
फ्रांस मां भवा जी-7 शिखर सम्मेलन पय आज पूरी दुनिया कय नजर टिकी अहै। वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा और युद्ध जइसन कई महत्वपूर्ण बिषयन पय चर्चा करय कय खातिर दुनिया कय सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्था मनई इकट्ठा भवा अहैं। अइसन समय मां इ सवाल स्वाभाविक रूप से उठत अहै कि का जी-7 आज भी ओतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली अहै, जितना ओकर स्थापना कय समय रहा? का इ संगठन वास्तव मां वैश्विक समस्या कय समाधान कय मंच बनि पावा अहै या इ कुछ शक्तिशाली देसन कय हित कय रक्षा कय माध्यम बनि कय रहि गवा अहै? का इ मंच कय उपयोगिता कय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपन स्वार्थ कय खातिर धुंधलाय मां लाग अहैं?
दुनिया मां शांति स्थापना, संतुलित आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कय बढ़ावा दयय कय उद्देश्य से बना विभिन्न वैश्विक संगठन कय सफलता कय मूल्यांकन ओकर परिणाम से होत अहै, न कि ओकर घोषणापत्र से। दुर्भाग्य से जी-7 कय संदर्भ मां इ सवाल बार-बार उठत रहा अहै कि ओकर निर्णय और घोषणा कय वास्तविक प्रभाव कतना अहै। पिछला बरिसन मां रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया कय संकट, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन कय चुनौती और बढ़त व्यापारिक प्रतिस्पर्धा जइसन समस्या कय समाधान मां इ संगठन आपन भूमिका निभाय मां सफल नहीं देखावा अहै।
जी-7 मां अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल अहैं, लेकिन व्यवहार मां ओकर दिशा और नीति निर्धारण पय अमेरिका कय प्रभाव सबसे जादा देखाय देत अहै। विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रंप कय नेतृत्व मां अमेरिका कय विदेश नीति सहयोग कय जगह दबाव और वर्चस्व कय प्रवृत्ति कय बढ़ावा दिहिन अहै। ट्रंप आपन सहयोगी देसन कय साथ भी कई बार अइसन व्यवहार करिन अहै, मानौ वे साझेदार नहीं बल्कि अमेरिकी नीति कय पालन करय वाला अनुयायी हों। टैरिफ युद्ध, व्यापारिक प्रतिबंध, रक्षा खर्च कय लेकर दबाव और कई एकतरफा निर्णय सदस्य देसन कय बीच अविश्वास बढ़ाय अहैं।
ईरान-इजरायल युद्ध समूची दुनिया कय अर्थव्यवस्था कय धराशायी कय दिहिन और इ अब अमेरिका कय कारण ही भवा अहै काहे से पिछला कुछ महिना मां हिंसक संघर्ष पूरा क्षेत्र कय एक व्यापक युद्ध कय आशंका से भरि दिहिन रहा। ईरान, इजरायल और इ क्षेत्र कय कई गैर-राज्यीय समूह आमने-सामने खड़ा देखाय देत रहे। इ संघर्ष कय सबसे महत्वपूर्ण केंद्र होर्मुज जलमार्ग बनि गवा रहा, जहवां से दुनिया कय लगभग पांचवां हिस्सा कय तेल गुजरत अहै। जी-7 समूह कय देस भी इकर लेकर बंटवा रहे।
यही कारण अहै कि जी-7 कय भीतर आज पहिले जइसन एकजुटता नहीं देखाय देत। फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और जापान जइसन देस कई मुद्दा पय अमेरिका से अलग नजरिया रखत अहैं। ईरान युद्ध ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन कय सवाल पय, वैश्विक व्यापार कय नियम पय और बहुपक्षीय संस्था कय भूमिका कय लेकर भी मतभेद सामने आवत रहत अहैं। अइसन मां इ उम्मीद करब कठिन अहै कि इ संगठन दुनिया कय जटिल समस्या कय समाधान कय खातिर कौनों सर्वमान्य और प्रभावी रणनीति पेश कइ पाई।
इ सम्मेलन मां भारत कय उपस्थिति विशेष महत्व रखत अहै। भारत भले ही जी-7 कय सदस्य न हो, लेकिन ओकर बढ़त आर्थिक शक्ति, वैश्विक प्रतिष्ठा और विकासशील देसन कय प्रतिनिधि स्वरूप ओकर इ मंच कय एक महत्वपूर्ण सहभागी बना दिहिन अहै। इ अवसर केवल भारत कय उपलब्धि कय पेश करय कय नहीं, बल्कि उन विकासशील और गरीब देसन कय आकांक्षा कय मुखर करय कय भी अहै, जिनकर आवाज अक्सर वैश्विक निर्णय प्रक्रिया मां दब जात अहै। आज अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका कय कई देस आर्थिक संकट, खाद्य असुरक्षा, जलवायु आपदा और कर्ज कय बोझ से जूझत अहैं। ओकर प्राथमिकता जी-7 देसन कय प्राथमिकता से अलग अहैं।
जी-7 कय प्रासंगिकता पय सबसे बड़ सवाल ओकर प्रभावशीलता कय लेकर अहै। रूस-यूक्रेन युद्ध बरिसन से चलत अहै। पश्चिम एशिया लगातार अशांत अहै। आतंकवाद और कट्टरता कय चुनौती बनल अहै। जलवायु परिवर्तन कय कारण पूरी दुनिया अभूतपूर्व संकट कय सामना करत अहै। इकर बाद भी वैश्विक नेतृत्व देय कय दावा करय वाला मंच कय उपलब्धि सीमित देखाय देत अहै।
आत्ममंथन अहै जरूरी
फ्रांस मां होत इ सम्मेलन केवल आर्थिक या राजनीतिक मुद्दा पय चर्चा कय मंच नहीं होय कय चाही, बल्कि इ आत्ममंथन कय अवसर भी बनय कय चाही। जी-7 कय इ विचार करय कय होइ कि बदलत दुनिया मां ओकर भूमिका का अहै और ओकर प्रकार अधिक उपयोगी, प्रभावी और विश्वसनीय बनि सकत अहै। यदि इ संगठन आपन भीतर बढ़त मतभेद कय दूर कइके, समानता और सहयोग कय भावना कय साथ आगे बढ़त अहै, तभी ओकर दुनिया कय उम्मीद पय खरा उतर सकई।
भारत कय इ अवसर पय साहस के साथ इ संदेश दयय कय चाही कि दुनिया कय भविष्य शक्ति-संतुलन, संवाद, सहयोग और समावेशिता मां निहित अहै। कौनों एक देस या समूह कय प्रभुत्ववादी सोच से नहीं, बल्कि साझी जिम्मेदारी और साझा विकास कय भावना से ही दुनिया मां स्थायी शांति, आर्थिक स्थिरता और मानव कल्याण कय रास्ता खुल सकत अहै। यही इ समय कय सबसे बड़ी जरूरत अहै और यही जी-7 जइसन मंच कय वास्तविक कसौटी भी।