
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी कै फ्रांस अउर स्लोवाकिया कै यात्रा पूरी दुनिया कय ध्यान अपनी ओर खींच लिहिस बा। खास कय फ्रांस कै राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जवन धुरंधर स्टाइल मा मोदी कै स्वागत करिन, उ दुनिया का साफ संदेश देइ दिहिन कि मोदी वैश्विक राजनीति कय सबसे बड़े धुरंधर मा गिने जात अहैं। ई यात्रा कय दौरान यूरोप कै धरती पर भारत कय बढ़त ताकत अउर मोदी कय वैश्विक लोकप्रियता हर तरफ देखाई दिहिस।
फ्रांस से लइके स्लोवाकिया तक भारतीय समुदाय अपने प्रधानमन्त्री कै जवन उत्साह, जोश अउर भारतीय अन्दाज मा स्वागत करिन, ओकर गूँज पूरी दुनिया मा सुनाई दिहिस। हाथ मा तिरंगा, भारत माता कै जयकारा अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम ई दिखाई दिहिन कि दुनिया भर मा बसे भारतीय आज अपने देस कय बढ़त प्रतिष्ठा पर गर्व महसूस करय हैं। यही कारण अहै कि मोदी कै ई यात्रा खाली एक विदेशी दौरा नाहीं रही, बल्कि दुनिया कै सामने नवा अउर शक्तिशाली भारत कै दमदार प्रदर्शन बन गवा।
यूरोप मा गूँजी भारत कै ताकत
देखा जाय तौ यूरोप कै धरती पर मोदी कै स्वागत जवन गर्मजोशी, रणनीतिक सम्मान अउर राजनीतिक विश्वास कै साथ भवा, उ दुनिया का ई संदेश दिहिस कि बदलत वैश्विक व्यवस्था मा भारत कय भूमिका निर्णायक होत जात अहै। खास कय फ्रांस कै राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमन्त्री मोदी कै यात्रा का जवन भारतीय रंग दिहिन, उ भारत कय बढ़त सांस्कृतिक अउर रणनीतिक ताकत कै स्वीकारोक्ति रही। सोशल मीडिया पर साझा कय गय वीडियो, मोदी अउर मैक्रों कै आत्मीयता अउर नाइस मा आयोजित भारत इनोवेट्स सम्मेलन ई साबित कर दिहिस कि भारत अउर फ्रांस कै रिश्ता अब खाली हथियार खरीद तक सीमित नाहीं अहै, बल्कि ई तकनीक, नवाचार, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता अउर वैश्विक नेतृत्व कै साझेदारी मा बदल चुका अहै।
राफेल से बदल जइहै दक्षिण एशिया कै खेल
मोदी अउर मैक्रों कै बैठक मा जवन सबसे महत्वपूर्ण संदेश निकल के आवा, उ रहा रक्षा सहयोग कय नवा प्रारूप। भारत साफ कर दिहिस कि अब उ खाली विदेशी हथियार कै खरीदार नाहीं रही। राफेल कार्यक्रम का लइके भारत सह-विकास, सह-डिजाइन, सह-उत्पादन अउर सह-निर्माण कै नीति अपनाय कै अपनी रणनीतिक दिशा स्पष्ट कर दिहिस अहै। विदेश सचिव विक्रम मिस्री कै बयान ई बात कै संकेत अहै कि मोदी सरकार रक्षा क्षेत्र मा ‘आत्मनिर्भर भारत’ कै लक्ष्य का निर्णायक रूप से आगे बढ़ावत अहै।
देखा जाय तौ राफेल खाली एक युद्धक विमान नाहीं अहै, बल्कि ई भारत कय सामरिक शक्ति कै प्रतीक बन चुका अहै। भारतीय वायुसेना कय पास पहिले से मौजूद 36 राफेल विमान दक्षिण एशिया मा शक्ति संतुलन का बदल दिहिन अहै। अब भारतीय नौसेना कय खातिर 26 राफेल समुद्री विमानन कै समझौता अउर भविष्य मा बड़े राफेल कार्यक्रम कै तैयारी ई दिखावत अहै कि भारत हिंद महासागर से लइके हिमालय तक अपनी सैन्य क्षमता का नई ऊँचाई पर लेइ जात अहै। इन विमानन कै लम्बी दूरी तक मार करय कै क्षमता, अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली अउर बहु-भूमिका युद्ध कौशल भारत का चीन अउर पाकिस्तान दुनौ कै खिलाफ निर्णायक बढ़त देत अहैं। सबसे महत्वपूर्ण बात ई अहै कि अब राफेल कै निर्माण अउर ओकर पुर्जन कै उत्पादन भारत मा करय कै दिशा मा बातचीत आगे बढ़ रही अहै। एकर जरिए भारत दुनिया कय प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र बन सकत अहै। इससे नाहीं खाली लाखों कुशल रोजगार पैदा होइहैं, बल्कि भारत कय रक्षा औद्योगिक ढांचा भी मजबूत होइ। ई बदलाव दक्षिण एशिया कै सामरिक राजनीति पर गहरा प्रभाव डारि। अब तक हथियार आयात पर निर्भर भारत धीरे-धीरे रक्षा निर्यातक राष्ट्र बनय कै दिशा मा बढ़ रहा अहै। इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भारत कय पक्ष मा अउर ज्यादा झुकत देखाई देइ।
राफेल, एआई अउर रणनीति… मोदी रचिन नवा इतिहास
साथ ही फ्रांस कै साथ भारत कै साझेदारी खाली रक्षा तक सीमित नाहीं अहै। दुनौ देस अगला पांच साल मा द्विपक्षीय व्यापार का दोगुना करय कै लक्ष्य तय कय लिहिन अहै। भारत-फ्रांस नवाचार रोडमैप 2030, कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्य समूह, आर्थिक सुरक्षा संवाद अउर महत्वपूर्ण खनिजन कै आपूर्ति शृंखला पर सहयोग जइसन फैसला ई बात कै संकेत अहैं कि दुनौ देस आवय वारे दशकन कै वैश्विक अर्थव्यवस्था अउर तकनीकी प्रतिस्पर्धा का साथ मिलिकय आकार देब चाहत अहैं। नाइस मा आयोजित भारत इनोवेट्स सम्मेलन ई यात्रा कै सबसे प्रतीकात्मक क्षण साबित भवा। एक सौ बीस से ज्यादा भारतीय डीप टेक स्टार्टअप, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानन कै भागीदारी अउर वैश्विक निवेशकन कै मौजूदगी ई साबित कर दिहिस कि भारत अब खाली बाजार नाहीं, बल्कि नवाचार कय वैश्विक केंद्र बन चुका अहै।
मोदी सही कहे अहैं कि भारत अउर फ्रांस कै रिश्ता खाली हितन कै नाहीं, बल्कि साझा दृष्टि कै रिश्ता अहै। मैक्रों द्वारा भारत कै चंद्रयान उपलब्धि अउर नवाचार क्षमता कै खुली प्रशंसा ई बात कै प्रमाण अहै कि विश्व अब भारत का तकनीकी महाशक्ति कै रूप मा देखय लाग अहै। फ्रांस यात्रा कै एक अउर महत्वपूर्ण पहलू रहा अंतरिक्ष अउर परमाणु ऊर्जा सहयोग। छोट अउर उन्नत परमाणु रिएक्टरन पर सहयोग तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम मा साझेदारी भारत का भविष्य कै रणनीतिक तकनीकन मा अग्रणी स्थान दिवाय सकत अहै। यही कारण अहै कि भारत-फ्रांस संबंध अब पारंपरिक कूटनीति से निकलिकय भविष्य कै वैश्विक व्यवस्था कै धुरी बनत देखाई देत अहैं।
फ्रांस कै साथ स्लोवाकिया मा भी बाज मोदी कै डंका
फ्रांस कै बाद प्रधानमन्त्री मोदी कै स्लोवाकिया यात्रा भारत कय यूरोपीय रणनीति का अउर गहराई दिहिस। ई कउनो भारतीय प्रधानमन्त्री कय पहिली स्लोवाकिया यात्रा रही अउर इसी तथ्य इसे ऐतिहासिक बनाय दिहिस। ब्रातिस्लावा मा प्रधानमन्त्री राबर्ट फित्सो अउर राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी कै साथ भई बैठकन ई स्पष्ट कर दिहिस कि भारत अब यूरोप कै छोट लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देसन कै साथ भी मजबूत संबंध बनावत अहै। भारत अउर स्लोवाकिया कै बीच संबंधन का व्यापक साझेदारी कै दर्जा दिआ जाय एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम अहै। ई मध्य यूरोप मा भारत कय बढ़त उपस्थिति कै संकेत अहै। वाहन निर्माण, रेलवे उत्पादन, निवेश, उभरत तकनीक अउर व्यापार कै क्षेत्रन मा सहयोग भारत का यूरोपीय संघ कै भीतर नई आर्थिक अउर रणनीतिक पहुँच देइ। खास कय भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता का जल्दी लागू करय कै दिशा मा सक्रिय देखाई देत अहै, जकर लाभ भारतीय उद्योग अउर निर्यात का मिलि।
कूटनीति कै मास्टर अहैं मोदी
देखा जाय तौ मोदी कै ई पूरी यूरोपीय यात्रा असल मा भारत कय बहुस्तरीय कूटनीति कै उदाहरण अहै। एक ओर फ्रांस जइसन शक्तिशाली राष्ट्र कै साथ रक्षा अउर तकनीकी गठजोड़ का नई ऊँचाई दिआ जात अहै, वहीं दूसरी ओर स्लोवाकिया जइसन देसन कै माध्यम से यूरोप मा भारत कय प्रभाव क्षेत्र बढ़ाय जात अहै। ई नीति भारत का ग्लोबल साउथ अउर पश्चिमी शक्तियन कै बीच एक संतुलित, विश्वसनीय अउर प्रभावशाली शक्ति कै रूप मा स्थापित करत अहै। इसमें कउनो दुइ राय नाहीं कि आज दुनिया कै बदलत भू-राजनीतिक माहौल मा भारत जवन आत्मविश्वास कै साथ अपनी रणनीतिक दिशा तय करत अहै, ओकर केंद्र मा प्रधानमन्त्री मोदी कै सक्रिय अउर दूरदर्शी कूटनीति अहै। चाहे रक्षा आत्मनिर्भरता कै लक्ष्य हो, वैश्विक नवाचार मा नेतृत्व कै महत्वाकांक्षा हो या यूरोप कै साथ बहुआयामी साझेदारी कै विस्तार, मोदी सरकार हर मोर्चे पर भारत कय स्थिति का मजबूत कय अहै।
-नीरज कुमार दुबे