै।

दशकों से विवाद अउर अस्थिरता मां फंसा असम-नगालैंड सीमा क्षेत्र मां तेल खोजय कय रस्ता खोलिके केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कय ओय मिशन कय नई ताकत दइ दिहिन, जेकर लक्ष्य विदेशी तेल निर्भरता घटायकै भारत कय ऊर्जा महाशक्ति बनावब अहै। इहै वजह अहै कि अमित शाह इका विकसित पूर्वोत्तर अउर आत्मनिर्भर भारत कय ओर ऐतिहासिक कदम बताइन हय।

हम आपकय बताइ देइ कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कय मौजूदगी मां भारत सरकार, असम सरकार अउर नगालैंड सरकार कय बीच असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रन मां खनिज तेल संचालन कय संबंध मां एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर दस्तखत भवा। इ मौके पर केन्द्रीय पेट्रोलियम अउर प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम कय मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा अउर नगालैंड कय मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो समेत केंद्र, असम अउर नगालैंड सरकार कय बड़ अधिकारी मौजूद रहेन। अमित शाह इका ऐतिहासिक पल बतावत साफ कहिन कि इ समझौता विकसित पूर्वोत्तर कय रस्ता मां खड़ा आखिरी बड़ बाधा हटा दिहिस अहै।

हम आपकय बताइ देइ कि असम अउर नगालैंड कय सीमा से लाग विवादित क्षेत्र मां तीन दशक से ज्यादा समय से तेल अउर खनिज खोज बंद पड़ा रहा। अधिकार क्षेत्र कय लइके दुनौ राज्यन कय बीच तनाव बना रहा, जवने कय चलते हजारन करोड़ रुपया कय संपदा जमीन कय नीचे दबी रही। अब इ समझौता कय तहत एक हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र मां तेल, गैस अउर खनिज संसाधन कय खोज अउर उत्पादन कय रस्ता खुलि गवा अहै। सबसय जरूरी बात इ अहै कि दुनौ राज्यन संसाधनन कय बटवारा पर 50-50 कय सहमति बनाइन हय। इहै ओई राजनीतिक परिपक्वता अहै जवन इ समझौता कय टकराव से निकालिकै साझेदारी कय मॉडल मां बदल दिहिस।

अमित शाह दावा करिन कि इ एक समझौता से हर रोज एक हजार से पंद्रह सौ बैरल तेल उत्पादन क्षमता कय दस गुना तक बढ़ावा जाइ सकत अहै। सिर्फ एक तेल क्षेत्र से पंद्रह हजार करोड़ रुपया से ज्यादा कय कमाई कय अनुमान लगावा गवा अहै। इ बयान सिर्फ आर्थिक संभावना कय इशारा नाहीं, बल्कि ओई रणनीतिक दिशा कय इशारा अहै जवने मां भारत तेजी से आगे बढ़य चाहत अहै।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिम एशिया मां अस्थिरता अउर ऊर्जा संकट कय दौर मां भारत लम्बा समय से आयातित तेल पर निर्भरता घटायकै कोशिश करित अहै। अइसन समय मां पूर्वोत्तर कय विशाल तेल अउर गैस भंडार भारत कय खातिर नई ऊर्जा रीढ़ साबित होई सकत अहैं। दरअसल इ समझौता सिर्फ तेल निकालय कय मसला नाहीं अहै। इ पूर्वोत्तर कय संघर्ष कय पहचान से निकालिकै सामरिक अउर आर्थिक शक्ति केंद्र मां बदलय कय कवायद अहै।

अमित शाह कहिन कि जदि नगालैंड मां फैले तेल अउर गैस भंडार कय पूरा दोहन भवा तौ भारत विदेशी देशान पर अपनी ऊर्जा निर्भरता काफी हद तक कम कर सकि। एकर सीधा मतलब इ अहै कि भारत अपने ऊर्जा हितन कय लइके ज्यादा स्वतंत्र रणनीति अपनाइ सकि। देखल जाइ तौ ऊर्जा आत्मनिर्भरता सिर्फ आर्थिक मुद्दा नाहीं होत, इ राष्ट्रीय सुरक्षा कय मूल तत्व बनि चुका अहै।

साथ ही इ पूरा घटनाक्रम कय दूसर बड़ पहलू सुरक्षा अउर शांति से जुड़ल अहै। अमित शाह पूर्वोत्तर मां हिंसा कय घटनान मां लगभग अस्सी प्रतिशत गिरावट कय दावा करत कहिन कि साल 2019 कय बाद 12 शांति समझौता भवा अहैं। इहै कारण अहै कि अब सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) कय भी पूर्वोत्तर कय ज्यादातर हिस्सा से हटावय कय तैयारी चलत अहै। अमित शाह भरोसा जवइन कि अगिला साल एक या दुई राज्य कय छोड़िकै पूरा पूर्वोत्तर से इ कानून हटावा जाइ सकत अहै। इ बयान बहुत महत्वपूर्ण अहै, काहे से दशकों तक पूर्वोत्तर कय पहचान उग्रवाद, सैन्य मौजूदगी अउर अस्थिरता से जुड़ी रही। अब केंद्र सरकार इ संदेश देवय चाहत अहै कि क्षेत्र संघर्ष से विकास कय ओर बढ़ चुका अहै।

रणनीतिक नजरिया से देखल जाइ तौ इ समझौता चीन अउर दक्षिण पूर्व एशिया से जुड़ल भारत कय व्यापक नीति से भी मेल खात अहै। पूर्वोत्तर भारत लम्बा समय तक सिर्फ भौगोलिक सीमा मानल जात रहा, लेकिन अब ओका आर्थिक गलियारा, ऊर्जा केंद्र अउर संपर्क सेतु कय रूप मां विकसित कीन जात अहै। सड़क, रेल, निवेश, पर्यटन अउर ऊर्जा परियोजनान कय जरिए केंद्र सरकार इ क्षेत्र कय राष्ट्रीय विकास कय मुख्यधारा मां लावय कय कोशिश करत अहै। तेल अउर गैस परियोजनान कय सक्रिय होय से निजी निवेश बढ़ी, रोजगार पैदा होई अउर क्षेत्रीय असंतोष कम होई। इहै ओई बिंदु अहै जहवां विकास अउर राष्ट्रीय सुरक्षा एक दूसर कय पूरक बनि जात अहैं।

असम कय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा भी कहिन कि इ समझौता देश कय दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतन कय पूरा करय मां मदद करी। वहीं नगालैंड कय मुख्यमंत्री नेफियू रियो कय सहमति इ बात कय इशारा अहै कि अब पूर्वोत्तर कय राजनीति टकराव से ज्यादा आर्थिक साझेदारी कय डगर बढ़ि रहल अहै। इहै कारण अहै कि अमित शाह इका जीत-हार कय नाहीं, बल्कि सबकी जीत कय समझौता बताइन हय। बहरहाल, अब साफ अहै कि इ त्रिपक्षीय समझौता सिर्फ सीमाई विवाद सुलझाय कय कोशिश नाहीं, बल्कि पूर्वोत्तर कय भविष्य कय नया ढंग से परिभाषित करय कय शुरुआत अहै।

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